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चुनाव से पहले भाजपा को करारा झटका

Thu, 06 Nov 2014 01:46 PM IST
Updated Thu, 06 Nov 2014 01:46 PM IST
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bjp gets a big shock before delhi elections

दक्षिण दिल्ली नगर निगम के आयुक्त मनीष गुप्ता ने वृद्धावस्था पेंशन बढ़ाने के प्रस्ताव को नकार कर सत्तारूढ़ भाजपा को करारा झटका दिया है।

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इसके पीछे उन्होंने तर्क दिया कि भाजपा पार्षदों ने प्रस्ताव तो पास कर दिया, लेकिन पेंशन देने वाले मद में राशि बढ़ाई नहीं गई। इस कारण बुजुर्गों को पेंशन बढ़ाकर नहीं दी जा सकती।
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मतदाताओं को लुभाने के लिए भाजपा पार्षदों ने फरवरी में बजट पास करने के दौरान वृद्धावस्था पेंशन 1000 से बढ़ाकर 1200 रुपये करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दी थी, लेकिन उन्होंने बजट को पास करते समय पेंशन देने वाले मद की राशि नहीं बढ़ाई।
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इसका खुलासा प्रस्ताव को मानने से इनकार करने वाली नगर निगम आयुक्त की रिपोर्ट में हुआ है। यह रिपोर्ट शुक्रवार को स्थायी समिति में प्रस्तुत की जाएगी।

'लोगों को गुमराह कर रही भाजपा'

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अमर उजाला के पास मौजूद आयुक्त की रिपोर्ट के अनुसार पेंशन मद में करीब 119 करोड़ रुपये का प्र्रावधान किया गया है। इस राशि से वृद्धों को प्रतिमाह केवल 1000 रुपये पेंशन ही दी जा सकती है।

200 रुपये पेंशन राशि बढ़ाने के लिए इस मद में 2.20 करोड़ रुपये की अतिरिक्त चाहिए। ऐसे में पेंशन की राशि बढ़ाना संभव नहीं है। दक्षिण नगर निगम करीब 80,000 वृद्धों व अन्य जरूरतमंद लोगों को पेंशन देती है।

स्थायी समिति के अध्यक्ष सुभाष आर्य ने कहा कि अभी मैंने पेंशन बढ़ाने के प्रस्ताव पर आयुक्त की रिपोर्ट नहीं देखी है। शुक्रवार को स्थायी समिति के समक्ष प्रस्ताव पर आयुक्त की रिपोर्ट आने पर उसके भविष्य को लेकर फैसला किया जाएगा। इस संबंध में समिति की बैठक में चर्चा की जाएगी।

नेता विपक्ष फरहाद सूरी ने कहा कि भाजपा पार्षद पिछले कई साल से लोगों को गुमराह कर रहे हैं। पेंशन बढ़ाने के मामले में उन्होंने ढाई साल में दूसरी बार लोगों के साथ धोखा दिया है। 2012 में  निगम चुनाव से पहले बजट पास करने के दौरान उन्होंने पेंशन 1500 रुपये करने का प्रस्ताव पास किया था।

सिख दंगों पर फिर घिरी भाजपा

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आम आदमी पार्टी ने सिख मतदाताओं को लामबंद करने की कोशिश शुरू कर दी है। ‘आप’ ने सिख दंगा पीड़ितों की इंसाफ दिलाने की मांग करते हुए भाजपा पर हमला बोला है।

पार्टी का कहा है कि दंगों की जांच के लिए दिल्ली की आप सरकार के एसआईटी बनाने के फैसले पर भाजपा की चुप्पी संदेह पैदा करती है। आप ने इस मामले पर भाजपा की मंशा पर सवाल उठाए।

पार्टी का कहना है कि आप की सरकार ने 30 जनवरी को सिख दंगा मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी के गठन का फैसला किया था, लेकिन केंद्र की मौजूदा एनडीए सरकार इसकी अधिसूचना जारी नहीं कर सकी है।

क्या बीजेपी और अकाली दल इस मामले में अपनी चुप्पी तोड़कर यह बताएंगे कि वे तीन दशक बाद दंगा पीड़ितों को किस तरह इंसाफ दिलाएंगे।

केंद्र सरकार की चुप्पी पर संदेह

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आप ने कहा कि पूरे मामले में उपराज्यपाल की उदासीनता चौंकाने वाली है। फरवरी के पहले सप्ताह में दिल्ली कैबिनेट ने इसका प्रस्ताव उपराज्यपाल को भेज दिया था, लेकिन इस दिशा में अब तक कोई काम नहीं हुआ है।

‘आप’ का कहना है कि दंगों में कांग्रेसी नेताओं के नाम शामिल होने की वजह से 16 मई तक केंद्र में रही यूपीए सरकार की चुप्पी तो समझ में आती है।

तत्कालीन केंद्र सरकार ने कैबिनेट के फैसले को लंबित रखने की सलाह दी थी, लेकिन खुद को सिख समुदाय की हितैषी बताने वाली एनडीए सरकार की चुप्पी संदेह पैदा करती है।

आप की 5 मांगे

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खास बात यह कि एक नवंबर को खबर आई थी कि एनडीए सरकार दंगा पीड़ितों को पांच लाख रुपये का मुआवजा देगी, लेकिन अभी तक इस बारे में भी सरकार ठोस कदम नहीं उठा सकी है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय इतने गंभीर मुद्दे को हल्के ढंग से क्यों ले रहा है। पार्टी ने कहा कि अब ऐसे किसी भी फैसले को लागू करने में देरी नहीं करनी चाहिए। केंद्र सरकार को चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले एसआईटी बना देनी चाहिए।

आप की मांगें
1 . 1984 के सिख दंगा से संबंधित ऐसी एफआईआर की भी दोबारा जांच हो, जिसे लापता समझकर बंद कर दिया गया है।
2  . सबूत नष्ट करने के सभी आरोपों की छानबीन होनी चाहिए।
3  . एसआईटी को दो साल के भीतर काम पूरा करने का निर्देश दिया जाए।
4  . दंगे से संबंधित जिन मामलों में केस दर्ज नहीं हुए हैं, उनमें ताजा एफआईआर दर्ज की जाए।
5  . जो भी साक्ष्य मौजूद हैं, उन्हें अंतिम रूप देकर अदालतों में आरोप पत्र दायर किए जाएं।

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