कोरोना का कहर: बढ़ने लगी मोलनुपिराविर की मांग, डॉक्टरों ने चेताया- ऐसा किया तो फायदे कम नुकसान ज्यादा होंगे
डॉक्टरों ने लोगों को चेताया है, अगर इस दवा का इस्तेमाल लोग अपने मन से करेंगे तो इसके फायदे कम नुकसान ज्यादा होंगे।
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कोरोना वायरस को लेकर दिल्ली के दवा बाजार में एक बार फिर पहले जैसी स्थितियां देखने को मिल रही हैं। यहां दवाओं की मांग में तेजी आई है। साथ ही मोलनुपिराविर को राजधानी के लगभग सभी जिलों से ऑर्डर आ रहे हैं। इस दवा को करीब 13 कंपनियां बना रही हैं। हाल ही में ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने दवा को कोविड उपचार के लिए आपातकालीन इस्तेमाल की अनुमति भी दी थी। लेकिन डॉक्टरों ने लोगों को चेताया है कि अगर इस दवा का इस्तेमाल अपने मन से करेंगे तो इसके फायदे कम नुकसान ज्यादा होंगे।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव का यहां तक कहना है कि यह दवा काफी गंभीर परिणाम दे सकती है। इस दवा को तभी लें जब डॉक्टर की निगरानी में उपचार चल रहा हो अन्यथा इसके जोखिम बहुत अधिक हैं।
इससे शरीर पर कई गंभीर असर पड़ेंगे
दिल्ली एम्स के वरिष्ठ डॉ. नीरज निश्चल ने भी लोगों को सचेत किया है कि अगर इस दवा का इस्तेमाल बगैर चिकित्सीय निगरानी में हुआ तो इससे शरीर पर कई गंभीर असर पड़ेंगे। यह दवा पुरुषों के रीप्रोडक्टिव सेल, बोन और कार्टिलेज और बोनमैरो को भी प्रभावित कर सकता है। इससे कैंसर तक लोगों में हो सकता है।
पिछले साल जब दिल्ली सहित पूरे देश में कोरोना महामारी की लहर आई तो उस दौरान सोशल मीडिया पर डॉक्टरों के प्रिस्क्रिप्शन वायरल होने लगे और लोगों ने धड़ल्ले से स्टेरॉयड युक्त दवाओं का सेवन शुरू कर दिया। इन दवाओं के दुष्प्रभावों के बारे में लोगों को जानकारी नहीं थी। जिसका परिणाम यह रहा कि देश में ब्लैक फंगस के मामले सामने आने लगे। करीब 10 हजार से भी ज्यादा मरीजों की मौत हुई। इनके अलावा ब्लैक फंगस की वजह से कई लोगों की आंख की रोशनी तक चली गई।
डॉक्टरों का कहना है कि अभी इस दवा को कोविड प्रोटोकॉल में शामिल नहीं किया है। यह दवा किसी खास या अनुभवी चिकित्सक की निगरानी या फिर अस्पताल में भर्ती होने के बाद ही ली जा सकती है। उधर दिल्ली के दवा बाजार से मिली जानकारी के अनुसार पिछले दो सप्ताह में मोलनुपिराविर दवा की काफी बिक्री हुई है। दवा मार्केट के अध्यक्ष सुभाष वर्मा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि अभी उनके पास इसका काफी भंडारण है। करीब 13 कंपनियां इसका उत्पादन कर रही हैं लेकिन दवा को लेकर अभी तक उनके पास कोई सरकारी निर्देश नहीं है।