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कराटे में महासंघ के अभाव का खामियाजा खिलाड़ियों को भुगतना पड़ रहा : हाईकोर्ट
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प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों की भागीदारी के लिए व्यवस्थित प्रक्रिया को लेकर याचिका के दौरान सुनवाई
कराटे के लिए अब तक नहीं है कोई मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय खेल महासंघ
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायलय ने कहा है कि कराटे के लिए जब तक कोई मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय खेल महासंघ (एनएसएफ) का गठन नहीं हो जाता, तब तक खिलाड़ियों के चयन और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उनकी भागीदारी के लिए पारदर्शी और व्यवस्थित प्रक्रिया सुनिश्चित की जानी चाहिए। न्यायमूर्ति तेजस कारिया और न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने कराटे खिलाड़ी अक्षय महारा की याचिका पर सुनवाई के दौरान खिलाड़ियों के हितों को सर्वोपरि बताया।
कराटे खिलाड़ी अक्षय महारा ने 2026 एशियन गेम्स और 22वीं एशियन सीनियर कराटे चैंपियनशिप के लिए खिलाड़ियों के चयन में निष्पक्ष और पारदर्शी प्रणाली बनाने की मांग की थी। याचिका में कहा गया था कि मान्यता प्राप्त एनएसएफ के अभाव में खिलाड़ियों को उचित अवसर नहीं मिल पा रहे हैं।
पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कराटे में मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय महासंघ का न होना खेल के विकास के लिए नुकसानदायक है और इसका सीधा असर खिलाड़ियों पर पड़ता है। भले ही प्रक्रिया में कुछ कठिनाइयां हों, लेकिन यह कहना सही नहीं है कि कोई प्रयास नहीं किया गया। कोर्ट ने यह भी माना कि खिलाड़ियों को प्रशासनिक अड़चनों का खामियाजा नहीं भुगतना चाहिए।
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हालांकि सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत में बताया कि खेल मंत्रालय ने 23 फरवरी 2026 को भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) को वर्ल्ड कराटे फेडरेशन (डब्ल्यूकेएफ) के साथ समन्वय कर अस्थायी या एड-हॉक समिति बनाने को कहा था। हालांकि, आईओए ने अदालत को बताया कि उसने एड-हॉक समिति के गठन के लिए डब्ल्यूकेएफ से संपर्क किया था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय फेडरेशन ने इस प्रस्ताव का समर्थन न करते हुए कहा किऐसी समिति द्वारा चुने गए खिलाड़ियों को मान्यता नहीं दी जाएगी।
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कराटे के लिए अब तक नहीं है कोई मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय खेल महासंघ
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायलय ने कहा है कि कराटे के लिए जब तक कोई मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय खेल महासंघ (एनएसएफ) का गठन नहीं हो जाता, तब तक खिलाड़ियों के चयन और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उनकी भागीदारी के लिए पारदर्शी और व्यवस्थित प्रक्रिया सुनिश्चित की जानी चाहिए। न्यायमूर्ति तेजस कारिया और न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने कराटे खिलाड़ी अक्षय महारा की याचिका पर सुनवाई के दौरान खिलाड़ियों के हितों को सर्वोपरि बताया।
कराटे खिलाड़ी अक्षय महारा ने 2026 एशियन गेम्स और 22वीं एशियन सीनियर कराटे चैंपियनशिप के लिए खिलाड़ियों के चयन में निष्पक्ष और पारदर्शी प्रणाली बनाने की मांग की थी। याचिका में कहा गया था कि मान्यता प्राप्त एनएसएफ के अभाव में खिलाड़ियों को उचित अवसर नहीं मिल पा रहे हैं।
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पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कराटे में मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय महासंघ का न होना खेल के विकास के लिए नुकसानदायक है और इसका सीधा असर खिलाड़ियों पर पड़ता है। भले ही प्रक्रिया में कुछ कठिनाइयां हों, लेकिन यह कहना सही नहीं है कि कोई प्रयास नहीं किया गया। कोर्ट ने यह भी माना कि खिलाड़ियों को प्रशासनिक अड़चनों का खामियाजा नहीं भुगतना चाहिए।
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हालांकि सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत में बताया कि खेल मंत्रालय ने 23 फरवरी 2026 को भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) को वर्ल्ड कराटे फेडरेशन (डब्ल्यूकेएफ) के साथ समन्वय कर अस्थायी या एड-हॉक समिति बनाने को कहा था। हालांकि, आईओए ने अदालत को बताया कि उसने एड-हॉक समिति के गठन के लिए डब्ल्यूकेएफ से संपर्क किया था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय फेडरेशन ने इस प्रस्ताव का समर्थन न करते हुए कहा किऐसी समिति द्वारा चुने गए खिलाड़ियों को मान्यता नहीं दी जाएगी।