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सतर्क रहिए... स्वस्थ होने के बाद भी भी सकते हैं कोरोना से संक्रमित

Fri, 17 Jul 2020 05:31 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली  
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली   Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 17 Jul 2020 05:31 AM IST
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Be cautious even after getting healthy you can get infected with corona
कोरोनावायरस - फोटो : pixabay

राजधानी में बेशक 80 फीसदी से ज्यादा लोग कोरोना संक्रमण से ठीक हो रहे हैं, लेकिन इनके भी दुबारा संक्रमित होने की आशंका बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों के शरीर में कोरोना संक्रमण के खिलाफ एंटीबॉडी कम बनी है और जो पहले से किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित हैं, ऐसे लोगों में फिर से संक्रमित होने का खतरा है। इसलिए जरूरी है कि कोरोना संक्रमण से ठीक हुए लोग विशेष सावधानियां बरतें।

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अपोलो अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर यश गुलाटी बताते हैं कि कोरोना से लडने के लिए शरीर एंटीबॉडी बनाता है। लेकिन देखा गया है कि ठीक होने वाले एक तिहाई लोगों में पर्याप्त एंटीबॉडी नहीं बन रही है। ऐसे लोगों में संक्रमण का खतरा दोबारा है। गुलाटी के मुताबिक, देश और दुनिया मे अभी तक कोई ऐसा शोध नहीं हुआ है,  जिससे पता चले कि दोबारा संक्रमण की गुंजाइश नहीं है। इसलिए जरूरी है कि सावधानी बरती जाये। इनमें ह्रदय  ,किडनी और सांस के मरीजों को विशेष ख्याल रखने की जरूरत है।
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सांस के रोगी  रखें विशेष ख्याल:
सांस का रोगी जब कोरोना से ठीक हो जाता है तो यानी कि जब बुखार इत्यादि नहीं रहता है और ऑक्सीजन का स्तर भी ठीक हो जाता है तो उसके बावजूद भी कई बार व्यक्ति के फेफड़े में उतनी ताक़त नहीं रहती जितनी पहले थी । फेफड़े की जो जगह नष्ट हुई थी उसे  ठीक या करने के लिए वहां पर रेशे बनते हैं,जिससे फेफड़े का प्रभावी हिस्सा कम हो जाता है और उसमें फूलने की क्षमता भी कम हो जाती है। इसलिए  सांस के रोगियों को ठीक होने के बाद भी छाती और फेफड़ों का व्यायाम करते रहना अत्यंत आवश्यक है । 
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दिल की बीमारी वाले भी  सुरक्षित नहीं
इसी प्रकार हमारे दिल की धमनियों भी प्रभावित हो सकती  हैं।  दिल की धड़कनों की खांबी या दिल से खून को आगे भेजने की शक्ति कम हो सकती है। ऐसा पुरानी बीमारी में भी देखा गया था। इसलिए ठीक होने के कुछ हफ्तों या महीनों बाद दिल की जाँच कराना और यदि कोई कमी हो तो इसका इलाज कराना जरूरी है।

ठीक  होने के बाद जोड़ों में बना रहता दर्द
कोरोना के दौरान मांसपेशियां काफ़ी प्रभावित होती हैं और कुछ जोड़ एवं मांसपेशियों में सूजन आ सकती है। करोना से प्रत्यक्ष रूप में ठीक होने के बाद लंबे समय तक तक मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द रह सकता है। कमजोरी भी महसूस हो सकती है। इसके लिए दर्द की साधारण दवाई जैसे पैरासिटामोल, कैल्शियम , विटामिन डी और फिजियोथैरेपी व्यायाम करते रहे।


कम एंटीबॉटी वाले लोगों को बरतनी है विशेष एहतियात
एम्स के पूर्व  डॉक्टर प्रवीण सिंघल बताते हैं कि दिल्ली मे अभी तक कोई मामला नही आया है,जिसमें व्यक्ति दोबरा संक्रमित हुआ हो,लेकिन कम एंटीबॉडी वाले लोगों को ज्यादा खयाल रखने की जरूरत है। क्योंकि,  उनके शरीर में पर्याप्त  रूप से रोग प्रतिरोधक क्षमता नहीं होती। एसे मे उनके दोबारा संक्रमित होने की संभावना भी होती है।अमेरिका मे कुछ ऐसे मामले देखे गए हैं। जहां लोग दोबारा संक्रमित हुए हैं।

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