AAP ने फिर बोला हमला, 'जोड़-तोड़ में जुटी है भाजपा'
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दिल्ली में दोबारा सरकार बनने की अटकलों के बीच आम आदमी पार्टी ने एक बार फिर भाजपा पर हमला बोला है। आप के दिग्गज नेता और रणनीतिकार योगेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली में भाजपा चुनाव कराने से भाग रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा जोड़-तोड़ की कोशिशों में लगी है ताकि सरकार बनाई जा सके। भाजपा ने उपचुनावों में अपने घटते जनाधार और जनता के गुस्से को समझ लिया है, इसीलिए अब पार्टी चुनाव में जाने से डर रही है।
'आप' की ओर से लगाए गए इन आरोपों के जवाब में भाजपा ने कहा कि वह चुनाव कराने के लिए तैयार हैं। आम आदमी पार्टी घिसी-पिटी बातें करती है। भाजपा नेता सुधांशु मित्तल ने कहा कि भाजपा ने चुनाव में जाने की बात पहले ही की थी। उन्होंने कहा कि हमारे पास स्पष्ट बहुमत नहीं है, ऐसे में हम सरकार कैसे बना सकते हैं।
बता दें कि, दिल्ली में दोबारा सरकार बनने का मुद्दा तब उछला जब ऐसी जानकरी मिली कि उपराज्यपाल दिल्ली के राजनीति संकट पर अपनी रिपोर्ट गृहमंत्रालय को सौंपने वाले हैं।
भाजपा नहीं चाहती चुनाव?
राजनिवास में दिल्ली के राजनीतिक हालात पर गृह मंत्रालय के लिए रिपोर्ट तैयार करने की खबर से राजनीतिक दलों में हलचल शुरू हो गई है। खबर के बाद भाजपा और आम आदमी पार्टी समेत कांग्रेसी विधायकों की बेचैनी बढ़ गई है। हालांकि गृह मंत्रालय को भेजे जाने वाली रिपोर्ट में क्या होगा, इसकी जानकारी नहीं लग पाई है।
सूत्र बताते हैं कि रिपोर्ट में यह कहा जा सकता है कि दिल्ली में सरकार बनने की संभावनाएं कायम हैं। इसलिए फिलहाल विधानसभा भंग करने की जरूरत नहीं है। हालांकि बृहस्पतिवार को एक कार्यक्रम में उपराज्यपाल नजीब जंग ने मीडिया से बातचीत में यह साफ किया है कि उन्होंने रिपोर्ट नहीं बनाई है और कोई संकेत भी नहीं दिए हैं।
वहीं सूत्र बताते हैं कि भाजपा अभी किसी सूरत में चुनाव नहीं चाहती। ऐसे में दिल्ली का मुख्य सचिव बदलकर भाजपा ने उपराज्यपाल नजीब जंग पर जनता के काम तेजी से निपटाने का दबाव बनाया है।
दिल्ली में दोहराएगा केंद्र का इतिहास?
माना जा रहा है कि जल्द ही कुछ अन्य अधिकारी भी बदले जा सकते हैं। इन तमाम परिदृश्यों को ध्यान में रखकर इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि जिस तरह से महज 28 की संख्या पर आम आदमी पार्टी को सरकार बनाने का निमंत्रण दिया गया था।
उसी तर्ज पर सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते भाजपा को मौका दिया जा सकता है। लेकिन विधानसभा में भाजपा बहुमत कैसे साबित करेगी, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि केंद्र में भी एक बार अल्पमत की सरकार रह चुकी है। हालांकि उसके पास बहुमत साबित करने के लिए सदस्य थे। दिल्ली में हालात ऐसे नहीं हैं।
भाजपा का सीधे तौर पर कांग्रेस के नेता समर्थन नहीं कर सकते तो दल बदल कानून आम आदमी पार्टी विधायकों समर्थन की इजाजत नहीं देता। हालांकि अनुपस्थित रहकर एक बार सरकार बनवाई जा सकती है।
क्या इस फॉर्मूले पर बनेगी सरकार?
अगर एलजी भाजपा को मौका देते हैं तो भाजपा के मुख्यमंत्री शपथ ग्रहण करें। इसके बाद आम आदमी पार्टी के कुछ विधायक क्रास वोटिंग कर या सदन से अनुपस्थित होकर बहुमत साबित करने में मदद करें या कांग्रेस के विधायक नई पार्टी बनाकर भाजपा या शिअद में विलय करके समर्थन दे दें।
एक संभावना यह भी है कि पांच विधायक अनुपस्थित जो जाएं तो बहुमत के लिए सिर्फ 31 की संख्या जरूरी होगी। माना जा रहा है कि भाजपा को रामवीर शौकीन और विनोद कुमार बिन्नी का समर्थन आसानी से मिल सकता है।
दिल्ली विधानसभा के पूर्व सचिव एसके शर्मा ने बताया कि बिना दावा पेश किए उपराज्यपाल किसी भी राजनीतिक दल को सरकार बनाने के लिए नहीं बुला सकते। हां, चर्चा के लिए जरूर बुला सकते हैं। भाजपा के पास बहुमत नहीं है।
अल्पमत की सरकार बना भी ली तो बहुमत कहां से सिद्ध करेंगे। दलबदल कानून के तीसरे संशोधन के बाद किसी भी राज्य में दलबदल करके सरकार नहीं बनी है। जैसे ही विधायक इधर उधर करेंगे उनकी सदस्यता चली जाएगी।
अभी भाजपा के पास 29, आप के 27, कांग्रेस के 8 और निर्दलीय 3 विधायक हैं। सरकार बनाने के लिए किसी भी दल को कम से कम 34 विधायक चाहिए।