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एम्स का चौंकाने वाला खुलासा: बेवजह रसायन का इस्तेमाल बन रहा 'साइलेंट किलर', 40 फीसदी मरीज बीमारी से पीड़ित
Wed, 23 Oct 2024 07:38 AM IST
अनुज कुमार
राकेश शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राकेश शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनुज कुमार
Updated Wed, 23 Oct 2024 07:38 AM IST
सार
दिल्ली एम्स ने एक अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा किया है। एम्स का कहना है कि 40 फीसदी मरीजों में रोग के पीछे विषाक्तता बड़ा कारण मिला है।
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चिकित्सा
- फोटो : Adobe stock
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विस्तार
खाने-पीने की वस्तुओं में अनजाने में इस्तेमाल हो रहे रसायन साइलेंट किलर बन रहे हैं। एम्स के एनाटॉमी विभाग ने विषाक्तता की पहचान के लिए देश का पहला रोग विषयक पारिस्थितिक विषाक्तता निदान एवं अनुसंधान सुविधा विकसित किया। यहां ऐसे लोगों की जांच की गई जिनके रोग का कारण पता नहीं चल पा रहा था।
इस जांच में रोग के लिए अनुवांशिकी, दुर्घटना, संक्रमण के बाद विषाक्तता बढ़ाने में प्रमुख कारण मिला। विशेषज्ञों के अनुसार जागरूकता के अभाव में लोगों तक हैवी मेटल, कीटनाशक युक्त खाद्य व पेय पदार्थ पहुंच रहा है। इससे शरीर के अंगों को घातक नुकसान होता है।
सुविधा के सह-संस्थापक डॉ. जावेद के कादरी ने बताया कि सेंटर में एम्स, नई दिल्ली और अन्य सरकारी अस्पतालों के आपातकालीन चिकित्सा, आईसीयू, चिकित्सा, न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, जेरिएट्रिक मेडिसिन, बाल चिकित्सा, हेमाटोलॉजी, कान, नाक और गला, यूरोलॉजी, बाल चिकित्सा न्यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, कार्डियोलॉजी, न्यूरो-सर्जरी, रुमेटोलॉजी, सर्जरी, स्त्री रोग, सीडीईआर, पल्मोनरी मेडिसिन, ऑर्थोपेडिक्स, मनोचिकित्सा विभाग विभाग से मरीजों के रोग के कारण का पता लगाने के लिए भेजा गया। यहां से आए मरीजों के सैंपल की जांच के बाद करीब 40 फीसदी लोगों में रोग के लिए विषाक्तता बढ़ा कारण पाया गया।
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हैवी मेटल और कीटनाशक से हो सकते हैं रोग
अध्ययन के दौरान हैवी मेटल में कैडमियम, सीसा, तांबा और जस्ता के अलावा कीटनाशक से शरीर पर होने वाले नुकसान का जांच की गई। इसमें पाया गया कि किसी भी माध्यम से शरीर तक पहुंचने वाले हैवी मेटल और कीटनाशक शरीर को कई घातक रोग देते हैं। इसमें अल्जाइमर, दिल की गति रुकना, लंग्स कैंसर, यकृत परिगलन, ओवेरियन कैंसर, मस्कुलोस्केलेटल रोग, थायरोक्सिन हार्मोन का कम होना, ऑस्टियोपोरोसिस, गुर्दे की शिथिलता, उल्टी, दस्त, अंतःसंवहनी रक्त-अपघटन प्रमुख हैं।
देश के 718 जिलों में स्थिति खराब
रिपोर्ट में एक अध्ययन का जिक्र किया गया है। इसमें बताया गया कि हैवी मेटल सहित दूूसरे कारणों से देश के 718 जिलों में स्थिति खराब है। कई हैवी मेटल तो कही दूसरे वजहों से लोग रोग का शिकार हो रहे हैं। सबसे ज्यादा 386 जिलों में नाइट्रेट का दुष्प्रभाव है।
जागरूकता से बचाव
एम्स में एनाटॉमी विभाग के प्रमुख और रोग
विषयक पारिस्थितिक विषाक्तता निदान एवं अनुसंधान सुविधा के संस्थापक प्रोफेसर डॉ. ए शरीफ का कहना है कि जागरूकता रोग होने की आशंका कम हो जाती है। कुछ भी लेने से पहले उक्त की जांच कर लेनी चाहिए।
जल्द तैयार होगा प्रोटोकॉल
देश में हैवी मेटल की उपलब्धता, कीटनाशक के इस्तेमाल सहित अन्य को लेकर कोई प्रोटोकॉल नहीं है। अभी विदेश में बने नियम को ही फॉलो किया जा रहा है। देश में इसे लेकर मरीजों के डाटा तैयार किया जा रहा है। डाटा तैयार होने के बाद भारतीय लोगों की जरूरत और स्थिति को आधार बनाकर एक प्रोटोकॉल बनाया जाएगा।
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इस जांच में रोग के लिए अनुवांशिकी, दुर्घटना, संक्रमण के बाद विषाक्तता बढ़ाने में प्रमुख कारण मिला। विशेषज्ञों के अनुसार जागरूकता के अभाव में लोगों तक हैवी मेटल, कीटनाशक युक्त खाद्य व पेय पदार्थ पहुंच रहा है। इससे शरीर के अंगों को घातक नुकसान होता है।
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सुविधा के सह-संस्थापक डॉ. जावेद के कादरी ने बताया कि सेंटर में एम्स, नई दिल्ली और अन्य सरकारी अस्पतालों के आपातकालीन चिकित्सा, आईसीयू, चिकित्सा, न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, जेरिएट्रिक मेडिसिन, बाल चिकित्सा, हेमाटोलॉजी, कान, नाक और गला, यूरोलॉजी, बाल चिकित्सा न्यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, कार्डियोलॉजी, न्यूरो-सर्जरी, रुमेटोलॉजी, सर्जरी, स्त्री रोग, सीडीईआर, पल्मोनरी मेडिसिन, ऑर्थोपेडिक्स, मनोचिकित्सा विभाग विभाग से मरीजों के रोग के कारण का पता लगाने के लिए भेजा गया। यहां से आए मरीजों के सैंपल की जांच के बाद करीब 40 फीसदी लोगों में रोग के लिए विषाक्तता बढ़ा कारण पाया गया।
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हैवी मेटल और कीटनाशक से हो सकते हैं रोग
अध्ययन के दौरान हैवी मेटल में कैडमियम, सीसा, तांबा और जस्ता के अलावा कीटनाशक से शरीर पर होने वाले नुकसान का जांच की गई। इसमें पाया गया कि किसी भी माध्यम से शरीर तक पहुंचने वाले हैवी मेटल और कीटनाशक शरीर को कई घातक रोग देते हैं। इसमें अल्जाइमर, दिल की गति रुकना, लंग्स कैंसर, यकृत परिगलन, ओवेरियन कैंसर, मस्कुलोस्केलेटल रोग, थायरोक्सिन हार्मोन का कम होना, ऑस्टियोपोरोसिस, गुर्दे की शिथिलता, उल्टी, दस्त, अंतःसंवहनी रक्त-अपघटन प्रमुख हैं।
देश के 718 जिलों में स्थिति खराब
रिपोर्ट में एक अध्ययन का जिक्र किया गया है। इसमें बताया गया कि हैवी मेटल सहित दूूसरे कारणों से देश के 718 जिलों में स्थिति खराब है। कई हैवी मेटल तो कही दूसरे वजहों से लोग रोग का शिकार हो रहे हैं। सबसे ज्यादा 386 जिलों में नाइट्रेट का दुष्प्रभाव है।
जागरूकता से बचाव
एम्स में एनाटॉमी विभाग के प्रमुख और रोग
विषयक पारिस्थितिक विषाक्तता निदान एवं अनुसंधान सुविधा के संस्थापक प्रोफेसर डॉ. ए शरीफ का कहना है कि जागरूकता रोग होने की आशंका कम हो जाती है। कुछ भी लेने से पहले उक्त की जांच कर लेनी चाहिए।
जल्द तैयार होगा प्रोटोकॉल
देश में हैवी मेटल की उपलब्धता, कीटनाशक के इस्तेमाल सहित अन्य को लेकर कोई प्रोटोकॉल नहीं है। अभी विदेश में बने नियम को ही फॉलो किया जा रहा है। देश में इसे लेकर मरीजों के डाटा तैयार किया जा रहा है। डाटा तैयार होने के बाद भारतीय लोगों की जरूरत और स्थिति को आधार बनाकर एक प्रोटोकॉल बनाया जाएगा।