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Delhi : एम्स की स्मार्ट लैब जल्द करेगी प्रीक्लेम्पसिया और अल्जाइमर रोग की पहचान, एएपीआई के साथ समझौता

Thu, 04 Jan 2024 06:25 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 04 Jan 2024 06:25 AM IST
सार

प्रीक्लेम्पसिया एक गंभीर स्थिति है, यह गर्भावस्था के दौरान होती है। इसमें शरीर में सूजन और मूत्र के साथ प्रोटीन निकलता है। ऐसे में जन्म से पहले गर्भ में पल रहे शिशुओं में असमान्यताओं का पता लगाया जा सकेगा और उनका इलाज भी हो पाएगा। इसके अलावा अल्जाइमर रोग भी बड़ी समस्या बनकर सामने आ रही है।

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AIIMS's smart lab will soon identify preeclampsia and Alzheimer's disease
Aiims delhi, एम्स, दिल्ली एम्स - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

एम्स की स्मार्ट लैब प्रीक्लेम्पसिया और अल्जाइमर रोग के लिए परीक्षण शुरू करने की योजना बना रही है। सुविधा शुरू होने के बाद एम्स में इलाज करवाने आ रहे हजारों मरीज को लाभ मिलेगा। 

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प्रीक्लेम्पसिया एक गंभीर स्थिति है, यह गर्भावस्था के दौरान होती है। इसमें शरीर में सूजन और मूत्र के साथ प्रोटीन निकलता है। ऐसे में जन्म से पहले गर्भ में पल रहे शिशुओं में असमान्यताओं का पता लगाया जा सकेगा और उनका इलाज भी हो पाएगा। इसके अलावा अल्जाइमर रोग भी बड़ी समस्या बनकर सामने आ रही है।
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एम्स में प्रयोगशाला चिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ. सुदीप दत्ता ने बताया कि सुविधा शुरू होने पर जल्द रोग का पता चल जाएगा। दोनों ही समस्या ही बड़ी हैं। अल्जाइमर की पहचान मधुमेह की तरह सीधा नहीं है। अल्जाइमर का जल्द पता चलने से रोगी का इलाज बेहतर हो जाता है। वहीं, प्रयोगशाला चिकित्सा विभाग में सहायक प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि न्यू आरकेआर में स्थित स्मार्ट लैब में अधिकतर सुविधाएं मुफ्त दी जाती हैं। यहां प्रति दिन पांच से छह हजार जांच होती है। प्रत्येक नमूने में करीब एक लाख पैरामीटर होते हैं। 
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प्रयोगशाला एक अत्याधुनिक एंड-टू-एंड कुल प्रयोगशाला स्वचालन मंच के रूप में काम करती है, जो एक ही छत के नीचे लगभग 100 परीक्षण मापदंडों के लिए सेवाओं की एक व्यापक निर्देशिका प्रदान करती है।

डॉ. दत्ता ने कहा कि बीमारियों की शीघ्र पहचान से जल्द इलाज शुरू हो सकता है। स्मार्ट लैब में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के इस्तेमाल से पहले के मुकाबले अधिक जांच हो रही हैं। 
डॉ. सुदीप ने बताया कि खून   की ऐसी जांच जो बाहर कम से कम एक हजार रुपये में होती है, एम्स में मुफ्त में की जाएगी। यहां 30 से 40 प्रतिशत जांच की रिपोर्ट चार घंटे में दी जा रही    है। वहीं अन्य की रिपोर्ट 12 घंटे में दी जा रही है। 10 प्रतिशत जांचमें ही 24 घंटे से अधिक का वक्त लग रहा है। 


एम्स ने किया एएपीआई के साथ समझौता 
अस्पताल में रोगी देखभाल को बेहतर बनाने व अनुसंधान, शिक्षा और ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए एम्स ने दिल्ली और एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडियन ओरिजिन (एएपीआई) के साथ समझौता किया है। इस बारे में एम्स में ओन्को-एनेस्थीसिया और पैलिएटिव मेडिसिन के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. राकेश गर्ग ने कहा कि कहा कि उपचार को बेहतर बनाने के लिए    भारत की आबादी पर अध्ययन करना होगा।

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