गौ सेवा आयोग खरीदेगा गाय का गोबर, प्रति किलो की दर से होगा भुगतान
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गौ सेवा आयोग ने गाय का गोबर खरीदकर उससे बायोगैस और जैविक खाद बनाने की योजना तैयार की है। गौशालाओं को एक रुपये प्रति किलो की दर से भुगतान भी किया जाएगा। साथ ही पशु पालकों द्वारा बायोगैस प्लांट लगाने पर सब्सिडी दी जाएगी।
यही नहीं अब मशीन के जरिए पशुपालकों से गोबर खरीदकर उपले बनाए जाएंगे और उसका उपयोग भट्टों में किया जाएगा। आयोग की इस योजना से गौशालाएं और पशुपालक दोनों आर्थिक रूप से मजबूत हो सकेंगे।
आयोग ने इस बाबत नगर निगम, पशुपालन विभाग एवं कृषि विभाग समेत अन्य विभागों को पत्र भेजकर योजना की जानकारी दी है। आयोग ने गौ संरक्षण में भी सहयोग देने का विभागों को निर्देश दिया है।
गौशालाओं पर लगेंगे बॉयोगैस प्लांट
नगर निगम, पशुपालन विभाग, कृषि विभाग समेत अन्य विभागों को भेजे गए पत्र में आयोग ने कहा कि सरकार की मंशा है कि गौशालाओं और गायों के गोबर को एक रुपये प्रति किलो की दर से खरीदकर उससे प्लांट के जरिए बायोगैस और जैविक खाद बनाई जाए और उसे सस्ती दरों पर किसानों को उपलब्ध कराया जाए।
इसके लिए छोटे-छोटे प्लांट लगाने पर विचार किया जा रहा है। आयोग की ये भी मंशा है कि पांच गाय खरीदने वालों को 50 फीसदी सब्सिडी और बायोगैस प्लांट लगाने पर 40 फीसदी तक सब्सिडी दी जाएगी।
हरियाणा गौसेवा आयोग के चेयरमैन धानीराम मंगला ने फोन पर अमर उजाला को बताया कि फरीदाबाद, पलवल, गुड़गांव समेत प्रदेश की सभी गौशालाओं पर बॉयोगैस प्लांट लगाए जाएंगे। इसके अलावा सभी गौशालाओं को सौर ऊर्जा भी उपलब्ध कराई जाएगी ताकि बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो सकें। उन्होंने बताया कि कई जिलों में पोर्ट टेबल गैस प्लांट लगाकर जीवा अमृत खाद बनाने की योजना है। खाद किसानों को सस्ते दरों पर उपलब्ध कराई जाएगी।
गैस और खाद का उपयोग करेंगे पशुपालक व किसान
मंगला ने बताया कि छोटा बायोगैस प्लांट लगाने में करीब 22 से 25 हजार रुपये का खर्च आता है। सरकार सब्सिडी देकर उन्हें प्रोत्साहित करेगी। उससे बनने वाली खाद और गैस का उपयोग पशुपालक व किसान कर सकेंगे। गैस का उपयोग भोजन बनाने में किया जाएगा। इससे किसानों और पशुपालकों को एलपीजी गैस लेने की जरूरत नहीं होगी।
आयोग चेयरमैन ने यह भी बताया कि प्रदेश के हर जिले में मशीनों से उपले बनाने की भी योजना है। इसके तहत पशुपालकों से गोबर खरीदकर उसे सुखाकर मशीन के जरिए उपले बनाये जाएंगे और उसका उपयोग भट्टों पर किया जाएगा। इससे पशुपालकों की आमदनी भी बढ़ेगी।
उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली आईआईटी की एक तकनीक का अध्ययन किया जा रहा है जिसमें बायोगैस प्लांट से निकलने वाली मिथेन गैस को बदलकर एलपीजी और सीएनजी गैस तैयार की जाएगी। जिसका उपयोग भोजन बनाने और वाहन चलाने में भी किया जा सकेगा।
गौशालाओं और दुधारू पशुओं की संख्या
-श्री गोपाल गौशाला सूरजकुंड रोड: 200 गाय व नंदी
-गौ रक्षा सदन मवई नहरपार: 500 गाय व नंदी
-गौ मानव रक्षा सदन: 100 गाय व नंदी
-नंदीग्राम गौशाला ऊंचा गांव: 500 गाय व नंदी
-गौशाला मेघपुर: 50 गाय व नंदी
-गौशाला खेड़ी: 50 गाय व नंदी
-पलवल में दुधारू पशुओं की संख्या: 3.70 लाख
-फरीदाबाद में दुधारू पशुओं की संख्या: 1.70 लाख