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ब्रेक्जिट इम्पैक्ट : आईटी कंपनियों को फायदा, गारमेंट इंडस्ट्री को हो सकता है नुकसान

Sat, 25 Jun 2016 02:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा/गुड़गांव
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा/गुड़गांव Updated Sat, 25 Jun 2016 02:38 PM IST
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brexit impact on delhi ncr: IT companies have no impact where as garment industry can face problems
ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन से बाहर होने (ब्रेक्जिट) के फैसले का असर पहले दिन ही भारतीय शेयर बाजार पर दिखा। वहीं शहर की गारमेंट एक्सपोर्ट कंपनियों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा। फैसले के पहले दिन ही उन्हें लाखों का नुकसान हो गया।
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बता दें कि जिले में 2000 से ज्यादा एक्सपोर्ट कंपनियां हैं, जो हर दिन विदेशों में अपना करोड़ों का माल सप्लाई करती हैं। इनसे हर वर्ष नोएडा को करीब 2500 करोड़ का बिजनेस मिलता है।
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नोएडा गारमेंट एस्पोर्ट प्रमोशन क्लस्टर के अध्यक्ष ललित ठकराल ने बताया कि इस फैसले से सीधे तौर पर गारमेंट एक्सपोर्ट कंपनियों पर प्रभाव पड़ा है। अभी से इसका असर करेंसी पर दिख रहा है। अगर करेंसी पर ज्यादा प्रभाव पड़ेगा तो पहले से दिए गए ऑर्डर में उद्योगपतियों को नुकसान होगा। इससे एक्सपोर्ट ड्यूटी डबल हो जाएगी। वहीं कपड़ा भी महंगा होगा। अलग होने के बाद क्या नियम होंगे, इसके बारे में भी अभी कुछ साफ नहीं है।
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वहीं आईआईए के आईटी सेल चेयरमैन, कुलमणि गुप्ता ने कहा कि अगर डॉलर व पाउंड का अवमूल्यांकन होता है तो इससे आईटी, बीपीओ सेक्टर पर बहुत प्रभाव पड़ेगा। इसके बाद तय होगा कि किस करेंसी पर काम किया जा सकता है। जहां फायदा होगा, वहीं पर काम किया जाएगा। आने वाले टाइम में इस बारे में पता चलेगा। वैसे बीपीओ सेक्टर में ज्यादा काम अमेरिका से आता है।

 इधर, इंडियन इंडस्ट्री से जुड़े एनके खरबंदा ने बताया कि इसका अभी ज्यादा प्रभाव देखने को नहीं मिलेगा। अभी जो शेयर बाजार में हलचल हुई है, वो धीरे-धीरे ठीक हो जाएगी। अभी ब्रिटेन को स्टेबल होने में 2 से 3 साल का समय लग जाएगा। ये फैसला भारती के लिए सकारात्मक भी हो सकता है। भारत ब्रिटेन में बिजनेस बढ़ सकता है। वहीं आईटी सेक्टर के जानकार मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन से अलग होने से आईटी-बीपीओ को कोई नुकसान नहीं होने वाला है। ब्रिटेन यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। हो सकता है कि आने वाले समय में सकारात्मक प्रभाव पड़े।

निर्यातकों को ऑर्डर कैंसल का खतरा
पहले पाउंड 100 रुपये चल रहा था। ब्रिटेन के अलग होने के फैसले के बाद से ही वह डाउन हो गया है। इससे सीधे-सीधे उद्योगपतियों को नुकसान हो रहा है। हर ब्रांड के अलग-अलग जगह पर होलसेल सेंटर बने हुए हैं। इससे एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ जाएगी। ब्रिटेन के अलग होने के बाद पॉलिसी भी अलग बन सकती है। इसको देखते हुए उद्योगपतियों को ऑर्डर कैंसल होने का डर सता रहा है।

नोएडा से गारमेंट एक्सपोर्ट होने वाले देश
नोएडा से सप्लाई होने वाले कपड़ों के माल में 25 फीसदी ब्रिटेन जाता है।
अमेरिका में 15 फीसदी माल जाता है।
यूरोपीयन यूनियन के देशों में भी कुछ फीसदी माल भेजा जाता है।

ब्रेक्जिट से आईटी हब को नुकसान कम फायदा ज्यादा

brexit impact on delhi ncr: IT companies have no impact where as garment industry can face problems
referendum - फोटो : Reuters

ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन से बाहर होने (ब्रेक्जिट) का निर्णय देश के शेयर बाजार में भूचाल लेकर आया है। हर तरफ ब्रेक्जिट के नफा-नुकसान को लेकर चर्चा हो रही है। मगर साइबर सिटी के आईटी-बीपीओ सेक्टर में इसे लेकर कोई खास हलचल नहीं दिख रही है।

आईटी विशेषज्ञों की राय है कि ब्रिटेन का निर्णय आईटी-बीपीओ कंपनियों के लिए नुकसान नहीं लाभ का सौदा साबित होगा। क्योंकि अमेरिका के बाद ब्रिटेन से इस सेक्टर के लिए सबसे अधिक आउटसोर्सिंग होती है। अब इन कंपनियों को ब्रिटेन से सीधे कारोबार हासिल करने में आसानी होगी।

हालांकि, आईटी-बीपीओ, केपीओ और सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री पर ब्रेक्जिट के तात्कालिक असर से इनकार नहीं किया जा सकता है। मगर यह कोई बड़ी मुश्किल नहीं है। इसे आसानी से पार पाया जा सकता है।

