फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   cracker traders Do not know about Green crackers

इस दिवाली भी पटाखों की बिक्री पर लटकी तलवार, व्यापारी ग्रीन पटाखे से हैं अनजान

Wed, 31 Oct 2018 04:52 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 31 Oct 2018 04:52 AM IST
विज्ञापन
cracker traders Do not know about Green crackers
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो

दीपावली पर पटाखे की बिक्री पर एक बार फिर तलवार लटक गई है। सुप्रीम कोर्ट के ग्रीन पटाखे की एनसीआर में बिक्री वाले आदेश के बाद दिल्ली के तमाम पटाखा बिक्री केंद्र बंद रहे। व्यापारी अभी भी इस इंतजाम में है कि अदालत का रुख बदले और वे पटाखा बिक्री शुरू करें। हालांकि ग्रीन पटाखों को लेकर व्यापारी अभी भी अनजान है।  

विज्ञापन


व्यापारियों की माने तो उन्होंने आज तक ग्रीन पटाखों का न तो नाम सुना है और न ही देखे हैं, ऐसे में बड़ा सवाल है कि कहां से ग्रीन पटाखे खरीदे जाएं। कुछ व्यापारी तो सांकेतिक विरोध दर्ज कराने के लिए प्याज की चरखी, सब्जी वाले आलू के पटाखे, अनार फल वाले अनार बम, शिमला मिर्च पटाखा स्टॉल पर लगाए हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट का दिवाली पर ग्रीन पटाखे चलाने का आदेश पटाखा मार्केट पर भारी पड़ा है। बाजार में ग्रीन पटाखे नहीं हैं। इसलिए कारोबारी दुकानों पर ताला लगाने को मजबूर हैं। कारोबारियों को यह भी आशंका है कि बीते साल की तरह ही इस साल भी कहीं पटाखे गोदाम में ही नहीं रखनें पड़ें। जामा मस्जिद, सदरबाजार, कुतुब रोड समेत सभी जगह पटाखों की दुकानों पर ताला लटका है। इसमें लाइसेंसी व अस्थाई लाइसेंसी दोनों तरह की दुकानें शामिल हैं।
विज्ञापन


इस दीवाली बजाएं ई-पटाखे  
प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों की जगह ई-पटाखे ले रहे हैं। ईको फ्रेंडली पटाखे रिमोट से चल रहे हैं। इनमें हाई वोल्टेज इलेक्ट्रोस्टेटिक डिस्चार्ज होता है, जिससे लाइट और साउंड इफेक्ट आ जाता है। इसे जलाने पर भी वैसा ही महसूस होता है जैसे पारंपरिक पटाखों को बजाते वक्त होता है। बाजार में इसकी कीमत सौ से पांच सौ रुपये तक है।
विज्ञापन
विज्ञापन


दुकानदारों के पास अभी अस्थाई लाइसेंस नहीं 
दिल्ली में पटाखा विक्रेताओं के पास अभी अस्थाई लाइसेंस भी नहीं है। उन्हें उम्मीद है कि बुधवार को अदालत रुख कुछ नरम होगा और उन्हें पटाखा बिक्री करने के लिए अस्थाई लाइसेंस जारी कर दिए जाएंगे। 

ग्रीन पटाखों से अनजान हैं व्यापारी 
दिल्ली के व्यापारी ग्रीन पटाखों से अनजान हैं। दुकानदारों से लेकर खरीदारों तक किसी को भी इन पटाखों के बारे में जानकारी नहीं है। सदर बाजार पटाखा विक्रेता संघ के अध्यक्ष नरेंद्र गुप्ता का कहना है कि ग्रीन पटाखा बनाने वालों को ही नहीं पता है कि यह होता क्या है। यह पहली बार सुनने में आया है कि इस तरह के भी पटाखे होते हैं। जिनसे प्रदूषण या आवाज नहीं होती। सदर बाजार में पटाखों के प्रमुख विक्रेता हरजीत सिंह छाबड़ा ने कहा कि हमने तो आलू बम बनाया है। भिंडी बम बनाया है, शिमला मिर्च बम, प्याज चकरी बनाया है। दरअसल वे हरी सब्जियों को बम के रूप में प्रदर्शित कर सांकेतिक विरोध कर रहे हैं। व्यापारी हरजीत सिंह का कहना है कि पहली बार ग्रीन पटाखा का नाम सुना है। इस तरह का पटाखा बाजार में आता भी है तो इसमें एक से दो साल लग जाएंगे। फैन्यूफैक्चरर भी व्यापारियों को यही बातें बता रहे है। इसके लिए अलग से लाइसेंस भी लेना होगा। 
 

cracker traders Do not know about Green crackers
firecrackers - फोटो : file photo

करोड़ों का स्टॉक फिर गोदाम में पहुंचा 
दिल्ली के पटाखा विक्रेताओं का कहना है कि पिछले साल पटाखों की बिक्री पर पाबंदी लगने के कारण करोड़ों रुपये के पटाखों को गोदाम में रखना पड़ा। इस साल भी पटाखा बिक्री के लिए कई दुकानदारों ने गोदामों में माल भर लिया था, लेकिन अचानक से ग्रीन पटाखा बिक्री करने का फरमान आ गया। पटाखा व्यापारी हरजीत सिंह का कहना है कि ऐसे में व्यापारियों को समझ में ही नहीं आ रहा है कि ग्रीन पटाखा कहां से लाए। 

क्या है ग्रीन पटाखें
ईको फ्रेंडली दिवाली को बढ़ावा देने के लिए काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च के वैज्ञानिकों ने कम प्रदूषण करने वाले पटाखे बनाने का दावा किया है। ये पटाखे न केवल ईको फ्रेंडली हैं बल्कि पारंपरिक पटाखों से सस्ते भी हैं। पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बताया था कि वैज्ञानिकों ने प्रदूषण रहित पटाखे बना लिए हैं। पारंपरिक पटाखों से इनकी कीमत 15-20 फीसदी कम है। सेफ वॉटर रिलीजर, सेफ मिनिमल एल्यूमिनियम, सेफ थर्माइट क्रैकर सरीखे ये पटाखे हैं। बताया जा रहा है कि इन पटाखों से हानिकारक धूल और धुएं की जगह भाप और हवा निकलेगी। हालांकि तेज आवाज के साथ विस्फोट होगा। पटाखों में यूज होने वाले पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर का इससे प्रयोग कम हो जाएगा। पटाखा बनाने से जुड़े लोगों की आजीविका का भी साधन बनेगा। सामान्य पटाखों के जलाने से भारी मात्रा में नाइट्रोजन और सल्फर गैसें निकलती हैं, लेकिन ग्रीन पटाखे में इनकी मात्रा कम होती है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed