उमर अनिर्बन की रिहाई के लिए अरुंधति रॉय ने भी किया संसद तक मार्च
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जेएनयू के छात्रों ने आज देशद्रोही नारे लगाने के आरोप में जेल में बंद उमर खालिद और अनिर्बन भट्टाचार्य की रिहाई के लिए संसद तक मार्च किया। उनके इस मार्च में मशहूर और अपने बयानों को लेकर हमेशा विवादों में रहने वाली लेखक अरुंधति रॉय भी शामिल हुईं।
अरुंधति रॉय ने हमेशा कश्मीर और नॉर्थ-ईस्ट में लगे विशेष सेना कानून अफसपा को हटाने की वकालत की है। अपने बयानों को लेकर विवादों में रही अरुंधति तो कई बार ये बोल चुकी हैं कि भारत को वो सब भुगतना पड़ेगा जो कश्मीर ने भुगता है।
जेएनयू में 9 फरवरी को देशद्रोही नारेबाजी करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए उमर खालिद और अनिर्बन भट्टाचार्य की न्यायिक हिरासत आज कोर्ट ने 14 दिन के लिए बढ़ा दी है। इसके साथ ही खालिद ने निचली अदालत में अपनी जमानत याचिका दायर की है।
'अदालत को अपना काम पता है उसे आप जैसे समाजसेवियों की जरूरत नहीं'
जेएनयू अध्यक्ष कन्हैया कुमार के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में एक और याचिका दायर की गई जिसे कोर्ट ने सुनने से इंकार कर दिया। जज प्रतिभा रानी ने याचिकाकर्ता से पूछा कि आप कह रहे हैं कि आप भारतीय नागरिक हैं तो बताइए आप कितने मामलों में दखलंदाजी करते हैं।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता से ये भी पूछा कि आप कौन हैं जो इस मामले की आईबी जांच चाहते हैं। हमारे अदालत और कानून अपना खयाल रख सकते हैं उसे आप जैसे समाजसेवियों की जरूरत नहीं है। इसके बाद याचिकाकर्ता ने याचिका वापस ले ली।
बता दें कि याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि कन्हैया के केस में जांच आईबी करे और जेएनयू में देशविरोधी गतिविधियों को रोका जाए। याचिका में कहा गया था कि कन्हैया जमानत की शर्तों का उल्लंघन कर रहा है।
उसका 9 मार्च को दिया सेना के खिलाफ बयान देशद्रोह की श्रेणी में आता है। उसने जो बयान असम, नागालैंड के बारे में बयान दिया था वो देश की नीतियों के खिलाफ है याचिका में ऐसा भी कहा गया था।
निष्कासन की सिफारिश की जानकारी से कन्हैया का इंकार
जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने आज विश्वविद्यालय द्वारा गठित जांच कमेटी की तरफ से कारण बताओ नोटिस मिलने की पुष्टि की है। इसके साथ ही कन्हैया ने निष्कासन की सिफारिश की जानकारी से इनकार किया है।
कन्हैया बोले कि उन्हें कमेटी की तरफ से नोटिस मिला है जिसका जवाब वो बुधवार शाम तक देंगे। कन्हैया ने बताया कि जवाब देने के लिए बुधवार शाम तक का ही समय दिया गया है।
जब कन्हैया से पूछा गया कि क्या विश्वविद्यालय द्वारा गठित कमेटी ने उनके निष्कासन की सिफारिश की है तो उन्होंने कोई जवाब देने से इंकार करते हुए कहा कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है।
बता दें कि इससे पहले सोमवार को जेएनयू की एक उच्चस्तरीय समिति ने 9 फरवरी को हुए राष्ट्रविरोधी नारेबाजी वाले कार्यक्रम में कन्हैया कुमार, उमर खालिद, अनिर्बन भट्टाचार्य और दो अन्य छात्रों को दोषी करार दिया है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में इन सभी छात्रों को जेएनयू से निष्कासित करने की सिफारिश की है।