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किसी भी वक्त बड़े हादसे का शिकार हो सकता है ये आयुध डिपो, अवैध बस्ती बनी चिंता का कारण
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Thu, 02 Jun 2016 12:00 PM IST
सार
- आबादी चिंता के कारण के साथ हादसे का भी बन सकती सबब
- अवैध बैंक्वेट हॉल में होने वाली आतिशबाजी बन सकती है आग का कारण
- गुडग़ांव के इस आयुध डिपो में 21 दिन तक जंग लडने का बारुद
- इस क्षेत्र में रहते हैं दो लाख से अधिक लोग
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
महाराष्ट्र के पुलगांव स्थित एशिया के सबसे बड़े आयुध डिपो में आग ने गुडग़ांव स्थित एयरफोर्स के आयुध डिपो की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। डिपो के 900 मीटर दायरे में अवैध बस्ती की आबादी चिंता के कारण के साथ हादसे का सबब भी बन सकती है।
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डिपो में यदि विस्फोट हुआ एक झटके में लाखों जाने जाने की संभावना है। वहीं, इस क्षेत्र में बने अवैध बैंक्वेट हॉल में होने वाली आतिशबाजी आग का कारण भी बन सकता है।
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सूत्रों के मुताबिक इस घटना के बाद रक्षा मंत्रालय ने सभी आयुध डिपो की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम का निर्देश दिया है। इसके साथ ही सभी आयुध डिपो को सेफ्टी ऑडिट की भी तैयारी की जा रही है।
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बता दें कि गुडग़ांव आयुध डिपो में यहां भी बड़ी मात्रा में बम, ग्रेनेड, गोला-बारूद और हथियार रखे हुए है। जो समय-समय पर देश के दूसरे हिस्सों में भेजा जाता है। एक अधिकारी के मुताबिक करगिल युद्ध के दौरान वायु सेना ने इसी आयुद्ध डिपो से गोला बारुद लेकर पूरी लड़ाई लड़ी थी।
जानकारों के मुताबिक गोपनीयता के लिहाज से सेना ने यह तो साफ नहीं किया है कि इस डिपो में कितना गोला बारुद है, लेकिन इतना जरूर है कि यह देश का सबसे बड़ा आयुध डिपो है और यदि देश की सेना केवल इस डिपो के भंडार से 21 दिन तक जंग लड़ सकती हैं।
इसमें लगने वाली छोटी सी चिंगारी भी भयनाक तबाही मचाएगी। जिससे 900 मीटर में बसे अवैध आबादी में लाखों जान संकट में पड़ सकते हैं। करीब 2325 एकड़ की बसी दो लाख आबादी पूरी तरह से नेस्तनांबूद हो सकती है।
सरकारी तंत्र है इसे लेकर लापरवाह
सुरक्षा को लेकर सरकारी तंत्र कितना लापरवाह है इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस क्षेत्र में हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब तक वास्तवित लाइन ऑफ कंट्रोल नहीं बनाया गया है। जबकि इस मामले में गंभीर भारतीय वायु सेना ने इसे गंभीरता से लेते हुए डिफेंस एक्ट के तहत एक आदेश जारी कर आयुध डिपो के चारो ओर नौ सौ मीटर क्षेत्र को प्रतिबंधित कर दिया था।
साथ ही स्थानीय प्रशासन व निकाय को इस क्षेत्र में हुए निर्माण को तोडने के आदेश दिए थे। हालांकि एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगाते हुए केंद्र सरकार एवं रक्षा मंत्रालय को वास्तविक प्रभावित एरिया के निर्धारण का निर्देश दिया था। हालांकि अभी तक केंद्र सरकार इस संबंध में कोई ठोस फैसला नहीं ले सकी है।
तीन सौ मीटर प्रतिबंधित क्षेत्र करने का है प्रस्ताव
अदालत में आयुध डिपो के चारो ओर प्रतिबंधित क्षेत्र का दायरा घटा कर तीन सौ मीटर करने का प्रस्ताव दिया गया था। हालांकि इस प्रस्ताव के खिलाफ रक्षा मंत्रालय ने जवाब दाखिल करते हुए बताया था कि इतना करने के लिए डिपो की भंडारण क्षमता में 62 फीसदी की कमी करनी पड़ेगी। ऐसा देश की सीमाओं की स्थिति को देखते हुए संभव नहीं है।
आंकड़ों पर एक नजर
-900 मीटर है आयुध डिपो के चारो ओर प्रतिबंधित क्षेत्र
-इतने क्षेत्र में 14154 स्ट्रक्चर हैं खड़े
-500 मीटर में 6275 स्ट्रक्चर हैं खड़े
-300 मीटर प्रतिबंधित क्षेत्र करने का है प्रस्ताव
-62 फीसदी कम करना होगा भंडारण प्रस्ताव पर अमल के लिए
-02 लाख से अधिक आबादी है इस क्षेत्र में
साथ ही स्थानीय प्रशासन व निकाय को इस क्षेत्र में हुए निर्माण को तोडने के आदेश दिए थे। हालांकि एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगाते हुए केंद्र सरकार एवं रक्षा मंत्रालय को वास्तविक प्रभावित एरिया के निर्धारण का निर्देश दिया था। हालांकि अभी तक केंद्र सरकार इस संबंध में कोई ठोस फैसला नहीं ले सकी है।
तीन सौ मीटर प्रतिबंधित क्षेत्र करने का है प्रस्ताव
अदालत में आयुध डिपो के चारो ओर प्रतिबंधित क्षेत्र का दायरा घटा कर तीन सौ मीटर करने का प्रस्ताव दिया गया था। हालांकि इस प्रस्ताव के खिलाफ रक्षा मंत्रालय ने जवाब दाखिल करते हुए बताया था कि इतना करने के लिए डिपो की भंडारण क्षमता में 62 फीसदी की कमी करनी पड़ेगी। ऐसा देश की सीमाओं की स्थिति को देखते हुए संभव नहीं है।
आंकड़ों पर एक नजर
-900 मीटर है आयुध डिपो के चारो ओर प्रतिबंधित क्षेत्र
-इतने क्षेत्र में 14154 स्ट्रक्चर हैं खड़े
-500 मीटर में 6275 स्ट्रक्चर हैं खड़े
-300 मीटर प्रतिबंधित क्षेत्र करने का है प्रस्ताव
-62 फीसदी कम करना होगा भंडारण प्रस्ताव पर अमल के लिए
-02 लाख से अधिक आबादी है इस क्षेत्र में