दलित पक्ष उठा रहा पुलिस की जांच पर सवाल, दूसरा पक्ष संतुष्ट
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सुनपेड़ मामले में पुलिस जांच को लेकर दोनों पक्षों की अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। एक ओर जहां दलित पक्ष पुलिस की कार्यप्रणाली से संतुष्ट नहीं है।
एसआईटी की ओर से बार-बार बयान दर्ज किए जाने से भी ग्रामीण परेशान हो चुके हैं। वहीं, दूसरा पक्ष पुलिस जांच को लेकर संतुष्ट नजर आ रहा है, उनका कहना है कि पुलिस सही दिशा में जांच कर रही है, उन्हें न्याय प्रक्रिया पर पूरा विश्वास है जांच के बाद सभी तथ्य सामने आ जाएंगे।
दलित पक्ष ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाए हैं। एक सप्ताह बाद भी सभी आरोपियों गिरफ्तारी न होने से पीड़ित परिवार नाराज है। परिवार ने अभी भी दूसरे पक्ष से खतरा होने की बात कही है।
मामले में पुलिस ने मीडिया से भी पूरी तरह दूरी बना रखी है। यहां तक कि आरोपियों की गिरफ्तारी व कितने लोगों के बयान हो चुके हैं, इस बात पर पुलिस कुछ बोलने को तैयार नहीं है।
बयान बदलने का इंतजार कर रही पुलिस?
पीड़ित परिवार का आरोप लगाया है कि जब एक बार वे अपना बयान दर्ज करा चुके हैं तो बार-बार बयान दर्ज करने का क्या औचित्य है। पीड़ित जितेंद्र के चाचा हुकुम सिंह का कहना है कि एसआईटी उनके परिवार की महिलाओं, पुरुषों व पड़ोसियों के बयान ले चुकी है।
लिखित बयान के साथ वीडियो रिकॉर्डिंग भी करवाई गई है। ऐसे में बार-बार बयान क्यों लिए जा रहे हैं। हुकुम सिंह ने सवाल उठाया है कि क्या एसआईटी को पीड़ित पक्ष के बयानों पर विश्वास नहीं हैं, एक सप्ताह में कई बार बयान लिए जा चुके हैं। हुकुम सिंह का कहना है कि उनके परिवार ने सच्चे बयान दिए हैं, बार-बार बयान लेने से बयान बदल नहीं जाऐंगे।
जांच से दूसरा पक्ष है संतुष्ट
इस मामले में दूसरा पक्ष पूरी तरह अलग राय रखता है। इस पक्ष के लोगों का कहना है कि एसआईटी अपनी जांच कर रही है। बार-बार बयान देने में उनके लोगों को कोई परेशानी नहीं है।
सवालों पर पुलिस ने साधी चुप्पी
जो सच्चाई है वही बताई गई है। जितनी बार भी पुलिस पूछेगी उनकी ओर से वहीं बयान दोहराया जाएगा जो सच है। पूर्व सरपंच विजेंद्र सिंह का कहना है कि उन्हें पुलिस की जांच प्रक्रिया पर भरोसा है, पुलिस तथ्यों के आधार पर जांच कर रही हैं।
जो सच्चाई होगी वह सामने आ जाएगी, उन्हें न्याय प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है। जल्द ही दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। पूरे मामले में एसआईटी व अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने पूरी तरह चुप्पी साध रखी है। मीडिया से पुलिस वाले दूरी बनाए हुए हैं।
यहां तक कि पीड़ित पक्ष भी कई बार एसआईटी से आरोपियों की गिरफ्तारी के बारे में पूछता है तो उन्हें भी कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिलता है।
उधर, पुलिस कमिश्नर भी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं, सूत्रों के अनुसार बुधवार को कमिश्नर ने एसआईटी की टीम के साथ बैठक की और पूरे मामले की रिपोर्ट ली।