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शराब घोटाला केस: 'मैडम मेरी बात सुन लीजिए', भरी कोर्ट में क्या-क्या बोले केजरीवाल; जज स्वर्णकांता से तीखी बहस

Mon, 13 Apr 2026 02:30 PM IST
अनुज कुमार गौरव बाजपेई, अमर उजाला, दिल्ली
गौरव बाजपेई, अमर उजाला, दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Mon, 13 Apr 2026 02:30 PM IST
सार

दिल्ली शराब घोटाला मामले में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे। जहां कोर्ट रूम में केजरीवाल ने जज रिक्यूजल पर अपना पक्ष रखा।

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Arvind Kejriwal reached Delhi High Court today update news
अरविंद केजरीवाल दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल शराब नीति मामले में सीबीआई की याचिका की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे। जहां उन्होंने कोर्ट रूम में अपना पक्ष खुद रखा। वहीं सीबीआई की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू भी अदालत में मौजूद रहे। जानकारी के लिए बता दें कि कोर्ट रूम में वकीलों की भीड़ बहुत ज्यादा है।

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मैं न्यायमूर्ति की इज्जत करता हूं: केजरीवाल
केजरीवाल ने कोर्ट को संबोधित करना शुरू कर दिया है। केजरीवाल ने कहा मैं निजी तौर पर न्यायमूर्ति की इज्जत करता हूं और न्यायालय की भी इज्जत करता हूं। इस पर बेंच ने कहा कि सम्मान पारस्परिक है। आप मुद्दे पर रहकर बोले। इसके बाद केजरीवाल ने कहा कि मैं एक आरोपी की तरह यहां खड़ा हूं। हालांकि ट्रायल कोर्ट ने मुझे बरी कर दिया है। इसके बाद बेंच ने कहा कि आप जज हटाने के मामले पर अपना संबोधन रखें।
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दिल्ली हाईकोर्ट में केजरीवाल ने अपना पक्ष रखा
अरविंद केजरीवाल- मैं निजी तौर पर न्यायमूर्ति की इज्जत करता हूं और न्यायालय की भी इज्जत करता हूं।
बेंच: सम्मान पारस्परिक है। आप मुद्दे पर रहकर बोले।
केजरीवाल: मैं एक आरोपी की तरह यहां खड़ा हूं, हालांकि ट्रायल कोर्ट ने मुझे बरी कर दिया है।
बेंच: आप जज हटाने के मामले पर अपना संबोधन रखें।

सुनवाई के दौरान अदालत में नोट किया कि एक वकील केजरीवाल को असिस्ट कर रहे हैं। अदालत ने वकील से कहा कि केजरीवाल खुद कह चुके हैं कि उन्होंने किसी वकील को असाइन नहीं किया है, आप यहां प्रोक्सी नहीं कर सकते है।
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बेंच ने केजरीवाल से कहा- आप जज रिक्यूजल पर अपना पक्ष रखें।
केजरीवाल: मैडम आप मेरी बात सुन लीजिए
बेंच : सुनाइये

केजरीवाल- 9 मार्च को ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर अदालत ने बिना किसी प्रतिवादी की मौजूदगी में आदेश पारित कर दिया। अदालत में बिना प्रतिवादी की मौजूदगी में सीबीआई के पक्ष में आदेश पारित किया और अपनी टिप्पणी में कहा कि प्रथम दृष्टि आदेश में खामी हैं। जबकि इस मामले में 40000 पन्नों से अधिक की चार्जशीट थी। अदालत में बिना उसे पढ़े अपना आदेश जारी कर दिया।

केजरीवाल ने आगे कहा- तो कानून सीधा-सादा है। बात यह नहीं है कि जज असल में पक्षपाती हैं या नहीं, बल्कि बात यह है कि मुकदमा लड़ने वाले को कोई आशंका है या नहीं। मैं आपके सामने 10 ऐसे कारण रखूंगा जिनसे आपको पता चलेगा कि मुझे यह आशंका क्यों है। कारण 1: उचित आशंका किसे कहते हैं?, अपना पक्ष रखते हुए केजरीवाल ने अलग-अलग सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उदाहरण दे दिया। 

केजरीवाल: मैडम आपने पहली तारीख पर कहा कि एडवांस सर्विस की गई थी, दूसरी सुनवाई में आपने कहा कि हम कोर्ट में पेश नहीं होना चाहते, इससे सुनवाई हुई है। आगे कहा कि यह मामला 4 साल से चल रहा है, हम आपके सामने मौजूद हैं, कोर्ट की भाषा बताई है कि वह पक्षपात पूरा है। कारण नंबर 6 में कहा हमने इस केस में क्रिमिनल रिवीजन पिटीशन से निपटने के तरीके का एनालिसिस किया है। जिस स्पीड से यह केस और दूसरा केस चल रहा है, स्पीड से कोई और केस नहीं चल रहा है। ये दोनों केस सबसे बड़े विपक्षी राजनीतिक दलों के हैं।

जस्टिस शर्मा- तो आप पॉलिटिकल बायस भी बोल रहे हैं?
केजरीवाल- एक केस का जिक्र करते हैं, जिसमें वे कहते हैं कि कोर्ट ने तीन महीने का समय दिया था।
केजरीवाल: हमारा जवाब देने का अधिकार बंद कर दिया गया था।
बेंच: अभी कहां कोई राइट क्लोज हुआ है?
केजरीवाल: मैडम 10 अप्रैल का टाइम दिया था।
बेंच: हां.. तो नहीं फाइल करोगे तो क्लोज तो होगा ही।

जस्टिस शर्मा ने कोर्ट में गड़बड़ी पर आपत्ति जताई।

जस्टिस शर्मा- मैं लिखूंगा कि आप इस कार्रवाई को खराब कर रहे हैं। मुझे घूरो मत। 
केजरीवाल- वजह 8: एक ट्रेंड देखने को मिल रहा है कि सीबीआई और ईडी की हर बात मानी गई है।
बेंच- मानी नहीं, मानी नहीं।
केजरीवाल- हर दुआ को फैसले में बदल दिया गया है।
बेंच- यह बात मुझे समझ नहीं आ रही।
केजरीवाल- जब भी वो अर्जी देते हैं तो उसको मान लिया जाता है और ऑर्डर उनके फेवर में पास होता है।

'अदालत नाटक का मंच नहीं'
पिछली सुनवाई पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि अदालत नाटक का मंच नहीं है। मेहता ने केजरीवाल की अर्जी का कड़ा विरोध किया। उन्होंने केजरीवाल के आरोपों को तुच्छ और अवमाननापूर्ण बताया था। मेहता ने यह भी बताया था कि सात अन्य बरी हुए आरोपियों ने भी जज को हटाने की अर्जी दी थी। जस्टिस शर्मा ने कहा था कि यदि कोई और अर्जी देना चाहता है तो दे सकता है, ताकि वह एक बार में फैसला कर सकें।

निचली अदालत का फैसला
27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य को बरी कर दिया था। निचली अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो को फटकार लगाई थी। उसने कहा था कि उसका मामला न्यायिक जांच में टिकने योग्य नहीं है। यह पूरी तरह से अविश्वसनीय पाया गया था।


नौ मार्च को जस्टिस शर्मा ने केंद्रीय जांच ब्यूरो की याचिका पर सभी 23 आरोपियों को नोटिस जारी किया था। उन्होंने कहा था कि आरोप तय करने के चरण में निचली अदालत की कुछ टिप्पणियां त्रुटिपूर्ण प्रतीत होती हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय ने केजरीवाल के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया था। उन्होंने कहा था कि जज को हटाने का फैसला संबंधित जज को ही लेना होता है। 11 मार्च को केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने आशंका जताई थी कि सुनवाई निष्पक्ष नहीं होगी।

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