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पाबंदी के बावजूद खुलेआम हो रही बाल श्रम की अवहेलना
ब्यूरो/ अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Sun, 14 Sep 2014 07:59 PM IST
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मेवात जिले में बाल श्रम के प्रावधानों की पूर्ण रूपेण पालना नहीं हो रही जबकि केन्द्र व हरियाणा सरकार की ओर से बाल श्रम पर पाबंदी लगाने के आदेश दिए हुए हैं। मेवात जिला प्रशासन ऐसे आदेशों की पालना कराने में पूर्णरूपेण नाकामयाब साबित हो रहा है।
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आलम यह है कि जिला मुयालय नूंह स्थित लघु सचिवालय परिसर, अदालत परिसर व सचिवालय के आस-पास बाल मजदूरों को घूमते हुए आम देखा जा सकता है। यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि इन दिनों मेवात का बचपन लघु सचिवालय में स्थित सरकारी कार्यालयों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को चाय पिला रहा है जबकि इनकी उम्र अभी स्कूल जाने की है।
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फिलहाल मेवात के कर्मठ अधिकारी इनके हाथ की चाय बड़े शौक से पी रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर जब सरकारी कार्यालयों में ही बाल श्रम को बढ़ावा दिया जाएगा तो पूरे जिले में इसकी रोकथाम कैसे हो पाएगी।
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उधर नूंह शहर में सैंकड़ों जगहों पर 18 साल से कम बच्चों को चाय की दुकानों ढाबो व अन्य जगहों पर काम करते हुए देखा जा सकता है मगर मेवात जिला प्रशासन इस मामले में चुप्पी साधे हुए है। खास बात यह है कि राजनीति और चुनाव को लेकर मेवात के नेता बड़ी बातें करते हैं मगर आज तक किसी नेता ने मेवात के इन मासूम बच्चों की अच्छी परविश या फिर इनको बेहतर तालीम दिए जाने का मुद्दा कभी नहीं उठाया।
मेवात में जिला बाल कल्याण परिषद की ओर से भी ऐसे बच्चों की पहचान करने के लिए कई सालों से कोई मुहिम नहीं चलाई। उधर श्रम विभाग के अधिकारियों की बात करें तो उनको इन बाल मजदूरों की कतई परवाह नहीं। श्रमिक नेता जहां अपने ईंट-भट्ठा मजदूरों के हितों की बात तो उठाते हैं मगर उन्होंने पिछले छह माह से मेवात जिला प्रशासन के समक्ष यह मांग नहीं उठाई कि जिले में बाल श्रम पर रोक लगाई जाए। सवाल यह है कि क्या इन बच्चों से उनका मासूम बचपन नहीं छीना जा रहा है या फिर इनको बेहतर तालीम हासिल करके अच्छा जीवन जीने का हक नहीं है।
इसके दूसरी तरफ यक्ष प्रशभन यह भी है कि मेवात में विशेषकर जिला मुख्यालय के निजी प्रतिष्ठानों ढाबो व उन जगहों, जहां बाल मजदूरी कराई जा रही है उनको प्रोत्साहन देने वाले दुकान मालिकों एवं संचालकों के खिलाफ बाल श्रम के कानूनों के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई अभी तक क्यों नहीं की गई। इसके दूसरी तरफ मेवात के उपायुक्त कार्यालय की ओर से बाल श्रमिकों की दशा सुधारने की दिशा में कब इनकी संख्या जानने के लिए सर्वेक्षण कराया गया या फिर इनको अच्छी तालीम दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए गए हों।
सरकारी पक्ष
इस मामले जिला बाल संरक्षण अधिकारी आबिद हुसैन ने बताया कि जिले में बाल श्रम की रोकथाम के लिए श्रम विभाग जरूरी कदम उठाता है। साल 2013 में नूंह शहर में उक्त विभाग ने एक मुहिम चलाई थी मगर उस पर एक्शन नहीं हुआ। उस समय काफी बच्चे मिले थे मगर इनकी संख्या में सरकारी रिकॉर्ड देखकर ही बता पाउंगा। एक कमेटी बनी थी, उसमें मैं भी शामिल था। अनाथ व गुमशुदा बच्चों को बेहतर तालीम दिलाने के लिए एनजीओ दीपालय का सेलटर हाउस बना हुआ है। साल 2014 में बाल श्रमिकों की संया जानने के लिए मेवात जिला प्रशासन ने कोई सर्वेक्षण नहीं कराया है।