जासूसी कांडः पाक उच्चायोग के अधिकारियों से इन कोडवर्ड्स में बातें करता था सपा MP का पीए
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हैलो, पिज्जा खाना है, मैं कागज और कलम लेकर आऊंगा, बाकी चीजें मिलने के बाद तय हो जाएगी...। जी हां दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की पूछताछ में सपा सांसद के पीए फरहत खान ने खुलासा किया है कि वह पाक अधिकारियों से कोड वर्ड में बातचीत किया करता था।
मौके पर पहुंचकर ही दस्तावेज देखकर उनकी रकम तय कर दी जाती थी। बाद में उसे रुपये मिल जाया करते थे। कुछ दिनों पूर्व महमूद ने उसे दो लाख रुपये दिए थे। पूछताछ के दौरान फरहत ने खुलासा किया कि उनको अगर अंसल प्लाजा में मिलना होता था तो वह फोन पर पिज्जा खाने की बात कर मिलने की जगह फिक्स किया करते थे।
इसके अलावा जब उनको पीतमपुरा में मिलना होता था तो वह बर्गर और कॉफी पिलाने की बात करते थे। इसके अलावा दस्तावेज साथ में लाने के लिए फरहत अपने साथ कागज-कलम लाने की बात करता था।
उसका कहना था कि पाक अधिकारियों ने ही उसे कोड वर्ड बताए थे। पुलिस फरहत से पूछताछ कर और कोड वर्ड का पता लगाने का प्रयास कर रही है। छानबीन के दौरान फरहत ने पाक उच्चायोग के कुछ और अधिकारियों के नाम भी बताएं हैं।
सपा सांसद के पीए ने बताया फोटो खींच कर रहे थे ब्लैकमेल
सपा सांसद (राज्यसभा) के पीए (निजी सचिव) फरहत खान ने अपराध शाखा की पूछताछ में खुलासा किया है कि पाक उच्चायोग के अधिकारी उसे फोटो खींचकर ब्लैकमेल कर रहे थे। फरहत ने दावा किया है कि वह जासूसी के धंधे से निकलना भी चाह रहा था, लेकिन उसको निकलने नहीं दिया जा रहा था।
पूछताछ में फरहत ने बताया कि उसने रक्षा, जल, पेट्रोलियम और गृहमंत्रालय के अलावा विदेश व नागरिक उड्डयन मंत्रालय के भी कुछ दस्तावेज पाक अधिकारियों को सौंपे थे। इधर मामले की छानबीन के लिए दिल्ली पुलिस अपराध शाखा की एक टीम मौलाना रमजान व शोएब को लेकर राजस्थान रवाना हो गई है। जांच के दौरान एक बीएसएफ अधिकारी का नाम और सामने आया है। संभावना व्यक्त की जा रही है कि जल्द ही कुछ और गिरफ्तारी हो सकती है।
पूछताछ के दौरान फरहत ने पुलिस को बताया है कि वर्ष 1996 से उसका पाक उच्चायोग आना-जाना था। पाक उच्चायोग के अधिकारियों के बहकावे में आकर 1998 में पहली बार उसने गुप्त दस्तावेज पाक अधिकारियों को सौंपे थे।
दस्तावेज सौंपते समय के फोटो खींची
शुरुआत में उसने लालच में आकर यह सब किया, लेकिन बाद में अधिकारियों ने चुपचाप उसके पाक उच्चायोग में पार्टी में आने व दस्तावेज सौंपते समय के फोटो खींच लिए। अब वह इसी आधार पर फरहत हो ब्लैकमेल करने लगे।
कुछ दिनों बाद जब उसने जासूसी के धंधे से बाहर निकलने का प्रयास किया तो आरोपियों ने फोटो दिखाकर उसे काम जारी रखने के लिए कहा। पिछले 18 सालों से लगातार वह सांसदों का सचिव होने का फायदा उठाकर अहम दस्तावेज हासिल कर पाक अधिकारियों को सौंप रहा था। फरहत से दिल्ली स्थित अपराध शाखा के कार्यालय में लगातार पूछताछ जारी है।
इधर, अपराध शाखा की टीम मौलाना रमजान व शोएब को लेकर जौधपुर और नागौर रवाना हो गई। पूछताछ के दौरान रमजान व शोएब ने अहम खुलासे किए हैं। माना जा रहा है कि सेना व बीएसएफ के जो अधिकारी दोनों को गुप्त व अहम दस्तावेज मुहैया करा रहे थे, पुलिस उनसे पूछताछ कर सकती है।
फिलहाल दोनों ने बीएसएफ के एक अधिकारी के नाम का खुलासा किया है। इन लोगों ने बताया कि हनीट्रैप में फंसाकर उससे अहम जानकारियां जुटाई गई थी। पुलिस उससे पूछताछ कर उस अधिकारी को गिरफ्तार कर सकती है।