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नहीं खर्च किया गया पूरा पैसा, कैग की सिफारिश व्यावहारिक बजट बनाए सरकार

Fri, 01 Apr 2016 10:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 01 Apr 2016 10:17 AM IST
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CAG recommended, Delhi government make realistic budgets
दिल्ली बजट - फोटो : विवेक निगम/अमर उजाला, नई दिल्ली

दिल्ली विधानसभा में पेश नियंत्रक-महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में राज्य सरकार को रियलिस्टिक (यथार्थवादी) बजट बनाने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बजट में 37,118 करोड़ के प्रावधान किए गए थे।

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लेकिन 31,024 करोड़ रुपये ही खर्च हो सके। जो मद है उनमें से 24 मामले ऐसे हैं, जिसमें 50 करोड़ रुपये से अधिक राशि बिना खर्च के बची है। कैग ने कहा कि ये बजट बनाते समय अव्यावहारिक आंकड़ों, गलत वित्तीय प्रबंधन, विभाग की तरफ से प्रोजेक्ट कार्यान्वयन में लापरवाही दर्शाता है।
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वर्ष 2014-15 की पेश रिपोर्ट के अनुसार, न्याय प्रशासन, शहरी विकास, लोक निर्माण विभाग, समाज कल्याण, गृह, चिकित्सा और जनस्वास्थ्य के बजट लगातार खर्च नहीं हुए। वर्ष 2011-12, 2013-14 और 2014-15 में इलेक्ट्रॉनिक ट्रॉली बसें, वैकल्पिक परिवहन प्रणाली शुरू करने की राशि अनुपयोगी रही। इसे विभाग की असफलता का सूचक बताया गया है।

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अनुपूरक मांग विधानसभा से ली गई लेकिन उसे खर्च नहीं किया जा सका

CAG recommended, Delhi government make realistic budgets
दिल्ली बजट - फोटो : विवेक निगम/अमर उजाला, नई दिल्ली

रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र समर्थित योजनाएं, अनुसूचित जाति के लिए जो 265.82 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया, उसमें कोई राशि खर्च नहीं हुई। कैग ने कहा कि बजट प्रावधानों का उद्देश्य इसकी वजह से पूरा नहीं हुआ।

निधि के खर्च नहीं होने के पीछे विभागों ने कैग को बताया है कि भारत सरकार से राशि मिलने में देरी या राशि नहीं मिलना कारण बताया है। वहीं दूसरी तरफ यह भी कहा गया है कि वित्त वर्ष 2012-13 से 2014-15 के बीच 14.72 करोड़ रुपये अनुपूरक मांग विधानसभा से ली गई लेकिन उसे खर्च नहीं किया जा सका।

कैग रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च, 2015 में 20 उपशीर्ष मदों में 54-100 फीसदी तक बजट खर्च किया गया, जबकि सामान्य वित्तीय नियम वित्त वर्ष के समाप्ति महीने में व्यय तेजी से करने की मनाही करता है। हालांकि रिपोर्ट में सरकार के हवाले से कहा गया है कि फरवरी-मार्च में तेजी से बजट खर्च रोकने के आदेश जारी किए गए हैं।

प्रावधानों के गैर-उपयोग से ये योजनाएं हुईं प्रभावित

CAG recommended, Delhi government make realistic budgets

प्रावधानों के गैर-उपयोग से ये योजनाएं हुईं प्रभावित
- जेएनएनयूआरएम में कमजोर वर्ग के लिए आवास निर्माण (130 करोड़)
-पूर्वी दिल्ली एमसीडी को जेएनएनयूआरएम में 30 करोड़ का अनुदान
-इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली को 70 करोड़ का अनुदान
-बसों की खरीद के लिए इक्विटी पूंजी 69.82 करोड़
- केंद्रीय करों की प्रतिपूर्ति के लिए एमआरटीएम को ऋण 348 करोड़ रुपये
- डीजेबी को चंद्रावल जल शोधन संयंत्र के लिए 30 करोड़ का ऋण
- झज्जर-हरियाणा में जेवीसी पावर प्लांट को इक्विटी अंशदान 72.69 करोड़
-संसाधनों की कमी को पूरा करने के लिए 330 करोड़ का ऋण।

ये की गई है सिफारिश
-अधिक खर्च के मामलों को लोक लेखा समिति में नियमितीकरण कराया जाना चाहिए।
-बड़ी बचत और अनुपूरक प्रावधानों से बचने के लिए व्यावहारिक बजट प्रावधान तैयार करना चाहिए।
-वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही या माह में व्यय की अधिकता से बचने के लिए वित्त विभाग को सही प्रक्रिया विकसित करनी चाहिए।

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