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बैंकों से 300 करोड़ के फर्जीवाड़े में कार कंपनी का सीएफओ गिरफ्तार, दो निदेशक पहले से शिकंजे में
Sat, 19 Dec 2020 04:38 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 19 Dec 2020 04:38 AM IST
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वैभव शर्मा गुरुग्राम से गिरफ्तार...
- फोटो : amar ujala
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दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने एचडीएफसी और अन्य बैंकों से लोन, ओवरड्राफ्ट और अन्य वित्त संबंधी सुविधाओं का दुरुपयोग कर 300 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा करने के आरोपी एक कार डीलरशिप कंपनी के मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) वैभव शर्मा (31) को गुरुग्राम से गिरफ्तार किया है। पुलिस कंपनी के दो निदेशकों को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। कंपनी ने बैंकों के साथ किए समझौते का उल्लंघन कर रुपये तो ले लिए, लेकिन उन्हें सूचना दिए बिना गाड़ियां बेच दीं।
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ईओडब्ल्यू के संयुक्त आयुक्त ओपी मिश्रा ने बताया कि गुरुग्राम स्थित जेनिका कार इंडिया प्राइवेड लिमिटेड कंपनी में वैभव सीएफओ था। कंपनी ऑडी कार में डील करती थी। वर्ष 2018 में फर्जीवाड़े के शिकार बैंकों में से एक एचडीएफसी के प्रतिनिधि ने कंपनी के निदेशकों रशपाल सिंह टोड, मनधीर सिंह टोड और सीएफओ वैभव शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी कर 102 करोड़ के फर्जीवाड़े की शिकायत की थी। जांच के बाद ईओडब्ल्यू ने गड़बड़ी के प्रमाण मिलने पर रशपाल और मनधीर को गिरफ्तार कर लिया था। उनके खिलाफ आरोप पत्र भी दाखिल किया जा चुका है।
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बैंक के मुताबिक, कंपनी ने वर्ष 2007 में बहादुर शाह जफर मार्ग स्थित शाखा में वित्तीय सहायता के लिए आवेदन किया। तभी से कंपनी बैंक से कैश क्रेडिट और ट्रेड एडवांस जैसी सुविधाएं ले रही थीं। 2013 से कंपनी ने टर्म लोन, कैश क्रेडिट और बैंक गारंटी आदि सुविधाएं लेना भी शुरू कर दिया। बैंक के साथ करार के मुताबिक, कंपनी को उसे मिले धन के खर्च और अपने कार स्टॉक की जानकारी देनी जरूरी थी। इसी में गड़बड़ी की गई। ट्रेड एडवांस की रकम 90 दिन में वापस करनी थी। मार्च 2018 तक कंपनी इसका पालन करती रही, लेकिन बाद में डिफॉल्ट कर दिया। जून 2018 में बैंक ने कंपनी के शोरूम का निरीक्षण किया तो पाया कि वहां 200 की जगह सिर्फ 29 कारें हैं।
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अन्य बैंकों से भी लिया गया था कर्ज
ईओडब्ल्यू को जांच के दौरान पता चला कि शिकायतकर्ता समेत अन्य बैंकों से भी कंपनी ने 130 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद ली है। सीएफओ वैभव शर्मा ने जेएंडके बैंक का 1 जून 2018 से 19 जून 2019 का फर्जी बैंक स्टेटमेंट दाखिला किया। इसके मुताबिक, आरोपी कंपनी ने बैंक से 11.64 करोड़ रुपये का ओवरड्राफ्ट लिया। जांच के दौरान यह राशि 49.51 करोड़ पाई गई।
बैलेंस शीट को घाटे में दिखाया गया
अकेले 102 करोड़ देने वाले एचडीएफसी को लिखे पत्र में वैभव शर्मा ने दावा किया कि कंपनी को पिछले चार साल से घाटा हो रहा है। बैलेंस शीट की जांच में पता चला कि कंपनी लगातार मुनाफा कमा रही है। इसके बाद ईओडब्ल्यू ने कंपनी के दोनों निदेशकों को गिरफ्तार कर लिया था। वैभव फरार था। 17 दिसंबर को पुलिस को सूचना मिली कि वैभव गुरुग्राम में मौजूद है। पुलिस टीम ने छापा मारकर उसे गिरफ्तार कर लिया।
आगे जांच में खुली घोटाले की पूरी रकम
ईओडब्ल्यू के संयुक्त आयुक्त ने बताया कि इसके बाद आगे जांच की गई तो पता चला कि अन्य बैंकों और वित्तीय संस्थानों से इस कंपनी ने वित्तीय सुविधाओं, ट्रेड एडवांस और डेमो कारों पर ऋण के नाम पर 300 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है। इन कारों को बाद में संबंधित संस्थान से एनओसी लिए बिना बेच दिया गया और इससे मिली राशि का गबन कर लिया गया।