करीम टुंडा अदालत से बरी, टॉप-20 आतंकियों में था शामिल
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लश्कर-ए-तैयबा के तथाकथित आतंकी अब्दुल करीम टुंडा (74) को पटियाला हाउस कोर्ट ने शनिवार को बरी कर दिया है। दिल्ली पुलिस के टुंडा पर दर्ज कुल चार मामलों में से शनिवार को चौथे व आखिरी मामले में भी बरी कर दिया।
उसे लश्कर का बम एक्सपर्ट बताया गया था। यही नहीं टुंडा के साथ गिरफ्तार तीन और संदिग्धों को भी कोर्ट ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। बताते चलें कि टुंडा भारत की टॉप 20 आतंकवादियों की उस सूची में शामिल था, जिसे भारत ने मुंबई बम धमाकों के बाद पाकिस्तान को सौंपी थी।
तब से भारत पाकिस्तान से टुंडा सहित अन्य आतंकियों का प्रत्यर्पण कराने की मांग जोर शोर से करता रहा था। पटियाला हाउस कोर्ट के सत्र न्यायालय से टुंडा के बरी होने से दिल्ली पुलिस को बड़ा झटका लगा है।
टुंडा वही जिसके इंटरपोल ने जारी किया था रेड कॉर्नर नोटिस
टुंडा वही है जिसके लिए इंटरपोल ने भी रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था। मगर अब दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की ओर से टुंडा पर दायर यह आखिरी मुकदमे में भी उसे बरी कर दिया गया है। कोर्ट ने पाया कि जांच एजेंसी की तरफ से ऐसा कोई सुबूत पेश नहीं किया गया जिससे टुंडा व अन्य तीन को दोषी साबित किया जा सके।
टुंडा फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है। बरी हुए लोगों में उसका ससुर मोहम्मद जकरिया व साथी अलाउद्दीन और बशीरुद्दीन भी शामिल हैं। अलाउद्दीन व बशीरुद्दीन टुंडा से 1994 में मिले थे। जकरिया ने दोनों को टुंडा से मिलवाया था।
आरोप था कि वे लश्कर के लिए काम करने लगे। स्पेशल सेल की ओर से दावा किया गया कि टुंडा बम बनाने का भी विशेषज्ञ है।
बम बनाने के दौरान आतंकी धमाके में उसने अपना हाथ खो दिया था
बम बनाने के दौरान ही एक धमाके में उसने अपना हाथ खो दिया था। आतंकियों को भारत में बम बनाकर देना उसकी जिम्मेदारी थी। वह भारत पाकिस्तान व बांगलादेश सीमा से उन्हें भारत में प्रवेश दिलाता था। स्पेशल सेल ने टुंडा समेत सभी आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 12ए (देश के खिलाफ षड्यंत्र रचना), 121 (देश के खिलाफ जंग छेड़ना), विस्फोटक अधिनियम, फॉर्नर एक्ट व आर्म्स एक्ट में मुकदमा दर्ज किया था।
स्पेशल सेल ने दावा किया था कि टुंडा 1997 में आतंकियों को भारत में लाने का काम करता था। टुंडा का नाम कई बार आतंकी घटनाओं के बाद आता रहा। वह भारतीय जांच एजेंसियों से बचने के लिए लंबे समय तक पाकिस्तान में छिपा रहा।
हालांकि 16 अगस्त 2013 को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने टुंडा को भारत नेपाल सीमा से गिरफ्तार कर लिया। जकरिया, अलाउद्दीन और बशीरुद्दीन पश्चिम बंगाल की विभिन्न जेलों में बंद हैं। इस मामले में सुनवाई के लिए तीनों के खिलाफ जारी पेशी वारंट पर उन्हें कोर्ट लाया गया था।