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पानी न मिलने से नाराज महिलाओं ने अधिकारियों के दफ्तरों पर किया कब्जा
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Fri, 01 Jul 2016 12:06 AM IST
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पानी
- फोटो : getty
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पानी न मिलने से नाराज संजय कॉलोनी वार्ड नंबर-4 की महिलाओं ने बृहस्पतिवार को एसई द्वितीय और निगमायुक्त कार्यालय पर कब्जा कर लिया। करीब डेढ़ घंटे तक हंगामा करती रही और निगम अफसरों के खिलाफ नारेबाजी की।
उनके गुस्से का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पुलिस के आने के बाद भी महिलाएं कार्यालय से बाहर नहीं आई। बाद में संयुक्त आयुक्त और एसई के आने और उनकी बात सुनने के बाद ही महिलाएं कार्यालय से बाहर निकली। साथ ही चेतावनी भी दी कि यदि जल्द पानी की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वह हाईवे जाम करने को मजबूर होंगी।
कॉलोनी की रहने वाली सीमा पांडेय, नीलम मिश्रा, किरन, सरोज, वितेश, अमरजीत कौर, उमरावती, सरोज वर्मा, रंजना गुप्ता आदि का कहना है कि गली नंबर-60, 61, 62, 63 और 65 में वह पिछले तीन महीने से पानी की समस्या से जूझ रही हैं।
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जब क्षेत्र के एसडीओ और एक्सईएन रमन शर्मा से बात की जाती है तो वह बहानीबाजी बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं। इसके पहले भी मुख्य अभियंता और निगमायुक्त से मिलकर समस्या का समाधान करने के लिए गुहार लगा चुके हैं लेकिन समस्या का समाधान आज तक नहीं हुआ। विरोध करने पर नंबर देते हैं। फिर नंबर पर फोन करो तो उठाते नहीं।
रात दो बजे पानी के लिए उठना पड़ता है:
महिलाओं का आरोप है कि वह रात के दो बजे पानी भरने के लिए उठती हैं लेकिन टोटी में पानी ही नहीं आता। इससे न तो घर का काम हो पा रहा है और न ही बाहर का। पांच हजार रुपये कमाने वाला पहले अपना भेट भरे या फिर पानी खरीदे।
उन्होंने बताया कि वार्ड के लिए आठ टयूबवेल पास कराए गए हैं लेकिन आज तक एक भी नहीं लगा। पहले टैंकर से पानी भिजवाने का आश्वासन दिया गया वह भी एक-दो दिन चलकर बंद हो गया। लोग पानी कहां से लाएं। महिलाओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द पानी उपलब्ध नहीं कराया गया तो वह हाईवे जाम करने को मजबूर होंगी।
गुस्से के आगे तमाशबीन बने निगम कर्मचारी:
सैकड़ों की संख्या में निगम मुख्यालय पहुंची महिलाओं के गुस्से को देखकर निगम कर्मचारी तमाशबीन बने रहे। क्योंकि वह निगमायुक्त से मिलने पर अड़ी रही।
उनका कहना है कि निचले स्तर के अधिकारी ऐसी कमरों में बैठकर लोगों को झूठा आश्वासन देते हैं। यही अधिकारी सरकार की छवि को खराब कर रहे हैं। एसई द्वितीय अनिल मेहता के आफिस में न रहने के बावजूद एसी चलने पर महिलाओं ने नाराजगी जताई। अंदर से कमरा बंद होरे पर उसे तोडने की भी कोशिश की।
बाद में कर्मचारी के गेट खोलने पर वहीं जाकर बैठ गई। आधे घंटे तक यहां हंगामा करने के बाद वह निगमायुक्त कार्यालय पहुंचकर उस पर कब्जा कर लिया। घंटों बाद पहुंची संयुक्त आयुक्त और एक्सईएन के आश्वासन के बाद ही वह वापस लौटी।
पुलिसकर्मी भी रहे असहाय:
महिलाओं के गुस्से और विरोध को देखते हुए किसी ने पुलिस को सूचना देकर बुला लिया। निगम पहुंचे पुलिसकर्मियों ने भी उन्हें समझाने का प्रयास किया लेकिन वह न तो उनकी बात सुनने को राजी थी और न ही आफि स से बाहर निकलने की। काफी देर तक मान मनौव्वल चलता रहा।
