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बुलंदशहर हिंसा: ठहर गई तीन गांवों की जिंदगी, कई मोहल्ले पड़े हैं खाली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 09 Dec 2018 12:44 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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चिंगरावठी में बलवे के बाद तीन गांवों की जिंदगी ठहर सी गई है। बलवे के बाद पुलिस के खौफ से गांव छोड़ कर भागे अधिकांश पुरुष पांच दिन बाद भी अपने घर लौट कर नहीं आए हैं। घरों में सिर्फ महिलाएं और बुजुर्ग बचे हैं। ऐसे में घर से लेकर बाहर तक का काम करने में उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। कई घरों में तो पूरा परिवार ही भागा हुआ है। ऐसे में उनके पशुओं को चारा देने वाला भी कोई नहीं है।
बता दें कि तीन दिसंबर को स्याना थाना क्षेत्र के महाब गांव में कथित गोकशी के बाद चिंगरावठी चौकी पर लंबा बवाल हुआ था। स्याना कोतवाल और एक युवक की गोली लगने से मौत हो गई थी। बवाल में 27 नामजद और 60 अज्ञात आरोपियों की तलाश में पुलिस ने उसी दिन रात कई घरों में दबिश दी थी। पुलिस के खौफ से महाब, नयाबांस और चिंगरावठी गांव के अधिकांश युवा गांव छोड़ कर भाग गए।
जो अपने रिश्तेदारों, दोस्तों के घर छुपकर रहने को मजबूर हैं। गांव के पुरुषों के जाने से सारा भार महिलाओं और बुजुर्गों के कंधों पर आ गया है। आलम यह है कि गांवों में घरों के बाहर खड़े पशुओं को समय से चारा न मिलने से वह बिलबिला रहे हैं। पुरुषों के न होने से घरों में कई छोटे बच्चे स्कूल तक नहीं जा पा रहे हैं। रसोई से लेकर खेती तक का काम महिलाओं को करना पड़ रहा है। काम करने में असमर्थ बुजुर्ग भी खेतों में जाकर काम करने को मजबूर हैं। घटना के पांच दिन बाद भी अभी तक गांव के लोगों की जिंदगी पटरी पर नहीं लौट पाई है।
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बता दें कि तीन दिसंबर को स्याना थाना क्षेत्र के महाब गांव में कथित गोकशी के बाद चिंगरावठी चौकी पर लंबा बवाल हुआ था। स्याना कोतवाल और एक युवक की गोली लगने से मौत हो गई थी। बवाल में 27 नामजद और 60 अज्ञात आरोपियों की तलाश में पुलिस ने उसी दिन रात कई घरों में दबिश दी थी। पुलिस के खौफ से महाब, नयाबांस और चिंगरावठी गांव के अधिकांश युवा गांव छोड़ कर भाग गए।
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जो अपने रिश्तेदारों, दोस्तों के घर छुपकर रहने को मजबूर हैं। गांव के पुरुषों के जाने से सारा भार महिलाओं और बुजुर्गों के कंधों पर आ गया है। आलम यह है कि गांवों में घरों के बाहर खड़े पशुओं को समय से चारा न मिलने से वह बिलबिला रहे हैं। पुरुषों के न होने से घरों में कई छोटे बच्चे स्कूल तक नहीं जा पा रहे हैं। रसोई से लेकर खेती तक का काम महिलाओं को करना पड़ रहा है। काम करने में असमर्थ बुजुर्ग भी खेतों में जाकर काम करने को मजबूर हैं। घटना के पांच दिन बाद भी अभी तक गांव के लोगों की जिंदगी पटरी पर नहीं लौट पाई है।
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बोले ग्राम प्रधान
चिंगरावठी बलवे ने गांव में तूफान मचा दिया है। गांव के अधिकांश लोग पलायन कर गए हैं। - अजय कुमार, ग्राम प्रधान चिंगरावठी
लोगों में पुलिस का डर है, लोगों ने पलायन कर दिया है। निर्दोष लोग भी डरे हुए हैं।
-पीतम, ग्राम प्रधान महाब
पुलिस के खौफ से घटना के बाद से लोग गांव में शादियों में भी आने से डर रहे हैं। पुलिस की बर्बरता से लोग सदमे में हैं।
-हितेश देवी, ग्राम प्रधान नयाबांस
लोगों में पुलिस का डर है, लोगों ने पलायन कर दिया है। निर्दोष लोग भी डरे हुए हैं।
-पीतम, ग्राम प्रधान महाब
पुलिस के खौफ से घटना के बाद से लोग गांव में शादियों में भी आने से डर रहे हैं। पुलिस की बर्बरता से लोग सदमे में हैं।
-हितेश देवी, ग्राम प्रधान नयाबांस
फॉरेंसिक टीम पहुंची घटना स्थल, लिए सैंपल
थाना क्षेत्र की चिंगरावठी चौकी क्षेत्र में तीन दिसंबर को हुए बवाल के छठवें दिन फॉरेंसिक टीम ने घटना स्थल पर पहुंचकर जांच पड़ताल की। इस दौरान टीम ने सैंपल एकत्र किए और जांच के लिए अपने साथ ले गई।
स्याना कोतवाली प्रभारी किरनपाल सिंह ने बताया कि शनिवार को हापुड़ से फॉरेंसिक टीम आई थी। टीम ने चिंगरावठी चौकी क्षेत्र के तीन स्थलों पर जांच की और नमूने लिए। टीम ने सबसे पहले उस स्थल का मुआयना किया जहां इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह गाड़ी में मृत पाए गए थे। इसके अलावा टीम ने चिंगरावठी चौकी में भी जांच पड़ताल की। उसके बाद टीम महाब गांव पहुंची, जहां गोवंशो के अवशेष पड़े मिले थे।
स्याना कोतवाली प्रभारी किरनपाल सिंह ने बताया कि शनिवार को हापुड़ से फॉरेंसिक टीम आई थी। टीम ने चिंगरावठी चौकी क्षेत्र के तीन स्थलों पर जांच की और नमूने लिए। टीम ने सबसे पहले उस स्थल का मुआयना किया जहां इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह गाड़ी में मृत पाए गए थे। इसके अलावा टीम ने चिंगरावठी चौकी में भी जांच पड़ताल की। उसके बाद टीम महाब गांव पहुंची, जहां गोवंशो के अवशेष पड़े मिले थे।