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Delhi: पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन और सौरभ भारद्वाज के खिलाफ ACB ने दर्ज किया केस, एलजी ने दी थी जांच की मंजूरी

Thu, 26 Jun 2025 03:49 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Thu, 26 Jun 2025 03:49 PM IST
सार

आम आदमी पार्टी की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे सत्येंद्र जैन और सौरभ भारद्वाज के खिलाफ दिल्ली की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने मामला दर्ज किया है। इसकी जानकारी खुद भ्रष्टाचार निरोधक शाखा के प्रमुख, संयुक्त पुलिस आयुक्त मधुर वर्मा ने दी है।

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Anti Corruption Branch registered a case against former minister Saurabh Bhardwaj and Satyendra Jain
सौरभ भारद्वाज और सत्येंद्र जैन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने आम आदमी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज और सत्येंद्र जैन के खिलाफ मामला दर्ज किया। दोनों पर हेल्थ उपकरण खरीद में घोटाले का आरोप है। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा के प्रमुख संयुक्त पुलिस आयुक्त मधुर वर्मा ने कहा कि दिल्ली सरकार की स्वास्थ्य अवसंरचना परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के सिलसिले में आप नेता सौरभ भारद्वाज और सत्येंद्र जैन के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

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उन्होंने कहा कि साल 2018-19 में 5,590 करोड़ रुपये की लागत से 24 अस्पताल परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी। ये परियोजनाएं बेवजह देरी और खगोलीय लागत वृद्धि में फंसी हुई हैं, जो बड़े पैमाने पर वित्तीय गबन का संकेत देती हैं।
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आगे जानकारी देते हुए कहा कि पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज और सत्येंद्र जैन के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी मिलने के बाद मामला दर्ज किया गया है।
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बता दें कि 22 अगस्त 2024 को तत्कालीन विपक्ष के नेता और वर्तमान दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने एक शिकायत दर्ज कराई थी। जिसमें विभिन्न स्वास्थ्य अवसंरचना परियोजनाओं में गंभीर अनियमितताओं और संदिग्ध भ्रष्टाचार को उजागर किया था। जिसमें परियोजना बजट में व्यवस्थित हेरफेर, सार्वजनिक धन का दुरुपयोग और निजी ठेकेदारों के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया गया था।

आप ने साधा निशाना
आम आदमी पार्टी (आप) ने दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्रियों सौरभ भारद्वाज और सत्येंद्र जैन के खिलाफ दर्ज एफआईआर को फर्जी करार दिया है। पार्टी ने उपराज्यपाल वीके सक्सेना और बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है। आप ने पूछा कि एफआईआर को क्यों छिपाया जा रहा है और प्रेस नोट के जरिए भ्रामक जानकारी क्यों फैलाई जा रही है? आप का आरोप है कि एफआईआर में कोई ठोस सबूत नहीं, जिसके डर से बीजेपी इसे सार्वजनिक नहीं कर रही।

आप ने कहा कि अस्पताल परियोजनाएं 2017-18 और एचआईएमएस की घोषणा 2016-17 में हुई, जबकि सौरभ भारद्वाज 2023 में मंत्री बने। सौरभ भारद्वाज ने कहा, "जब मैं मंत्री ही नहीं था, तो आरोपी कैसे?" सत्येंद्र जैन ने भी परियोजनाओं में भ्रष्टाचार के सबूत न होने की बात कही। आप ने आरोप लगाया कि बीजेपी एजेंसियों का दुरुपयोग कर आप नेताओं को बदनाम कर रही है।

साल 2018-19 में 24 अस्पताल परियोजनाओं को मंजूरी दी गई
आरोप है कि साल 2018-19 में 5590 करोड़ रुपये की लागत की 24 अस्पताल परियोजनाएं (11 ग्रीनफील्ड और 13 ब्राउनफील्ड) स्वीकृत की गई थी। इसमें बड़े पैमाने पर हेराफेरी का आरोप है। 6800 के कुल बिस्तर क्षमता वाले 7 आईसीयू अस्पतालों को सितंबर 2021 से 6 महीने के भीतर पूर्व-इंजीनियर संरचनाओं का उपयोग कर निर्माण के लिए 1125 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी गई थी। तीन साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी 800 करोड़ रुपये की लागत के साथ केवल 50 फीसदी काम पूरा हुआ।
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लागत से तीन गुना खर्च
लोकनायक अस्पताल न्यू ब्लॉक परियोजना के लिए 465.52 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी गई थी। चार साल में 1125 करोड़ रुपये की राशि खर्च हुई जो लागत से करीब तीन गुनी है। पॉलीक्लिनिक्स परियोजना के लिए 168.52 करोड़ रुपये की लागत स्वीकृत हुई। इसमें 94 पॉलीक्लिनिक्स तैयार करना था, लेकिन 52 का निर्माण करने पर 220 करोड़ रुपये खर्च हुए। स्वास्थ्य सूचना प्रबंधन प्रणाली को लागू करने में एक दशक से अधिक समय की देरी हुई। इसमें वित्तीय लेन-देन में अस्पष्टता का मामला सामने आया। मंत्रियों ने एनआईसी की ई-हॉस्पिटल प्रणाली सहित लागत प्रभावी समाधानों को बार-बार खारिज किया। 

आरोप में दिखी सच्चाई 
एसीबी को मिली शिकायत में प्रथम दृष्टया परियोजना लागत में लगातार वृद्धि, विभाग के तरफ से जानबूझकर देरी, लागत प्रभावी समाधानों को अस्वीकार करना, निधियों का गलत आवंटन और बेकार परिसंपत्तियों का निर्माण का खुलासा हुआ है। इसे कदाचार और भ्रष्ट गतिविधियों की रणनीति और पैटर्न बताया गया। इसके परिणामस्वरूप सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।

पीडब्ल्यूडी ने की गहन सतर्कता जांच की सिफारिश 
लोक निर्माण विभाग ने उल्लंघनों को देखते हुए गहन सतर्कता जांच की सिफारिश की। इसमें कहा गया कि आईसीयू अस्पतालों, पॉलीक्लिनिक्स और अन्य 24 अस्पतालों के निर्माण से संबंधित मुद्दों की पूरी जांच करें। भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और कानूनों और नियमों के उल्लंघन के मामलों की पहचान करें। यदि कोई गलत काम हुआ है तो उसके लिए जिम्मेदारी तय करें। 

सतर्कता विभाग ने दी अनुमति 
सतर्कता विभाग (डीओवी) ने प्रस्ताव दिया कि मामला पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज और सत्येंद्र जैन के खिलाफ जांच करने के लिए पीओसी अधिनियम, 1988 की धारा 17-ए के तहत अनुमति देने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजने से पहले एलजी के समक्ष सिफारिश के लिए प्रस्तुत किया जा सकता है।

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