प्राइम कॉल इंटरनेशनल की डायरेक्टर एचआर विनीता का कहना है कि ब्रिटेन अमेरिका के बाद देश के आईटी हब को सबसे अधिक आउटसोर्सिंग कारोबार देता है। यूरोपीय यूनियन होने के कारण धीरे-धीरे इसमें कमी आ रही थी। अभी भी ब्रिटेन में भारतीय आईटी कंपनियों के कार्यालय हैं। इन कारण ब्रिटेन से कारोबार करने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। रही बात यूरोपीय यूनियन के अन्य देशों से कारोबार की तो यह काफी कम है।

आईटी सेक्टर के जानकार आयुष कौशिक का कहना है कि ब्रिटेन यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। इसके यूरोपीय यूनियन से अलग होने से देश की आईटी-बीपीओ कंपनियों को कोई नुकसान नहीं होने वाला है।

बल्कि इसका आने वाले समय में लाभ मिलेगा। संघ के कारण ब्रिटेन को लगने लगा था कि उसके लिए नीतियां ब्रुसेल्स से तय होती हैं। जिससे उसका आर्थिक विकास प्रभावित हो रहा है। आईटीईएस कंपनी में निदेशक सिम्मी सरीन ने कहा कि अभी आईटी सेक्टर पर तात्कालिक प्रभाव दिखेगा मगर इसका कोई खास असर नहीं होगा।

आईटी-बीपीओ अधिकारियों की राय

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बीपीओ
ब्रिटेन का यूरोपीय यूनियन से अलग होना अच्छा संकेत है। वह यूरोप का सबसे प्रमुख गेटवे है। इनका आईटी-बीपीओ कंपनियों पर किसी प्रकार का नकारात्मक असर नहीं पड़ने वाला है। देश के आईटी-बीपीओ हब को आउटसोर्सिंग से मिलने वाले कुल कारोबार में ब्रिटेन की हिस्सेदारी करीब 22 फीसदी थी। यूरोपीय यूनियन के कारण इसमें दिनोंदिन गिरावट आ रही थी। अब इसके फिर से रफ्तार पकड़ने की संभावना प्रबल हो गई है। जो लोग ब्रेक्जिट को लेकर हल्ला मचा रहे हैं, वह तथ्यों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।-प्रदीप यादव (अध्यक्ष, हाईटेक इंडिया)

आईटी-बीपीओ कंपनियों पर ब्रेक्जिट का कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ने जा रहा है। ब्रिटेन में करीब 800 भारतीय कंपनियां काम कर रही हैं। इनके कारोबार पर तात्कालिक असर से इनकार नहीं किया जा सकता मगर नुकसान की कोई संभावना नहीं है।-राकेश कपूर (सीईओ, प्रॉसेस नाइन टेक्नॉलजीज)

अभी ब्रेक्जिट के बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगी। मगर इसका औद्योगिक कारोबार पर कोई अधिक असर पड़ता नहीं दिख रहा है। शेयर मार्केट में जो उतार-चढ़ाव दिख रहा है वह अस्थायी है।-अनिमेष सक्सेना (अध्यक्ष, उद्योग विहार इंडस्ट्रियल एसोसिएशन)

आईटी-बीपीओ कंपनियों पर पड़ेगा यह तात्कालिक प्रभाव
- आईटी-बीपीओ कंपनियों के अधिकतर कार्यालय ब्रिटेन में हैं। यहीं से वे पूरे यूरोप में कारोबार करती हैं। अब स्थिति बदल जाएगी।   
- ब्रेेक्जिट के कारण ब्रिटेन के घरेलू कानूनों में होगा बदलाव, ऐसे में इन कंपनियों को भी बदलनी होगी अपनी रणनीति। 
- ब्रिटेन यूरोपीय यूनियन का प्रमुख देश था, इसके अलग होने से वहां मंदी आने की संभावना बढ़ी। 
- कर्मचारियों के मामले में कंपनियों को ब्रिटेन और यूरोपीय यूनियन देशों में नए सिरे से कसरत करनी पड़ेगी। 
- ब्रिटिश पाउंड के भाव में गिरावट होगी। इससे मौजूदा और आने वाले कांट्रैक्ट पर पड़ेगा असर। 
- कारोबारी निर्णय लेने की प्रक्रिया में होगी देरी। 
- भारतीय आईटी कंपनियों को ब्रिटेन के अलावा भी हेडक्वार्टर स्थापित करना होगा। 
- यूरोपीय यूनियन से और यूके के बीच दक्ष कर्मचारियों का आवागमन होगा प्रभावित। 
- फाइनेंशियल सिस्टम, बैंक और करेंसी मामले में नए सिरे से व्यवस्था के अनुसार कंपनियों को खुद को पड़ेगा ढालना।

निवेशकों को लगा तगड़ा झटका
ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर निकलने के पक्ष में मतदान के नतीजे आने के बाद शेयर मार्केट में ब्लैक फ्राइडे का वातावरण बन गया। गुड़गांव के सैकड़ों निवेशकों को भारी घाटा हुआ। बाजार खुलते ही रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल, इंडस्ट्री, बैंकिंग और बिजली के क्षेत्र में भारी बिकवाली हुई। सेंसेक्स के 1058 अंक टूटने से निवेशकों में दिनभर हाहाकार मचा रहा। शेयर बाजार के जानकार विजय प्रताप शुक्ल का कहना है कि यह ब्रेक्जिट का तात्कालिक असर है। धीरे-धीरे स्थिति सुधर जाएगी। सोने के भाव में भी तेजी देखी गई। इसका कारण शेयर मार्केट में बिकवाली और सोने में निवेश के प्रति बढ़ा विश्वास माना जा रहा है।
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