बजट: कारों पर टैक्स बढने से ऑटो इंडस्ट्री पर पड़ेगा असर

योगेश शर्मा/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 29 Feb 2016 06:11 PM IST
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Budget: increased tax on cars will have an impact on the auto industry.

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मंदी की मार से जूझ रहे देश के ऑटो मोबाइल सेक्टर को वित्त मंत्री अरुण जेटली के तीसरे आम बजट में राहत नहीं मिली है। सभी तरह की कारों पर टैक्स बढ़ा दिया गया है।
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आने वाले दिनों में इसका नाकारात्मक असर ऑटो मोबाइल इंडस्ट्री पर पडना तय माना जा रहा है। ऐसे में देश का ऑटोमोबाइल मैनुफेक्चरिंग हब कहे जाने वाले फरीदाबाद और गुडग़ांव की 12 हजार से ज्यादा इकाइयों को आने वाले दिनों में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
दरअसल, एक जनवरी से ऑटो मोबाइल कंपनियों ने अपनी कारों के विभिन्न सेगमेंट की दरों में दो से तीन फीसदी तक इजाफा किया था। जिसके चलते कार बाजार में खरीदारों की संख्या में खासी कमी दर्ज की जा रही है।
इसका सीधा असर ऑटो पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों पर दिख रहा है। इसके अलावा फरवरी की शुरुआत में ही सरकार ने स्टील की एमआईपी (मिनिमम इंपोर्ट ड्यूटी) 280 डॉलर प्रति टन से बढ़ाकर 440 रुपये कर दी है।

फरीदाबाद और गुडग़ांव सहित एनसीआर की ऑटो पाट्र्स बनाने वाली कंपनियां स्टील का 60 फीसदी आयात चाइना से करती हैं। इसके अलावा रसिया, कोरिया और जापान से भी स्टील आती है। स्टील पर इंपोर्ट ड्यूटी बढने से लोकल मार्केट में इसकी कीमत और ज्यादा बढ़ गई है।

जानकारों के मुताबिक इस बार के बजट में कारों पर एक से चार फीसदी तक टैक्स बढने से ऑटो पाट्र्स बनाने वाली इंडस्ट्री पर दोहरी मार पडना तय है, क्योंकि कार बाजार से ग्राहकों की बेरुखी सीधे-सीधे ऑटो मोबाइल इंडस्ट्री को प्रभावित करेगी।

नयूमैन कॉरपोरेशन प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक लव मलहोत्रा ने बताया कि कम अंतराल में ही कारों की लगातार बढ़ रही कीमत ऑटो मोबाइल इंडस्ट्री की सेहत के लिहाज से सही नहीं है। इंपोर्ट ड्यूटी बढने और एक्साइज ड््यूटी में कोई छूट न मिलने से इस सेक्टर पर बुरा असर पड़ेगा।

तीन तरह की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री
फरीदाबाद-गुडग़ांव में तीन तरह की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री हैं। एक जो उत्पाद बनाकर सीधे बड़ी देशी व विदेशी कंपनियों को आपूर्ति करती हैं, इन्हें टीयर वन कहा जाता है।

इनकी संख्या तकरीबन 600 है। इसके अलावा करीब 4 हजार टीयर टू और 3 हजार से ज्यादा टीयर थ्री श्रेणी की कंपनियां हैं जो छोटे वेंडरों से उत्पाद तैयार कराती हैं।

कितना बढ़ा टैक्स
छोटी गाडिय़ों पर     1 फीसदी
पेट्रोल-सीएनजी       1 प्रतिशत उपकर
डीजल वाहन         2.5 फीसदी
एसयूवी             4 फीसदी
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