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तस्वीरें: न रोजगार न घर, रोज अंधेरे में पलायन कर रहे सैकड़ों लोग, बच्चों को गोद में लेकर पैदल जाती दिखीं महिलाएं

Thu, 26 Mar 2020 01:12 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Thu, 26 Mar 2020 01:12 PM IST
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Coronavirus Lockdown in india no employment no house people migrating to their homelands from metro cities photos
corona virus lockdown - फोटो : अमर उजाला

पूरे देश में लॉकडाउन के बाद कामकाजी गरीब तबके ने दिल्ली छोड़ना शुरू कर दिया है। सिर पर गठरी रखकर बच्चों को गोद में लेकर महिलाएं और पुरुष रात के अंधेरे में पैदल ही दिल्ली बॉर्डर पार करने का प्रयास कर रहे हैं। किसी तरह नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद की सीमा में प्रवेश करते ही इनमें खुशी दिखती है। इनमें से कुछ रुककर किसी सवारी का इंतजार करते हैं, जबकि बाकी पैदल ही आगे बढ़ जाते हैं।

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corona virus lockdown - फोटो : अमर उजाला

कोरोना वायरस के खौफ के बीच रात के अंधेरे में हाईवे पर इन दिनों गाड़ियों की भीड़ के बजाय सैैकड़ों पैदल लोगों को भीड़ दिख रही है। पूछने पर इनका कहना है कि जब उनके पास कोई कामकाज ही नहीं है तो दिल्ली में रुकने का कोई मतलब नहीं बनता। बॉर्डर पर पुलिस की चेकिंग से बचने के लिए ये लोग रेलवे पटरियों का भी सहारा ले रहे हैं। उनका कहना है कि किसी तरह वह अपने गांव पहुंच जाएं, जिसके बाद दोबारा नए जीवन की शुरुआत का प्रयास करेंगे।

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corona virus lockdown - फोटो : अमर उजाला

एनएच-9 पर मंगलवार रात करीब 9 बजे सड़क के दोनों तरफ लोगों की भीड़ दिखी। ये लोग घरों तक पहुंचने के लिए किसी सवारी के इंतजार में थे। कभी कोई ट्रक उनके पास आकर रुकता तो सैैकड़ों की भीड़ एक साथ उस ओर भागती। जिसे उस ट्रक में जानवरों की तरह लदने का मौका मिल गया, वह खुद को खुशकिस्मत महसूस करता है। जिन्हें ट्रक में जगह नहीं मिली, उन्होंने पैदल ही हापुड़ की ओर कदम बढ़ा दिए। कई किलोमीटर तक हाइवे पर केवल लोगों की ही भीड़ देखने को मिल रही है। इन लोगों का कहना है कि रात के वक्त पुलिस का पहरा कम होता है, इसलिए वे पूरे परिवार के साथ घर के लिए निकले हैं। इनमें से ज्यादातर लोग पूर्वांचल से सटे जिलों के हैं। इनमें से काफी लोगों को यह भी नहीं पता कि उन्हें अभी कितने किलोमीटर लंबा चलना है। उनके साथ पूरे जीवन की भी पूंजी है, जिसे वे गठरी में बांधे हुए हैं।

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corona virus lockdown - फोटो : अमर उजाला

दोपहिया पर सैकड़ों किमी सफर का जोखिम
कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो घर जाने के लिए दोपहिया वाहनों का सहारा ले रहे हैं। एक ही बाइक पर सवार तीन से चार तक लोग जान जोखिम में डालकर गोरखपुर, बलिया और बनारस सहित अन्य जिलों तक पहुंचने के प्रयास में हैं। ये जिले सैकड़ों किमी दूर हैं, इसके बावजूद उनका लक्ष्य रहता है कि सूरज निकलने से पहले वे अपने घर के दरवाजे तक किसी तरह पहुंच जाएं। लोगों का कहना है कि वे मुसीबत की घड़ी में सरकार का पूरा साथ दे रहे हैैं, लेकिन सरकार को चाहिए कि उन्हें घर तक पहुंचाने का उचित इंतजाम कर दे।

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corona virus lockdown - फोटो : एएनआई

कारवाले वसूल रहे मनमाना किराया
पैदल ही घर के लिए निकले राहगीरों को बिठाने के लिए कुछ कार चालक मनमाना किराया वसूूल रहे हैं। कई बार तो ये उनसे मोटी रकम लेकर घरों तक पहुंचाने का भी सौदा कर रहे हैं। ऐसा ही हाल फरीदाबाद के मथुुरा हाईवे का भी है। यहां पुलिस से बचने के लिए लोग कालिंदी कुंज के नहर वाले रास्ते से हरियाणा की ओर जा रहे हैं।

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corona virus lockdown - फोटो : एएनआई

कोरोना का मजदूरों पर असर, न रोजगार न घर
कोरोना वायरस जहां एक ओर लोगों को बीमार कर रहा है तो वहीं इसके कारण असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों मजदूर अचानक बेरोजगार हो गए हैं। देश में ऐसे मजदूरों की संख्या करीब 42 करोड़ हैं जो निर्माण, पेंटर, लकड़ी व लोहे या खेतों में मजूदरी करते या फिर कारखानों में दैनिक मजदूरी करते हैं। राजधानी दिल्ली में ऐसे असंख्य मजदूर हैं जिनके पास काम नहीं है और वह अपने प्रदेशों को जाने में भी असमर्थ हैं। ऐसे में उनके सामने रोजी व रोटी का संकट खड़ा हो गया है। आने वाले दिनों में इन मजदूरों के लिए यह संकट और भी गहराएगा। 

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corona virus lockdown - फोटो : एएनआई

प्रवासी मजदूरों पर भारी संकट 
बिहार के बेगूसराय से पांच माह पहले दिल्ली आए भूपेश कुमार (22) ने बताया कि वह स्नातक की पढ़ाई कर रहा था लेकिन घर की खराब माली हालत के कारण वह काम करने दिल्ली आया और यहां राज मिस्त्री का काम सीख रहा था। कोरोना के कारण काम पिछले सप्ताह ही बंद हो गया था और अब न काम मिल रहा है और न वापस जा पा रहे हैं। ऐसी ही कहानी रंगाई पुताई का ठेका लेने वाले अंजनी मिश्रा की है। उसने अपने साथ काम करने वाले पांच मजदूरों को घर जाने के लिए कह दिया है। उसने बताया कि वह बिहार के रक्सौल का रहने वाला है और वापस जाना चाहता है लेकिन बस-रेल बंद होने के कारण फंसा हुआ है। बॉर्डर सील होने के कारण टैक्सी चालक भी उसे ले जाने के लिए तैयार नहीं हैं। 

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दिल्ली का आईटीओ, विकास मार्ग - फोटो : जी पॉल

कुछ ऐसी बानगी पूर्वी मिदनापुर, पश्चिम बंगाल निवासी निर्माण मजदूर मनोज बरिक ने बताई कि उसे मजदूरी कर 300 रुपये मिलते थे लेकिन किसी तरह वह पांच लोगों के परिवार का भरण पोषण कर रहा था। पिछले सप्ताह से काम पूरी तरह बंद है और वापस जाने के लिए कहा गया है। अब कोई रेल या बस नहीं चल रही है जिससे वापस चले जाएं। ठेकेदार ने मजदूरी देना बंद कर दिया है, इसलिए गांव जाना चाहते हैं।
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