फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Children becoming violent due to pubg game

अमर उजाला खास: पबजी से हिंसक हो रहे बच्चे, हत्या-लूट में बढ़ रहा विश्वास, दिनभर रहता तनाव

Thu, 31 Jan 2019 06:33 AM IST
Gaurav Pandey परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Gaurav Pandey Updated Thu, 31 Jan 2019 06:33 AM IST
विज्ञापन
Children becoming violent due to pubg game
pubg game - फोटो : gearnuke.com

परीक्षा पे चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पबजी (प्लेयर अननोन बैटल ग्राउंड) खेल का जिक्र किया था। दरअसल, इस ऑनलाइन गेम ने एम्स में बाल मरीजों की संख्या बढ़ा दी है। इनमें पबजी के ही हर सप्ताह चार से पांच नए मरीज पहुंच रहे हैं। गेम की लत में डूबे मरीजों की उम्र 8 से 22 साल तक के बीच है।

विज्ञापन


नौकरीपेशा युवा भी डॉक्टरों के पास काउंसलिंग के लिए पहुंच रहे हैं। इन युवाओं को फोन पर पबजी खेलना इतना पसंद है कि ये ऑफिस का पूरा लंच टाइम इसी में खपा देते हैं। डॉक्टरों का मानना है कि ब्लू व्हेल के बाद पबजी दूसरा सबसे ज्यादा लत लगाने वाले गेम के रूप में सामने आया है। जबकि और भी गेम मनोरंजन की जगह अब तनाव का कारण बन रहे हैं।  
विज्ञापन

     
हालांकि, एम्स के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. यतन पाल सिंह बल्हारा की मानें तो ऑनलाइन गेम खेलना कोई अपराध नहीं है। ये एक मनोरंजन का साधन है, लेकिन देश में इसके कुछ और ही मायने सामने आ रहे हैं। इसके पीछे वजह है जागरूकता की कमी।
विज्ञापन
विज्ञापन


कई बार व्यवहारिक तौर पर भी ये फैक्टर काम करता है। उनके क्लिनिक में इस तरह के आए दिन मामले देखने को मिल रहे हैं। इससे लोगों खासतौर पर बच्चों में तनाव, सोशल फोबिया, अकेलापन आदि दुष्प्रभाव देखने को मिल रहे हैं। 12-12 घंटे तक गेम खेलने की वजह से कई बार छात्रों को कॉलेज से भी निकाल दिया जा रहा है। 

ऐसे शुरू हुआ है पबजी

Children becoming violent due to pubg game
फाइल फोटो

मार्च 2017 में माइक्रोसॉफ्ट विंडोज प्लेटफॉर्म पर यह गेम आया था। दिसंबर 2017 में ये गेम पूरी तरह से लोगों के लिए इंटरनेट पर उपलब्ध हुआ। इस समय सभी तरह के मोबाइल फोन, इंटरनेट, विंडो और प्ले स्टेशन 4 पर ये उपलब्ध है।

दुनियाभर में 400 मिलियन बच्चे व युवा इस गेम को हर दिन खेल रहे हैं। जबकि भारत में इनकी संख्या करीब 5 करोड़ अनुमानित है। पबजी गेम में 100 प्लेयर एक आइलैंड पर उतरते हैं और अत्याधुनिक हथियारों के जरिये खुद का बचाव करते हुए दुश्मनों को मार गिराते हैं।

गेम में जो सुरक्षित क्षेत्र होता है, वह धीरे-धीरे छोटा होता जाता है। इससे खिलाड़ी पर उसी क्षेत्र में रहने पर दबाव बढ़ता है। जो अंत में जीवित रहता है वह विजेता बनता है। इस गेम की बढ़ती लत के कारण ही भारत में सबसे पहले गुजरात व कर्नाटक राज्य ने इस पर प्रतिबंध लगाया। हाल ही में जम्मू कश्मीर में भी इस पर रोक लगा दी गई है।

एमसीआई-आईटी मंत्रालय तक से मांगा है जबाव

Children becoming violent due to pubg game
pubg

एम्स सहित दुनियाभर के डॉक्टरों का हवाला देते हुए मुंबई हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका पर आईटी मंत्रालय, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया, महाराष्ट्र सरकार, माइक्रोसॉफ्ट कंपनी और पबजी गेम के यूएस निवासी सीईओ को नोटिस भेजा है।

एडवोकेट मरियम निजाम ने मुंबई के आर्य विद्या मंदिर स्कूल के 11 वर्षीय छात्र अहाद निजाम का हवाला देकर कोर्ट से तत्काल इस गेम पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। बताया जा रहा है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से भी जल्द ही इस तरह के गेम्स को लेकर सख्त कदम उठाने की मांग की जा सकती है।      

हिंसक बन रहे हैं बच्चे

सफदरजंग अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर का कहना है कि ब्लू व्हेल की तरह पबजी गेम भी बच्चों को हिंसक बना रहा है। गेम में गोलियां चलाना, एक-दूसरे की हत्या करना, लूटपाट, आक्रामकता आदि को बढ़ावा दे रहा है। नई दिल्ली स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल (आरएमएल) में इलाज के लिए पहुंचे बच्चों की काउंसलिंग में भी इसकी पुष्टि हो रही है।

ब्लू व्हेल गेम बच्चों को आत्महत्याएं करने के लिए प्रेरित कर रहा था। सफदरजंग और आरएमएल अस्पताल में भी पबजी सहित ऑनलाइन गेम की लत से परेशान हर सप्ताह दो से तीन मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें 15 साल तक के बच्चों की संख्या ज्यादा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed