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जेएनयू हिंसाः नकाबपोशों का पता नहीं, सचिव को छोड़ पूरे छात्रसंघ पर मुकदमा

Wed, 08 Jan 2020 05:33 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 08 Jan 2020 05:33 AM IST
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case on entire student union except secretary in jnu violence
पुलिस से भिड़ी छात्राएं - फोटो : अमर उजाला

जेएनयू कैंपस में 5 जनवरी को नकाबपोश भीड़ की हिंसा के मामले में तो अब तक पुलिस ने कोई मामला दर्ज नहीं किया है, लेकिन विवि का सर्वर बंद करने, तोड़फोड़ मामले में दर्ज दो एफआईआर में पूरे छात्रसंघ को ही आरोपी बना दिया है। 

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कुल 22 लोगों के नाम दर्ज इस एफआईआर में छात्रसंघ अध्यक्ष आईषी घोष, उपाध्यक्ष साकेत मून व महासचिव सतीश चंद्र यादव के भी नाम हैं। दिल्ली पुलिस इन मामलों की जांच भी अपराध शाखा को सौंप सकती है। दक्षिण-पश्चिमी जिला डीसीपी देवेंद्र आर्या ने बताया कि इस पर विचार किया जा रहा है। छात्रों ने हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन भी किया है।
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दक्षिण-पश्चिमी जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जेएनयूएसयू अध्यक्ष आइषी घोष समेत छात्रों ने सीआईएस ऑफिस बंद कर दिया था। पुलिस के सहयोग से 4 जनवरी को सुबह ऑफिस खोला गया था। इसके बाद, छात्र फिर सीआईएस ऑफिस में घुस गए और सर्वर को तोड़ दिया। ऑफिस में भी तोड़फोड़ की। 
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इसकी एफआईआर 5 जनवरी को वसंत कुंज (नॉर्थ) थाने में दर्ज की गई है। जेएनयू के सिक्योरिटी इंचार्ज श्याम सिंह की ओर से दी गई शिकायत में कहा गया है कि छात्रों ने सर्वर ऑफिस में तोड़फोड़ की। 

इससे सर्वर ठप हो गया और छात्रों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया था। छात्रों ने महिला सिक्योरिटी गार्ड से धक्का-मुक्की व मारपीट की। दूसरी एफआईआर जेएनयू रजिस्टार की शिकायत पर दर्ज की गई है। इसमें आठ छात्रों को नामजद किया गया है।

दोनों एफआईआर में कहा गया है कि छात्रों ने हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि छात्र प्रशासनिक ब्लॉक के 100 मीटर दायरे में न तो एकत्र हो सकते हैं और न ही प्रदर्शन कर सकते हैं। 


आरोपी छात्रों ने इस आदेश का उल्लंघन किया है। हालांकि अब तक दोनों ही एफआईआर में न तो किसी को गिरफ्तार किया गया है और न ही किसी को नोटिस भेजा गया है। जिला पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।

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