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अर्पित पैलेस अग्निकांड की भेंट चढ़े सहायक आयुक्त, कार्यभार संभालने छह महीने पहले ही आए थे दिल्ली

Wed, 13 Feb 2019 06:01 AM IST
राजेश सैनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राजेश सैनी Updated Wed, 13 Feb 2019 06:01 AM IST
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Assistant Commissioner came to delhi just Six months ago died in hotel arpit palace fire
suresh kumar

कुछ ही समय पहले दिल्ली के झंडेवालान स्थित इनकम टैक्स कार्यालय में बतौर सहायक आयुक्त के रुप में कार्यभार संभालने वाले सुरेश कुमार भी अर्पित पैलेस होटल की आगजनी की भेंट चढ़े। मंगलवार सुबह आग लगने के बाद सुरेश कुमार काफी घबरा गए थे। बताया जा रहा है कि उन्होंने रसोईये ताराचंद के बाद चौथी मंजिल से नीचे छलांग लगा दी थी।

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इसके चलते उनके सिर पर गंभीर चोटें आईं और एंबुलेंस जब तक उन्हें लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचती सुरेश कुमार दम तोड़ चुके थे। मूलरुप से उत्तर प्रदेश के सहारनपुर निवासी सुरेश कुमार विवाह के बाद अपनी पत्नी के साथ पंचकूला में रहते थे। उनकी पत्नी पंचकूला में अधिकारी हैं।
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लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज पहुंची सुरेश कुमार के परिजनों में से उनकी बहन ने बताया कि अगस्त 2018 में सुरेश कुमार ने दिल्ली में सहायक आयुक्त के रुप में कार्यभार संभाला था। इस दौरान सुरेश कुमार उनके घर ही रहते थे। लेकिन कुछ ही समय बाद पत्नी के ट्रांसर्फर होने के कारण उन्होंने अलग घर लेने का फैसला लिया था।
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बीते माह ही उनकी पत्नी का ट्रांसर्फर निरस्त हो गया था, जिसके चलते उन्होंने कुछ समय होटल में व्यतीत करने का फैसला लिया था। अस्पताल में बहन और मृतक सुरेश कुमार के भांजे भी मौजूद थे, लेकिन किसी ने इससे ज्यादा जानकारी नहीं दी। 

लापता पिता को तलाशता रहा किशोर
दूसरी ओर लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में एक लड़का आंखों में आंसू और अपने पिता को पुकारता हुआ इधर उधर भटक रहा था। अर्पित पैलेस होटल में इसके पिता भी मौजूद थे। लेकिन घटना के बाद मंगलवार देर शाम तक उसे अपने पिता नहीं मिले। वह कभी लेडी हार्डिंग तो कभी आरएमएल अस्पताल के चक्कर लगा रहा था।

कभी पुलिस तो कभी डॉक्टरों से पूछ रहा था, आपने मेरे पिता को देखा क्या? मेरे पिता का नाम लाल चंद है। वो भी अर्पित पैलेस होटल में थे। अपने चाचा और चाची के साथ सुबह से ही 20 वर्षीय हिमांशु एक से दूसरे अस्पताल की ओर भागदौड़ कर रहा था। डॉक्टरों का कहना है कि इस घटना में कुछ शव इतने झुलस गए हैं कि उनकी पहचान करना मुमकिन नहीं हो पा रहा।

हिमांशु को रोता बिलखता देख पुलिस के जवान भी सदमे में आ गए। उन्होंने हिमांशु को मोर्चरी में ले जाकर सभी शवों की पहचान कराई, लेकिन फिर भी इस लाचार बेटे को अपना पिता नहीं मिला। हिमांशु के चाचा ने सुरेश ने बताया कि उनके भाई लालचंद अर्पित पैलेस होटल में रसोईयों के मैनेजर हैं।

वे पिछले 25 सालों से होटल में सेवाएं दे रहे हैं। सुबह जब होटल में आग की बारे में सूचना मिली तो पूरा परिवार सदमे में आ गया। सोमवार रात को वे अपने घर से ड्यूटी के लिए निकले थे। इसके बाद से परिजनों को कोई जानकारी नहीं है।       

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