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50 करोड़ का लोन दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 30 Apr 2016 09:30 AM IST
सार
- नकली बैंक अधिकारी और फर्जी कागजातों के जरिए दिया वारदात को अंजाम
- एक महिला समेत चार गिरफ्तार, मैनेजमेंट कंसलटेंट से की ठगी
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- फोटो : demo pic
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विस्तार
उत्तर पश्चिम जिला के स्पेशल स्टाफ ने बैंक से 50 करोड़ का लोन दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। मैनेजमेंट कंसलटेंट से ठगी करने वाले चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। जिसमें एक महिला भी शामिल है।
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इन लोगों ने एसबीआई के नकली अधिकारी बनकर व फर्जी कागजात के जरिए ठगी की वारदात को अंजाम दिया। पकड़े गए आरोपियों के पास से फर्जी कागजात व पहचान पत्र मिले हैं। आरोपियों की पहचान जगतपुरी निवासी विजय पोरटर(51), शाहदरा निवासी चंदर प्रकाश (43), गीता कालोनी निवासी केवल कृष्णा(49) और गीता के रूप में हुर्ई है। पुलिस एक महिला समेत अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है।
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जिला पुलिस उपायुक्त विजय सिंह ने बताया कि हौजखास निवासी मुकुल पॉल तनेजा ने गत चार अप्रैल को मौर्या एंक्लेव थाने में ठगी की शिकायत की। शिकायत में पीड़ित ने बताया कि कुछ लोगों ने उन्हें पार्लियामेंट स्ट्रीट स्थित एसबीआई बैंक से 50 करोड़ का लोन दिलाने का झांसा देकर नौ लाख की ठगी कर ली है।
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उसने बताया कि आरोपी चंद्रप्रकाश से कनॉट प्लेस स्थित कॉफी शॉप में मुलाकात हुई। आरोपी ने प्रॉपर्टी डिलिंग के साथ-साथ एसबीआई से लोन दिलाने का काम करने की बता कही। साथ ही पंजाबी बाग की रहने वाली एक महिला को आठ करोड़ का लोन दिलाने का दावा किया।
आरोपी की बातों पर विश्वास कर उसने अपनी प्रॉपर्टी पर लोन दिलाने की बात कही। आरोपी ने 50 करोड़ रुपये लोन दिलाने के लिए सुविधा शुल्क के तौर पर 25 लाख की मांग की। लेकिन पीड़ित नौ लाख देने को राजी हुआ। उसके बाद चंद्रप्रकाश ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर बैंक के कई कागजात तैयार करवाए।
कुछ दिन बाद पीड़ित के घर का मूल्य निर्धारण करवाया। साथ ही आरोपियों ने अदालत से पीड़ित के मकान के फ्रील होल्ड होने के कागजात तैयार करवाए। आरोपियों ने पीड़ित को पार्लियामेंट स्थित एसबीआई में एक महिला मैनेजर से मिलवाया और लोन की बाबत बातचीत करवाई। फिर सत्यापन के लिए एक महिला से फोन करवाया।
गत वर्ष अक्तूबर माह में आरोपियों ने उसे बैंक से 10.80 करोड़ का पहली इंस्टॉलमेंट लेने के लिए बैंक बुलाया। लेकिन बैंक पहुंचने के बाद आरोपियों ने रुपये नही मिलने की बात कही और सभी आरोपी इसके लिए एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराने लगे।
मामले की जांच के दौरान पुलिस की टीम ने बैंक से संपर्क किया तो पता चला कि पीड़ित को दिए गए सभी कागजात फर्जी हैं। पुलिस ने आरोपियों की पहचान कर उन्हें दबोच लिया।
आर्थिक तंगी की वजह से दिया वारदात को अंजाम
पुलिस के मुताबिक पूछताछ में खुलासा हुआ है कि विजय इस फर्जीवाड़ा का मास्टर माइंड है। वह चंदर प्रकाश का बचपन का दोस्त है। वहीं केवल कृष्ण से उसकी मुलाकात 17-18 साल पहले हुई थी। विजय का प्रॉपर्टी का कारोबार है वहीं चंदर प्रकाश अपने बेटे के रेस्टोरेंट चलाने में मदद करता है। विजय बैंक से लोन दिलाने का काम करता है।
तीनों दोस्त आर्थिक तंगी से गुजर रहे थे। वह अपने दोस्तों के साथ मिलकर किसी को बैंक से बड़ी रकम लोन दिलाने के नाम पर ठगी करने की साजिश रची। उसने एसबीआई की शाखा से कुछ स्टांप चुराये और फिर अपने दोस्तों को नकली वकील, मूल्य निर्धारक, बैंक मैनेजर और टेली कॉलर बनाकर वारदात को अंजाम दिया।