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बजट सत्र : दिल्ली विधानसभा की तस्वीर बदली-बदली आएगी नजर, नहीं गूंजेगी 20 विधायकों की आवाज

Thu, 15 Mar 2018 10:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 15 Mar 2018 10:11 AM IST
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budget session: delhi assembly will look different, 20 mlas will not be present in the session
kejriwal - फोटो : pti

दिल्ली विधानसभा की तस्वीर इस बार बदली-बदली दिखेगी। बजट सत्र के दौरान सदन में सत्ता पक्ष की 20 सीटें खाली रहेंगी। सत्र में सत्ता पक्ष के 46 विधायक ही मौजूद रहेंगे।

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इनमें भी तीन-चार विधायक अमूमन पार्टी लाइन से अलग रूख रखने वाले होंगे। दूसरी तरफ बजट पेश होने के साथ इस बार दिल्ली सरकार और नौकरशाही के बीच रहे विवाद व सीलिंग के मसले पर भी चर्चा होगी।
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दरअसल, बीते जनवरी महीने में चुनाव आयोग ने लाभ के पद के मामले में फैसला देते हुये आम आदमी पार्टी (आप) के 20 विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया था।

 

इसमें दिल्ली सरकार के मंत्री कैलाश गहलोत समेत संजीव झा, अलका लांबा, जनरैल सिंह, अनिल कुमार बाजपेयी, नितिन त्यागी जैसे तेज-तर्रार विधायक भी शामिल हैं।

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हालांकि, बतौर मंत्री कैलाश गहलोत सदन में मौजूद रहेंगे, लेकिन बाकी विधायकों की आवाज सदन में नहीं गूंजेगी। पहले के सत्रों में यह विधायक जरूरत होने पर दमदारी से सरकार का पक्ष सदन में रखते थे।


दूसरी तरफ विपक्ष का सुर इस बारे थोड़ा तेज होगा। बीस विधायकों की गैर-मौजूदगी व कपिल मिश्रा, देवेंद्र सहरावत, पंकज पुष्कर, संदीप कुमार जैसे विधायक पार्टी लाइन से अलग जाकर बोलते हैं। विपक्ष के साथ मिलकर यह अपनी आवाज सदन में मजबूती से रखेंगे। इससे सदन में इनकी आवाज भी गूंजेगी।

बजट के अलावा सीलिंग व नौकरशाही विवाद पर चर्चा संभव

budget session: delhi assembly will look different, 20 mlas will not be present in the session

बजट सत्र में बजट के अलावा दूसरे मसलों पर भी चर्चा होगी। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने मंगलवार को ही कहा था कि सीलिंग के मसले पर सदन में चर्चा होगी।

इससे जुड़ा प्रस्ताव पासकर केंद्र को भेजा जायेगा। वहीं, नौकरशाही के साथ चल रहे विवाद भी चर्चा संभव है। इसमें अधिकारियों के कार्य व दायित्व के साथ उनकी तटस्थता की अवधारणा पर बात होगी।

अधिकारियों के मौजूदा रूख पर सदन में प्रस्ताव पेश हो सकता है। इसके अलावा दिल्ली नागरिक सहकारी बैंक के कथित घोटाले की जांच कमेटी के सामने अधिकारियों के पेश न होने के मामले में विशेषाधिकार हनन का मामला भी बन सकता है।

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