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एम्स के रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल जारी, सफदरजंग अस्पताल के बाहर भी प्रदर्शन
Sat, 03 Aug 2019 02:42 PM IST
पूजा त्रिपाठी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Sat, 03 Aug 2019 02:42 PM IST
सार
- जारी रहेगी एम्स के रेजिडेंट डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल
- शनिवार सुबह से आपातकालीन सेवाएं हुईं शुरू
- शुक्रवार को दिल्ली में डॉक्टरों ने 5 हजार ऑपरेशन टाले
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सफदरजंग अस्पताल के बाहर प्रदर्शन कर रहे मेडिकल के छात्र
- फोटो : ani
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विस्तार
दिल्ली एम्स के रेजिडेंट डॉक्टरों ने शनिवार(3 अगस्त) सुबह 8 बजे एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह एलान किया है कि एनएमसी बिल के कुछ प्रावधानों को लेकर चल रही उनकी अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी। हालांकि उन्होंने ये भी जानकारी दी है कि आपातकालीन सेवाएं आज(3 अगस्त) सुबह से ही शुरू हो जाएंगी।
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एम्स के अलावा सफदरजंग के मेडिकल के छात्र भी आज एनएमसी बिल के खिलाफ सड़कों पर उतरे। उन्होंने भी इस बिल के विरोध में प्रदर्शन किया
Delhi: Medical students protest against National Medical Commission (NMC) Bill outside Safdarjung Hospital. pic.twitter.com/lhDFObr2pq
— ANI (@ANI) August 3, 2019विज्ञापन
शुक्रवार को कैसा रहा हाल
एम्स और सफदरजंग अस्पताल के आपातकालीन विभाग में बृहस्पतिवार रात जाने वाले मरीजों को उपचार नहीं मिल सका। एम्स के आपातकालीन विभाग में प्रबंधन ने पर्याप्त व्यवस्था का दावा किया था लेकिन मरीजों को यहां भर्ती नहीं किया गया।
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आपातकालीन वार्ड में मरीजों को जब डॉक्टर नहीं मिले तो वे बाहर बैठकर इंतजार करने लगे। रात करीब डेढ़ बजे तक जब मरीजों को उपचार नहीं मिला तो सुरक्षा गार्ड ही उन्हें दूसरे किसी अस्पताल में जाने की सलाह देने लगे। पूर्वी दिल्ली के सुनील पांडे ने बताया कि बृहस्पतिवार की रात वह अपनी मां को लेकर एम्स पहुंचा। उनकी मां की तबियत काफी खराब थी लेकिन लंबे इंतजार के बाद भी उन्हें भर्ती नहीं किया गया।
वार्ड में न कोई डॉक्टर था और न ही कोई कर्मचारी। कुछ ही देर बाद सुरक्षा गार्ड वार्ड में आए और उन्हें वहां से जाने को कहने लगे। उन्होंने अपने मरीज को लेकर व्यथा भी सुनाई, लेकिन सुरक्षा गार्डों का कहना था कि एम्स में डॉक्टरों की हड़ताल है।
यहां कोई इलाज नहीं करने आएगा। सभी डॉक्टर अपने हॉस्टल में हैं। ठीक यही हाल बिहार निवासी चंदन का था। चंदन के पैर में काफी चोट थी। लेकिन उनकी सुनने वाला वहां कोई ना था।
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