दरअसल निगमायुक्त के अवकाश पर होने के कारण निगम का कोई भी अधिकारी मौजूद नहीं था। न तो संयुक्त आयुक्त कार्यालय में थी और न ही मुख्य अभियंता। दोनों एसई भी आफिस से बाहर ही थे। कोई अधिकारी महिलाओं की बात सुनने के लिए मौजूद नहीं था। यही कारण है कि उनका गुस्सा और बढ़ गया।
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उनके गुस्से का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पुलिस के आने के बाद भी महिलाएं कार्यालय से बाहर नहीं आई। बाद में संयुक्त आयुक्त और एसई के आने और उनकी बात सुनने के बाद ही महिलाएं कार्यालय से बाहर निकली। साथ ही चेतावनी भी दी कि यदि जल्द पानी की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वह हाईवे जाम करने को मजबूर होंगी।
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कॉलोनी की रहने वाली सीमा पांडेय, नीलम मिश्रा, किरन, सरोज, वितेश, अमरजीत कौर, उमरावती, सरोज वर्मा, रंजना गुप्ता आदि का कहना है कि गली नंबर-60, 61, 62, 63 और 65 में वह पिछले तीन महीने से पानी की समस्या से जूझ रही हैं।
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जब क्षेत्र के एसडीओ और एक्सईएन रमन शर्मा से बात की जाती है तो वह बहानीबाजी बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं। इसके पहले भी मुख्य अभियंता और निगमायुक्त से मिलकर समस्या का समाधान करने के लिए गुहार लगा चुके हैं लेकिन समस्या का समाधान आज तक नहीं हुआ। विरोध करने पर नंबर देते हैं। फिर नंबर पर फोन करो तो उठाते नहीं।
रात दो बजे पानी के लिए उठना पड़ता है:
महिलाओं का आरोप है कि वह रात के दो बजे पानी भरने के लिए उठती हैं लेकिन टोटी में पानी ही नहीं आता। इससे न तो घर का काम हो पा रहा है और न ही बाहर का। पांच हजार रुपये कमाने वाला पहले अपना भेट भरे या फिर पानी खरीदे।
उन्होंने बताया कि वार्ड के लिए आठ टयूबवेल पास कराए गए हैं लेकिन आज तक एक भी नहीं लगा। पहले टैंकर से पानी भिजवाने का आश्वासन दिया गया वह भी एक-दो दिन चलकर बंद हो गया। लोग पानी कहां से लाएं। महिलाओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द पानी उपलब्ध नहीं कराया गया तो वह हाईवे जाम करने को मजबूर होंगी।
गुस्से के आगे तमाशबीन बने निगम कर्मचारी:
सैकड़ों की संख्या में निगम मुख्यालय पहुंची महिलाओं के गुस्से को देखकर निगम कर्मचारी तमाशबीन बने रहे। क्योंकि वह निगमायुक्त से मिलने पर अड़ी रही।
उनका कहना है कि निचले स्तर के अधिकारी ऐसी कमरों में बैठकर लोगों को झूठा आश्वासन देते हैं। यही अधिकारी सरकार की छवि को खराब कर रहे हैं। एसई द्वितीय अनिल मेहता के आफिस में न रहने के बावजूद एसी चलने पर महिलाओं ने नाराजगी जताई। अंदर से कमरा बंद होरे पर उसे तोडने की भी कोशिश की।
बाद में कर्मचारी के गेट खोलने पर वहीं जाकर बैठ गई। आधे घंटे तक यहां हंगामा करने के बाद वह निगमायुक्त कार्यालय पहुंचकर उस पर कब्जा कर लिया। घंटों बाद पहुंची संयुक्त आयुक्त और एक्सईएन के आश्वासन के बाद ही वह वापस लौटी।
पुलिसकर्मी भी रहे असहाय:
महिलाओं के गुस्से और विरोध को देखते हुए किसी ने पुलिस को सूचना देकर बुला लिया। निगम पहुंचे पुलिसकर्मियों ने भी उन्हें समझाने का प्रयास किया लेकिन वह न तो उनकी बात सुनने को राजी थी और न ही आफि स से बाहर निकलने की। काफी देर तक मान मनौव्वल चलता रहा।
दरअसल निगमायुक्त के अवकाश पर होने के कारण निगम का कोई भी अधिकारी मौजूद नहीं था। न तो संयुक्त आयुक्त कार्यालय में थी और न ही मुख्य अभियंता। दोनों एसई भी आफिस से बाहर ही थे। कोई अधिकारी महिलाओं की बात सुनने के लिए मौजूद नहीं था। यही कारण है कि उनका गुस्सा और बढ़ गया।