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बेल्जियम युवती से छेड़छाड़ के बाद कैब चालकों के अपराधिक रिकॉर्ड की होगी जांच

Wed, 11 May 2016 12:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 11 May 2016 12:20 AM IST
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Belgian woman will examine the record of manipulating the cab drivers
आरोपी ड्राइवर - फोटो : अमर उजाला

बेल्जियम की युवती से ओला कैब चालक द्वारा छेड़छाड़ करने के मामले पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यात्रियों की सुरक्षा से किसी भी हालत में समझौता नहीं किया जा सकता। 

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अदालत ने ऐप आधारित ओला, उबर, जुगनू सहित दिल्ली के तमाम टैक्सी चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस के साथ-साथ उनकी आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच के आदेश दिए हैं।न्यायमूर्ति जेआर मिड्ढा ने कैब चालकों द्वारा ऑड ईवन के दौरान अधिक किराया वसूलने के मामले की सुनवाई के दौरान बेल्जियम की युवती से छेड़छाड़ की घटना प्रकाश में आने पर सुनवाई का रुख बदल दिया। 
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अदालत ने कहा कि कोई व्यक्ति विदेश से आता है और यहां पर टैक्सी का इस्तेमाल करता है। इसी दौरान टैक्सी चालक उसके किसी तरह का अपराध करता है तो इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।न्यायमूर्ति ने कहा कि वे टैक्सी का इस्तेमाल करने वाले किसी भी व्यक्ति के सुरक्षा से समझौता नहीं कर सकते।

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कैब चालकों पर हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती

Belgian woman will examine the record of manipulating the cab drivers
छेड़छाड़ करने वाला ड्राइवर बलराज - फोटो : अमर उजाला

अदालत ने ओला, उबर, जुगनू सहित सभी टैक्सी कंपनियों और एसोसिएशन, तमाम टैक्सी संघों से अपने वाहन चालकों की पूरी जानकारी सरकार व पुलिस को मुहैया कराने का निर्देश दिया है। अदालत ने दिल्ली सरकार को एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति कर सभी चालकों के लाइसेंस, कैब-टैक्सियों की बीमा पॉलिसी व चालकों के आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी एकत्रित करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कैब व टैक्सी कंपनियां अदालत के आदेश का पालन नहीं करतीं तो सरकार आवेदन दायर कर नया आदेश ले ताकि इस प्रकार के रवैये पर लगाम लगाई जा सके। अदालत ने कहा कि हमें ऐसे कदम उठाने होंगे ताकि भविष्य में टैक्सी का इस्तेमाल करने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।

अदालत ने पुलिस व सरकार को छह सप्ताह में सत्यापन रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। अदालत ने मामले की सुनवाई 22 जुलाई तय की है। अदालत टैक्सी सेवा मुहैया कराने वाली कंपनी मैजिक सेवा प्राइवेट लिमिटेड व अन्य की याचिका पर सुनवाई कर रही है। याची के अधिवक्ता प्रणव सचदेवा ने तर्क रखा था कि सम-विषम फॉर्मूले के दौरान ओला-उबर ने यात्रियों से सर्ज चार्ज और व्यस्त समय के नाम पर मनमाना किराया वसूला।

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