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तालाब में गिर रहा कोकाकोला फैक्ट्री का कचरा
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Fri, 27 Nov 2015 12:53 AM IST
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धौलाना स्थित कोका कोला कंपनी के प्लांट से निकल रहा खतरनाक कचरा पास में स्थित तालाब को प्रदूषित कर रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की जांच में इसका खुलासा हुआ है।
रिपोर्ट में बताया गया कि कंपनी के चार में से तीन ट्रीटमेंट प्लांट काम नहीं कर रहे हैं। एनजीटी ने सीपीसीबी को मामले में जांच के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई सात दिसंबर को होनी है।
बीते जुलाई माह में अधिवक्ता विकास गौड़ ने हापुड़ में भूजल के प्रदूषित किए जाने के मामले में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) से अपील की थी।
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यूपीपीसीबी ने जांच के बाद एनजीटी को बताया था कि तालाब में शोधित जल ही मिला है। यहीं नहीं यूपीएसआईडीसी ने तो जांच की मांग करने वाले पर भारी जुर्माना लगाने की सिफारिश की थी।
इसके बाद एनजीटी ने सितंबर माह में मामले को सीपीसीबी के हवाले कर दिया। सीपीसीबी द्वारा एनजीटी को सौंपी जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि हापुड़ की हिंदुस्तान कोका कोला बेवरेजेस प्राइवेट लिमिटेड नामक प्लांट से रोजाना 1900 किलोलीटर बिना ट्रीटमेंट का औद्योगिक पानी और 100 किलोलीटर कचरा तालाब में डाला जा रहा है।
75मीटर × 75 मीटर के तालाब में अपशिष्ट तैरता भी मिला है। तालाब में प्रदूषण का स्तर 3500 गुना अधिक मिला है। इतना ही नहीं रिपोर्ट में कहा गया है कि प्लांट बिना अनुमति के ही एक साल से संचालित है।
एनजीटी के आदेशों के बाद सीपीसीबी मामले में कार्रवाई कर सकता है। हालांकि प्लांट के अधिकारियों का कहना है कि एनजीटी ने मामले में उन्हें पार्टी नहीं बनाया है।
ऐसे में उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। एनजीटी ने सीपीसीबी को मामले में जांच के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई सात दिसंबर को होनी है।
डीएम को भी नहीं जानकारी
हापुड़ के डीएम अजय यादव का कहना है कि उन्हें कोका कोला कंपनी के प्लांट से तालाब में कचरा डालने के मामले की जानकारी नहीं है। अब वे अधिकारियों की टीम भेजकर प्लांट और तालाब की जांच करवाकर कार्रवाई करेंगे।
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रिपोर्ट में बताया गया कि कंपनी के चार में से तीन ट्रीटमेंट प्लांट काम नहीं कर रहे हैं। एनजीटी ने सीपीसीबी को मामले में जांच के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई सात दिसंबर को होनी है।
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बीते जुलाई माह में अधिवक्ता विकास गौड़ ने हापुड़ में भूजल के प्रदूषित किए जाने के मामले में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) से अपील की थी।
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यूपीपीसीबी ने जांच के बाद एनजीटी को बताया था कि तालाब में शोधित जल ही मिला है। यहीं नहीं यूपीएसआईडीसी ने तो जांच की मांग करने वाले पर भारी जुर्माना लगाने की सिफारिश की थी।
इसके बाद एनजीटी ने सितंबर माह में मामले को सीपीसीबी के हवाले कर दिया। सीपीसीबी द्वारा एनजीटी को सौंपी जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि हापुड़ की हिंदुस्तान कोका कोला बेवरेजेस प्राइवेट लिमिटेड नामक प्लांट से रोजाना 1900 किलोलीटर बिना ट्रीटमेंट का औद्योगिक पानी और 100 किलोलीटर कचरा तालाब में डाला जा रहा है।
75मीटर × 75 मीटर के तालाब में अपशिष्ट तैरता भी मिला है। तालाब में प्रदूषण का स्तर 3500 गुना अधिक मिला है। इतना ही नहीं रिपोर्ट में कहा गया है कि प्लांट बिना अनुमति के ही एक साल से संचालित है।
एनजीटी के आदेशों के बाद सीपीसीबी मामले में कार्रवाई कर सकता है। हालांकि प्लांट के अधिकारियों का कहना है कि एनजीटी ने मामले में उन्हें पार्टी नहीं बनाया है।
ऐसे में उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। एनजीटी ने सीपीसीबी को मामले में जांच के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई सात दिसंबर को होनी है।
डीएम को भी नहीं जानकारी
हापुड़ के डीएम अजय यादव का कहना है कि उन्हें कोका कोला कंपनी के प्लांट से तालाब में कचरा डालने के मामले की जानकारी नहीं है। अब वे अधिकारियों की टीम भेजकर प्लांट और तालाब की जांच करवाकर कार्रवाई करेंगे।