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अब मिलेगी CBI को पूरी आजादी!
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Sat, 28 Dec 2013 01:45 PM IST
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लोकपाल बिल पर राष्ट्रपति की अंतिम मुहर लगने से पहले ही सरकार ने सीबीआई की स्वायत्तता की दिशा में अहम कदम उठाया है।
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सरकार ने सीबीआई जांच के कानूनी पहलुओं का हिसाब किताब रखने वाली अति महत्वपूर्ण डायरेक्टोरेट ऑफ प्रॉसिक्यूशन (डीओपी) यानी अभियोजन निदेशालय की सीधी कमान एजेंसी के निदेशक को सौंप दी है।
निदेशालय अब तक कानून मंत्रालय के अधीन था। गौरतलब है कि सीबीआई को स्वायत्तता देने के मकसद से लोकपाल बिल में अभियोजन निदेशालय की कमान सीबीआई निदेशक को देने का ही प्रावधान है।
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लेकिन बिल के मुताबिक अभियोजक निदेशक का चुनाव लोकपाल और मुख्य सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) मिलकर करेंगे।
उच्च पदस्थ सरकारी सूत्रों के मुताबिक अब सीबीआई निदेशक सिर्फ डीओपी के सभी कानूनी अधिकारियों की पदोन्नति और तबादले का फैसला ही नहीं करेंगे बल्कि उनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) भी तैयार करेंगे।
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अब तक यह काम कानून मंत्रालय किया करता था। माना जा रहा है कि निदेशक के हाथों यह ताकत देकर सरकार ने सीबीआई को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने के बाबत अहम कदम उठाया है।
साथ ही इस कदम से एजेंसी के कामकाज के मूलभूत चरित्र में बड़ा बदलाव आएगा। गौरतलब है कि डीओपी सीबीआई के मुकदमों के ट्रायल, अपील और पुनर्विचार संबंधी सभी मामले देखता है।
सीबीआई सूत्रों के मुताबिक एजेंसी के इन मामलों में कानून मंत्रालय के जरिए राजनीतिक दखल आम बात थी। ऐसे में सीबीआई को भी अपनी जांच से कहीं ना कहीं समझौता करना पड़ता था।