जबरन टॉयलेट में क्लास कर रहे हैं छात्र-छात्राएं
सरकार के लंबे चौड़े वायदों के बावजबूद आज भी देश में शिक्षा प्राप्त करने के लिए अच्छे इंतजाम नहीं। एक सरकारी कॉलेज में एमए के छात्रों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए कॉलेज के टॉयलेट का सहारा लेना पड़ रहा है।
दरअसल गुड़गांव के न्यू रेलवे रोड स्थित द्रोणाचार्य सरकारी कॉलेज में छात्र पिछले दो साल से कॉलेज के टॉयलेट में क्लास करने को मजबूर है। एमए की समाज शास्त्र के छात्रों का यह हाल है।
प्रिसिपंल आर के यादव ने बताया कि सरकारी मदद न मिलने से हम टॉयलेट में क्लास चलाने को मजबूर हैं। यादव का कहना है कि कॉलेज में अभी 25 क्लास रूम की जरूरत है।
हालांकि पिछले साल 12 क्लास बनाने की अनुमति मिली गई थी पर राज्य सरकार ने आज तक इसके लिए पैसा फंड मुहैया नहीं कराया है।
असहनीय बदबू से परेशान रहते हैं छात्र
यादव ने आगे कहा इसलिए हमें कॉलेज के एक टॉयलेट को एमए की क्लास बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इस क्लास में लगभग 40 बच्चे रोजाना पढ़ते हैं।
एक छात्र का कहना है कि वह पिछले एक साल से टॉयलेट में अपनी एमए की क्लास कर रहा है। कॉलेज में क्लास उपलब्ध न होने के कारण एमए समाजशास्त्र के 40 विद्यार्थी टॉयलेट में पढ़ रहे हैं।
उसने यह भी बताया कि क्लास में कुल 60 विद्यार्थी हैं जिसमें से 35 विद्यार्थी रोजाना टायलेट में क्लास करते है। छात्रों का मानना है कि ये काफी अपमानजनक है पर बाहर धूप में बैठने से तो अच्छी ही है यह क्लास।
एमए के ही एक अन्य छात्र ने बताया कि हम लोगों ने कॉलेज प्रसाशन को पिछले साल एक क्लास रूम के लिए कह रहे हैं लेकिन दो साल बाद भी कुछ नहीं बदला। निराश विद्यार्थी अब भी नए क्लास रूम बनाने का इंतजार कर रहे हैं। क्लास में रोजाना सफाई होने के बावजूद असहनीय बदबू रहती है, जिससे छात्र को बैठने में काफी परेशानी होती है।
प्रो. भूप सिंह ने बताया कि इन सब के लिए मैं नौकरशाही को जिम्मेदार मानता हूं। कालेज में मास्टर डिग्री खुले हुए चार साल हो गया है लेकिन अभी तक उनके लिए क्लास रूम की व्यवस्था नहीं की गयी हैं।
साभारः टाइम्स ऑफ इंडिया