अपने 'सरनेम' से परेशान है भाजपा प्रत्याशी!
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भाजपा प्रत्याशी विमला ‘बाथम’ सरनेम के चलते चिंतित हैं। उनका सरनेम लोगों के बीच गफलत का कारण बन रहा है। लोगों में उनकी जाति ‘वैश्य’ को लेकर दुविधा न रहे इसके लिए वे विज्ञापन और प्रचार का सहारा ले रही हैं।
दरअसल, विमला बाथम ‘वैश्य’ जाति से हैं। लेकिन ‘बाथम’ सरनेम के चलते लोगों में उनकी जाति को लेकर भ्रम हो गया है। कुछ लोग उन्हें पिछड़ी जाति का समझ रहे हैं तो कुछ लोग उनके बाहर का होना मान रहे हैं।
लोगों के भ्रम को मिटाने के लिए अब बाकायदा विज्ञापनों में उनके नाम विमला बाथम के पीछे वैश्य शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही लाउड स्पीकरों के माध्यम से भी प्रचार किया जा रहा है।
भाजपा प्रत्याशी ने अमर उजाला से खास बातचीत में सरनेम से जुड़ी महत्वपूर्ण बातों को साझा किया। विमला ने बताया कि शादी से पहले नाम के पीछे ‘गुप्ता’ सरनेम इस्तेमाल करती थीं। लेकिन कानपुर में शादी होने के बाद ‘बाथम’ सरनेम लगाने लगीं।
‘वास्थम’ को अंग्रेजों ने किया ‘बाथम’
कानपुर की तरफ बाथम सरनेम से लोग अच्छी तरह परिचिति हैं। किसी तरह का कोई भ्रम नहीं हैं। लेकिन नोएडा और अन्य क्षेत्र की जनता इससे अच्छी तरह परिचित नहीं हैं। उनका पूरा नाम विमला बाथम वैश्य है। लेकिन पहचान पत्र में त्रुटिवश ‘वैश्य’ शब्द नहीं है।
इस कारण चुनावों में आधिकारिक तौर पर वैश्य शब्द उनके नाम के साथ नहीं है। उन्होंने बताया कि वो जातिगत भेदभाव में यकीन नहीं रखती लेकिन लोगों को कोई भ्रम न हो, इस कारण विज्ञापन और प्रचार में वैश्य शब्द का इस्तेमाल कर रही हैं।
दरअसल, ‘वास्थम’ के ‘बाथम’ होने का अंग्रेजों से नाता है। अंग्रेजों को वास्थम बोलने में दिक्कत होती थी इसके कारण वे बाथम उच्चारण करने लगे। और धीरे-धीरे वास्थम के स्थान पर बाथम हो गया। विमला ने बताया कि उनके ससुराल पक्ष के पूर्वज अंग्रेजों के नजदीक थे। ऐसे में अंग्रेज वास्थम शब्द की जगह बाथम बोलते थे। तब से सरनेम बदलकर बाथम हो गया।