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स्वच्छ भारत अभियान को झटका, हजारों घरों में अब भी नहीं है शौचालय
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Mon, 04 Jul 2016 12:56 AM IST
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स्वच्छ भारत अभियान
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स्वच्छ भारत अभियान योजना को पलीता लगाने में फरीदाबाद भी पीछे नहीं है। जानकर हैरानी होगी कि पूरे जिले में अभी भी 5000 से अधिक घरों में शौचालय नहीं बन पाए हैं।
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अब 31 दिसंबर तक सभी घरों में शौचालय बनाने का दावा किया जा रहा है। पिछले दिनों जिला उपायुक्त चंद्रशेखर केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय से जिले को 90 फीसदी खुले में शौचमुक्त बनाने का दावा कर पुरस्कार लेकर आए थे।
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लेकिन प्रशासन को शायद यह नहीं पता कि जिला के कई गांवों में अभी भी 5000 से अधिक घरों में शौचालय नहीं बन पाए हैं। यानी लोग अभी भी बाहर जाने को मजबूर हैं।
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सूत्रों की मानें तो वर्ष 2012 में कराए गए सर्वे के तहत जिले के गांवों में कुल 14591 घरों को शौचालय बनाने के लिए चिन्हित किया गया था। लेकिन पिछले 4 साल में केवल 9452 घरों को ही कवर किया जा सका है। यानी 5139 घरों में अभी भी शौचालय नहीं बन पाए हैं।
शौचालय बनाने के लिए मिलता है 12 हजार का अनुदान
ग्रामीण क्षेत्रों के घरों में शौचालय बनाने के लिए सरकार की ओर से 12000 रुपये की धनराशि दी जाती है। चयनित लोगों के खाते में धनराशि भेजी जाती है। इसमें 60 प्रतिशत केंद्र और 40 प्रतिशत राज्य सरकार की हिस्सेदारी होती है। जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर जाकर शौचालय का भौतिक सत्यापन भी करते हैं।
20 पंचायतों में शत-प्रतिशत लक्ष्य पूरा करने का दावा
जिला प्रशासन का दावा है कि जिले की 20 ग्राम पंचायतों में शौचालय बनाने का काम शत-प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। इनमें पलवली, शाहबाद, टिकावली, भसखौला, नौचली, कोबरा, आलीपुर, लहडौला, घरौड़ा, प्रहलादपुर माजरा, बदरौला, मुजेड़ी, महमूदपुर, बहादुरपुर, गढख़ेड़ा, हीरापुर, हरफला, कबूलपुर बांगर, जाजरू, प्याला आदि हैं।
इन ग्राम पंचायतों में बनने हैं शौचालय
धौज, बीजूपुर, जखोपुर, सोतई, मोहना, छायंसा, मोठूका, मंझावली, नीमका, लधियापुर, पाली, कबूलपुर, फतेहपुर तगा और धौजपुर में करीब 500 शौचालय बनने हैं। उधर, जिला प्रशासन का कहना है कि ऐसा कोई गांव नहीं है जहां शत-प्रतिशत घरों में शौचालय न बने हों। बल्कि एक-एक ग्राम पंचायतों में अधिकांश लोगों के घरों में शौचालय बने हुए हैं।
वर्षवार मिलने वाली अनुदान राशि
वैसे वर्ष 1951 से ही शौचालय बनाने का अभियान शुरू किया गया था लेकिन वर्ष 2007 से तेजी आई है। पहले पात्रों को केवल 1200 रुपये मिलते थे जो अब बढ़कर 12000 रुपये हो गए हैं। यानी सरकार ने लागत के हिसाब से अनुदान राशि बढ़ा दी है।
वर्ष मिलने वाला अनुदान
2007 1200 रुपये
2008 2200 रुपये
2012 4600 रुपये
2014 से अब तक 12000 रुपये