बेटा नहीं, बेटी के जन्म पर हुआ कुआं पूजन, कराया भोज
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लक्ष्मी के घर पर आने पर इस परिवार ने न केवल बिटिया का बैंड़बाजे के साथ कु आं पूजन किया बल्कि लोगों को मिठाईयां भी वितरित की। इस कुअां पूजन में कई विभागों के अधिकारी सहित गांव की सैकड़ों महिलाएं शामिल हुईं।
सारकस गांव के पवन कुमार की शादी मोनिका के साथ लगभग तीन वर्ष पूर्व हुई। मोनिका को पहली संतान के रूप में सात अप्रैल 2016 को बिटिया ने जन्म लिया। इस परिवार ने पहले से ही तय किया हुआ था कि बिटिया होने पर भी वे बेटा पैदा होने पर होने वाली सभी रस्मों को निभाएंगें।
मोनिका के घर में जन्मी बेटी के कुआं पूजन की तिथि पंड़ितों के अनुसार 15 जून की निकली। पवन एवं मोनिका ने अपनी बिटिया के कुआं पूजन की सारी तैयारियां की। घर पर महिला संगीत का आयोजन करने के साथ-साथ लोगों को लड्डू वितरित किए।
गांव भर की महिलाओं को दिया गया न्यौता
इतना ही नहीं कुआं पूजन के लिए बाकायदा गांव में महिलाओं को न्यौता दिया गया। बैंड़बाजे के साथ महिलाएं मोनिका क ो उसकी बेटी का कुआं पूजन करवाने के लिए ले गए।
गांव में सभी समुदाय के लोग इस बात को कहने लगे कि पवन एवं मोनिका की तरह से यदि प्रत्येक व्यक्ति अपनी बेटी को बेटे के बराबर समझकर सारे काम करे तो वह दिन दूर नहीं जबकि समाज में बेटियों को भी पूरा सम्मान मिलेगा।
बाल व महिला विकास विभाग ने किया उत्साहित
पवन एवं मोनिका ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान से लगातार जागरूकता बढ रही हैं। उन्होंने भी इस योजना से प्रेरित होकर बेटी में कोई फर्क नहीं समझा और उसके जन्म पर बेटे के जन्म की तरह ही आयोजन किए गए।
बाल एवं महिला विकास विभाग के अधिकारियों ने भी उनको काफी उत्साहित किया। उन्होंने कहा कि अपनी पहली संतान जो कि लक्ष्मी के रूप में घर में आई है।
इस अवसर पर बाल एवं महिला विकास विभाग की सुपरवाईजर सुमन शर्मा, तेजिंद्र कौर, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता मधु एवं गांव की काफी महिलाएं एवं पुरुष मौजूद थे।