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Delhi NCR News: दृष्टिहीन जोड़े को साथ रहने की मंजूरी, सुरक्षा के आदेश
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- दिल्ली हाई कोर्ट ने बालिग की इच्छा को दी प्राथमिकता, पुलिस को सुरक्षा देने के निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में 100 प्रतिशत दृष्टिहीन अंतर-धार्मिक जोड़े को साथ रहने की अनुमति दे दी है। अदालत ने दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस को आवश्यक निर्देश भी दिए हैं। न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा की पीठ के समक्ष पेश हुई महिला ने स्पष्ट कहा कि वह राम कृपाल के साथ रहना चाहती है और दोनों जल्द विवाह करने का इरादा रखते हैं। अदालत ने महिला के बालिग होने और उसकी स्वतंत्र इच्छा को सर्वोपरि माना।
हालांकि, महिला के पिता ने इस संबंध का विरोध करते हुए कहा कि यदि वह इस निर्णय पर कायम रहती है तो वे उससे संबंध समाप्त कर देंगे। इसके बावजूद अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी बालिग व्यक्ति को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने का पूर्ण अधिकार है। मामले को गंभीर मानते हुए अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि पुलिस की सहायता से जोड़े को सुरक्षित उनकी पसंद के स्थान तक पहुंचाया जाए। साथ ही स्थानीय पुलिसकर्मी को अपना संपर्क नंबर देने के भी निर्देश दिए गए हैं। यह मामला बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका से जुड़ा था, जिसमें महिला को जबरन रोके जाने का आरोप लगाया गया था।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में 100 प्रतिशत दृष्टिहीन अंतर-धार्मिक जोड़े को साथ रहने की अनुमति दे दी है। अदालत ने दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस को आवश्यक निर्देश भी दिए हैं। न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा की पीठ के समक्ष पेश हुई महिला ने स्पष्ट कहा कि वह राम कृपाल के साथ रहना चाहती है और दोनों जल्द विवाह करने का इरादा रखते हैं। अदालत ने महिला के बालिग होने और उसकी स्वतंत्र इच्छा को सर्वोपरि माना।
हालांकि, महिला के पिता ने इस संबंध का विरोध करते हुए कहा कि यदि वह इस निर्णय पर कायम रहती है तो वे उससे संबंध समाप्त कर देंगे। इसके बावजूद अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी बालिग व्यक्ति को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने का पूर्ण अधिकार है। मामले को गंभीर मानते हुए अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि पुलिस की सहायता से जोड़े को सुरक्षित उनकी पसंद के स्थान तक पहुंचाया जाए। साथ ही स्थानीय पुलिसकर्मी को अपना संपर्क नंबर देने के भी निर्देश दिए गए हैं। यह मामला बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका से जुड़ा था, जिसमें महिला को जबरन रोके जाने का आरोप लगाया गया था।
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