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Jyotish Maha Kumbh: 'मनुष्य का भाग्य कोई नहीं पढ़ सकता, किस्मत में लिखा...'; ज्योतिषाचार्यों ने साझा किए अनुभव

Tue, 05 Aug 2025 06:31 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Tue, 05 Aug 2025 06:31 AM IST
सार

अमर उजाला माय ज्योतिष महाकुंभ में ज्योतिष शास्त्र के विभिन्न पहलुओं पर संवाद हुआ। इस दौरान कई सत्र में विद्वानों ने बताया कि कैसे ग्रहों का हमारे जीवन पर प्रभाव पड़ता है। तीसरे सत्र में ज्योतिष सिर्फ भाग्य का खेल है या यह एक पक्का विज्ञान विषय पर ज्योतिषियों ने अपने अनुभव और तर्क रखे।

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Astrologers shared their experiences in Jyotish Maha Kumbh program of Amar Ujala's initiative My Jyotish
Jyotish Maha Kumbh - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमर उजाला और इससे जुड़े उपक्रम माय ज्योतिष की तरफ से ज्योतिष महाकुंभ आयोजित किया गया। मयूर विहार स्थित होटल क्राउन प्लाजा में हुए इस आयोजन में देश के प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्यों ने हिस्सा लिया। अमर उजाला माय ज्योतिष महाकुंभ में ज्योतिष शास्त्र के विभिन्न पहलुओं पर संवाद हुआ। इस दौरान कई सत्र में विद्वानों ने बताया कि कैसे ग्रहों का हमारे जीवन पर प्रभाव पड़ता है। तीसरे सत्र में ज्योतिष सिर्फ भाग्य का खेल है या यह एक पक्का विज्ञान विषय पर ज्योतिषियों ने अपने अनुभव और तर्क रखे। किसी ने इसे वेदों का नेत्र बताया तो किसी ने भविष्य की कुंजी। कुछ ने ज्योतिष को स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल करने की वकालत की तो कुछ ने एआई के युग में ज्योतिष की सटीकता पर भरोसा जताया।

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ज्योतिषाचार्य शुभेश सरमन ने कहा कि मनुष्य का भाग्य कोई नहीं पढ़ सकता जो किस्मत में लिखा है वह अपने आप सामने आता है। इसमें ज्योतिष अहम भूमिका निभाता है। ज्योतिषी ग्रहों की चाल, गति और उनके प्रभाव को समझकर लाभ-हानि का आकलन कर सकता है। सही ज्योतिषी वही है जो ग्रहों की गणना के आधार पर भविष्य की सटीक तस्वीर पेश करे। ज्योतिषाचार्य रमेश सेनवाल ने ज्योतिष को शुद्ध विज्ञान बताया। उन्होंने कहा कि वैदिक आचार्यों ने सदियों पहले इस विज्ञान की खोज कर ली थी। आज के दौर में ज्योतिष की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा है। ज्योतिषी एक साधक की तरह काम करता है।  

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स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल हो ज्योतिष
मुंबई से आए ज्योतिषाचार्य जेपी शर्मा ने ज्योतिष को स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल करने की जोरदार मांग की। उन्होंने कहा कि ज्योतिषियों को अक्सर 10 मिनट में भविष्य बताने की चुनौती दी जाती है, लेकिन यह इतना आसान नहीं। अंग्रेजों ने भारत की संस्कृति को कमजोर करने की कोशिश की, जिसका असर ज्योतिष पर भी पड़ा। जीव के गर्भ में आते ही ग्रहों का प्रभाव शुरू हो जाता है। ज्योतिष इस प्रभाव को समझने और भविष्य बताने का सबसे बड़ा विज्ञान है। उन्होंने भटकाने वाले लोगों से बचने की सलाह दी और कहा कि ज्योतिष से बड़ा कोई विज्ञान नहीं।

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ज्योतिष हमारे वेदों का नेत्र है
ज्योतिषाचार्य अनिल वत्स ने ज्योतिष को वेदों का नेत्र बताया। ज्योतिष दृश्य और दृष्टा को समझाने की ताकत रखता है। हर इंसान पिछले जन्म के कर्म और वर्तमान को जानना चाहता है। ज्योतिष श्रेयस (सही मार्ग) और प्रेयस (इच्छा) दोनों को समझाता है। हर व्यक्ति किसी खास तिथि और वार पर जन्म लेता है।

बढ़ रही ज्योतिष की ताकत
ज्योतिषाचार्य अरुण बंसल ने ज्योतिष को आधुनिक युग से जोड़ा। उन्होंने कहा कि ज्योतिषियों को पहचान न मिलने की वजह उनका अधूरा ज्ञान है, लेकिन कंप्यूटर और एआई के युग में ज्योतिष की ताकत बढ़ रही है। उनके शोध में ज्योतिष के फार्मूले अलग पाए गए हैं। एक नियम अकेले काम नहीं करता।

विवाह योग और कुंडली में छुपे संकेत बताते हैं शहनाई कब बजेगी
वैदिक ज्योतिषाचार्यों ने विवाह योग, कुंडली दोष और विवाह में विलंब जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि विवाह योग और कुंडली में छुपे संकेत बताते हैं कि शहनाई कब बजेगी। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए वैदिक ज्योतिषाचार्या कविता चैतन्य ने कहा कि विवाह से जुड़े किसी भी सवाल का उत्तर देने के लिए कुंडली की आवश्यकता होती है। प्रश्न का जन्म जब होता है, उसी समय प्रकृति उत्तर भी साथ भेजती है इसलिए सवाल पूछने का समय भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। ज्योतिषाचार्या नीलम शर्मा ने बताया कि केवल गुण मिलान से शादी तय नहीं होती।
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