फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Amit Shah became the face of BJP in delhi polls

दिल्ली विधानसभा चुनावः अमित शाह बने भाजपा का चेहरा, लगाई पूरी ताकत

Fri, 31 Jan 2020 05:09 AM IST
दुष्यंत शर्मा हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 31 Jan 2020 05:09 AM IST
विज्ञापन
Amit Shah became the face of BJP in delhi polls
अमित शाह - फोटो : अमर उजाला

भाजपा की अंदरूनी राजनीति की दृष्टि से दिल्ली विधानसभा चुनाव अहम है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद करीब 66 महीने में हुए 36 राज्यों के विधानसभा चुनाव में यह पहला मौका है जब पीएम मोदी पार्टी का चेहरा नहीं हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाव पूरी तरह से सीएम अरविंद केजरीवाल बनाम गृह मंत्री अमित शाह हो चुका है। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि शाह ऐसे समय में पार्टी का अघोषित चेहरा बने हैं जब अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका खत्म हो गई है।

विज्ञापन


दरअसल 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद अध्यक्ष बनाए गए शाह के कार्यकाल में पार्टी ने 35 राज्यों में विधानसभा चुनाव का सामना किया। इनमें से कुछ राज्यों में सीएम ही पार्टी का चेहरा बने। जबकि ज्यादातर राज्यों में पार्टी ने पीएम मोदी को अपना चेहरा बनाया। इनमें मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान में पार्टी ने सीएम को ही अपना चेहरा बनाया, जबकि कर्नाटक में बीएस येदियुरप्पा तो दिल्ली में किरण बेदी पर दांव लगाया। हालांकि इन राज्यों के इतर दूसरे राज्यों पार्टी पीएम मोदी को चेहरा बना कर चुनाव मैदान में उतरी।
विज्ञापन


दिल्ली में बदली रणनीति
लोकसभा के बाद हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनाव में पार्टी एक बार फिर से केंद्रीय योजनाओं और पीएम मोदी के नाम पर ही चुनाव मैदान में उतरी। स्थानीय नेतृत्व की अलोकप्रियता के कारण आशातीत सफलता नहीं मिलने के बाद दिल्ली चुनाव के दौरान ही अध्यक्ष पद से हटने के बावजूद शाह ने चुनाव की कमान अपने कंधे पर ले ली। इस दौरान शाह ने शाहीन बाग में सीएए के खिलाफ जारी आंदोलन के खिलाफ अभियान चला कर पूरे चुनाव प्रचार को राष्ट्रवाद पर केंद्रित कर दिया। बीते साढ़े पांच साल में यह पहली बार है जब विपक्ष के निशाने पर पीएम मोदी कम शाह ज्यादा हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

अमित शाह क्यों?

लोकसभा चुनाव के बाद बतौर गृह मंत्री शाह अचानक पार्टी में राष्ट्रवादी चेहरा बन कर उभरे हैं। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 निरस्त करने और नागरिकता संशोधन बिल को राज्यसभा में बहुमत के अभाव में भी पारित करा लेने के बाद शाह अचानक पार्टी में हिंदुत्व का नया चेहरा बन कर उभरे हैं। अगर शाह चुनाव जिताने में सफल रहते हैं तो पार्टी को हर चुनाव में पीएम मोदी को बतौर चेहरा पेश करने की मजबूरी से निजात मिलेगी।

लगाई पूरी ताकत
चुनाव की अधिसूचना जारी होने के साथ ही शाह ने न सिर्फ रणनीति की सारी जिम्मेदारी ले ली है, बल्कि पूरी ताकत लगा रखी है। उनके करीबी नेताओं के मुताबिक वर्तमान में शाह का कम से कम 18 घंटे का समय रणनीति बनाने और चुनाव प्रचार में लग रहा है। चुनाव प्रचार खत्म होने तक उनकी दैनिक दिनचर्या ऐसी ही रहेगी।

अब तक चुनाव प्रचार से दूर हैं मोदी
आम तौर पर हर चुनाव में शुरू से ही मुखर भूमिका निभाने वाले पीएम मोदी इस बार दिल्ली चुनाव प्रचार से दूर हैं। चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद से अब तक पीएम ने एक भी जनसभा को संबोधित नहीं किया है। पार्टी की योजना अंतिम समय में पीएम की एक के बाद एक तीन रैलियां कराने की है।

शाह की भूमिका पर चर्चा क्यों?
दरअसल भाजपा में 75 साल से अधिक उम्र के नेताओं को जिम्मेदारी नहीं देने की रणनीति है। इस हिसाब से पीएम मोदी के नेतृत्व में पार्टी 2024 में अंतिम चुनाव लड़ेगी। वर्ष 2025 में पीएम की उम्र 75 वर्ष होगी। ऐसे में इस फार्मूले के तहत अ गले चुनाव के एक साल बाद पीएम पद के लिए पार्टी नया चेहरा तय करेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed