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बैंक ही नहीं मान रहे नोटबंदी के नियम: 24 हजार की लिमिट का आधा पैसा भी नहीं दे रहे

Wed, 23 Nov 2016 12:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 23 Nov 2016 12:11 AM IST
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banks are not following demonetization rules not giving 24 thousand rupee

नोट बंदी पर बनाए गए नियम बैंक प्रबंधनों के लिए अमान्य लग रहे हैं। उन्होंने खुद के नियम ही बना लिए हैं। 24 हजार की लिमिट तय होने के बाद भी वह चेक व रुपए निकालने वाले फार्म से लोगों को महज 10 हजार रुपए ही दे रहे हैं।

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साथ ही दो हजार की बजाए एक हजार रुपए के नोट बदल रहे हैं। प्रबंधनों का कहना है कि हमारे पास इतने नए नोट की नगदी नहीं है। आलम यह है कि बैंकों की शाखाओं में मुख्य ब्रांच व आरबीआई से दो दिनों में नए नोट पहुंच रहे हैं।
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   यह हाल सेक्टर-15 स्थित यूबीआई के अलावा शहर की अन्य ब्रांच का भी है। जहां लोग चेक पर 24 हजार, 20 हजार रुपए निकालने के लिए रकम भर रहे हैं लेकिन उन्हें सिर्फ 10 हजार रुपए दिए जा रहे हैं। वहीं, कुछ बैंक की शाखाएं ग्राहकों को अन्य शाखाओं में जाने की हिदायद भी दे रहे हैं।
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उनका स्पष्ट कहना है कि जिस बैंक की शाखा में उनका खाता है। वहीं पैसा जमा होगा व निकलेगा। इसको लेकर बैंक के बाहर कतार में लगे लोगों में आक्रोश है। इस विषय पर बैंक प्रबंधन ने बात करने से भी मना कर दिया।

हालांकि फैसला आए 15 दिन हो चुके है। ऐसे में बैंकों के बाहर कतार में लगे लोगों की संख्या में कमी आई है। लेकिन बनाए गए नियमों के विपरीत काम होने से उनका गुस्सा फूट रहा।

गॉर्ड बन गए बैंक प्रबंधन

banks are not following demonetization rules not giving 24 thousand rupee

शहर की बैंक 10 बजे खुल रही है। गॉर्ड सुबह नौ बजे ही बैंक आ जाते हैं। कमोवेश कतार में  खड़े लोग सिक्यूरटी गॉर्डों से ही किस लाइन में लगना है पूछ रहे हैं लेकिन सिक्यूरिटी गॉर्ड उन्हें गलत जानकारियां दे रहे हैं। जबकि बैंक के अंदर पैसा जमा, निकालने व नोट बदलने का काम किया जा रहा है।

गॉर्ड खुद ही बैंक प्रबंधन बन रहे हैं। वह लोगों को बता रहे कि सिर्फ वहीं लोग लाइन में लगें या नोट बदलवाएं जिनका खाता शाखा में हो। मुकेश सेक्टर-15 में रहते हैं। उनका खाता सेक्टर-6 स्थित एक बैंक में है। वह सेक्टर-15 की बैंक के बाहर लाइन में खड़े थे, लेकिन गॉर्ड से पूछने के बाद वह वहां से चले गए।

खातों में जमा पैसे हाथ खाली
बैंक प्रबंधन ने बताया कि उनके पास दो दिनों में नए नोट आ रहे हैं। ऐसे में यदि तय लिमिट में नोट दिए गए तो चंद घंटों में ही नोट खत्म हो जाएंगे। लाइन में लगे लोग कुछ न कुछ लेकर जाएं, लिहाजा तय लिमिट से कम पैसे दिए जा रहे हैं। बैंक के बाहर खड़े आयुष ने बताया कि उन्होंने शुक्रवार को पुराने नोट जमा कराए थे। अब वही पैसे निकालने के लिए मुझे तीसरी बार लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है। 

परिचितों को बांटा पैसा
सेक्टर-18 की एक निजी बैंक की लाइन में लगे योगेश ने बताया कि बैंक की तरफ से टोकन दिए गए। मेरा 15वां नंबर था। 14 तक भुगतान होने के बाद बैंक की तरफ से कहा गया कि पांच लाख आए थे। सभी खत्म हो गए। योगेश ने आरोप लगाया कि बैंक प्रबंधन अपने-अपने को पैसे बांट रहा है।

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