दिल्लीवाले फर्जी डॉक्टर से सावधान! इलाज देने के नाम पर ले लेते हैं जान
राजधानी दिल्ली में एक और डॉक्टर के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। सालों से राजधानी के मरीजों को इलाज देने वाले डॉक्टर ने एक की जान तक ले ली। जिसके बाद हुई जांच में उसकी डिग्रियां फर्जी साबित हुई हैं।
दिल्ली मेडिकल काउंसिल (डीएमसी) ने इस डॉक्टर को सजा दिलाने के लिए इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट 1997 के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक को भी भेजा है।
जबकि एसएचएल अस्पताल पर नर्सिंग होम एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा रही है। बताया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस ने आरोपी डॉक्टर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
डिग्रियां फर्जी साबित हुईं।
काउंसिल के सचिव डॉ. गिरीश त्यागी का कहना है कि आरोपी डॉक्टर दिल्ली में करीब 12 साल से मरीजों का उपचार कर रहे थे। लेकिन किसी को उन पर शक नहीं हुआ। मरीज की मौत के बाद जब शिकायत मिली तो जांच में उनकी डिग्रियां फर्जी साबित हुईं। जिसके बाद काउंसिल ने वसंत विहार थाना पुलिस को डीएमसी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश की।
उन्होंने बताया कि राजधानी में इस तरह के मामले लगातार देखने को मिल रहे हैं। इन्हें रोकने और गलत चिकित्सा को रोकने के लिए डीएमसी लगातार कार्यवाहियां कर रही है। ये है पूरा मामला
16 नवंबर 2017 को उत्पल नाम का मरीज दो 2 बजे उल्टी और मल में रक्त आने की वजह से मुनिरका के एसएचएल अस्पताल में भर्ती हुआ था। जहां उसका इलाज डॉ. राम चंद्र यादव की देखरेख में चल रहा था। रात 11 बजे अचानक उत्पल की तबियत बिगडने के कारण उसे सफदरजंग अस्पताल में भेजा।
सभी डिग्रियां फर्जी
जांच के दौरान डॉ. यादव से गोवा मेडिकल कॉलेज की एमबीबीएस, डीसीएच और एफसीसीपी की डिग्री मिली। इसके साथ ही वे इंडियन मेडिकल असोसिएशन और इंडियन अकेडमी ऑफ पिडियॉट्रिक्स की सदस्यता भी थी।
इसी बीच सभी डिग्रियां फर्जी होने की पुष्टि हुई। उसकी डिग्री पर लिखे रजिस्ट्रेशन नंबर की जब पड़ताल की गई तब इस बात का खुलासा हुआ था डिग्री फर्जी हैं।