दिल्ली के अस्पतालों की पहचान बनती जा रही डॉक्टरों की हड़ताल, चार दिन तक नहीं हुआ उपचार
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दिल्ली के अस्पतालों पर लगा हड़ताल का ग्रहण अब मरीजों को भी खौफ देने लगा है। रविवार को भले ही दिल्ली एम्स सहित सभी अस्पतालों में डॉक्टरों ने हड़ताल खत्म करने की घोषणा की हो, लेकिन एक नजर डालें तो दिल्ली के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में बीते 8 माह में 8 बड़ी हड़ताल हुई हैं। गौर करने वाली बात है कि जिन मुद्दों को लेकर डॉक्टरों ने हड़ताल पर जाने का फैसला लिया, वे मुद्दे हड़ताल के बाद भी वैसे ही ज्वलंत हैं। इनका समाधान ना सरकार कर पाई है और ना ही हड़ताली डॉक्टर।
इस साल जनवरी से अब तक आठ बार डॉक्टरों ने हड़ताल की है। एम्स की बात करें तो यहां दो बार डॉक्टरों ने आपातकालीन और ओपीडी सेवाओं से किनारा किया। बीते बृहस्पतिवार से दिल्ली एम्स में भी डॉक्टर हड़ताल पर चल रहे थे। इससे पहले भी पश्चिम बंगाल में हिंसा के मामले को लेकर एम्स के डॉक्टरों ने 14 से 17 जून तक हड़ताल की।
आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में इस साल हुई आठ में से 5 हड़ताल डॉक्टरों से मारपीट को लेकर हुई, जबकि एक बार उत्तरी निगम के हिंदूराव अस्पताल में डॉक्टरों ने वेतन नहीं मिलने के लिए हड़ताल की थी। इनके जरिए डॉक्टरों ने सरकार के आगे सुरक्षा बंदोबस्त की मांग की थी। हड़ताल खत्म कराने के लिए सरकार ने आश्वासन भी दिया, लेकिन फिलहाल हालात ये हैं कि अस्पतालों में सुरक्षा के इंतजाम अधूरे हैं।
फेडरेशन ऑफ रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुमेध से जब बार बार हड़ताल होने और उनका निष्कर्ष जीरो निकलने को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि कोई भी डॉक्टर जान-बूझकर हड़ताल नहीं करता है। सरकारी अस्पतालों के हालात ऐसे हैं कि डॉक्टरों को नहीं चाहते हुए भी विरोध के रास्ते पर चलना पड़ता है। उन्होंने दुर्भाग्य जताते हुए कहा कि दिल्ली में हड़ताल होने की चिंता उन्हें भी है, लेकिन सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए और खामियों को दूर करना चाहिए।
दिल्ली में दो दिन के लिए ज्यादा होती हैं हड़ताल
साल की पहली हड़ताल 13 जनवरी को सफदरजंग अस्पताल में हुई। 29 अप्रैल को लोकनायक अस्पताल में, 20 मई को हिंदूराव, 12 जून को डीडीयू और 1 जुलाई को हिंदूराव अस्पताल में हुई डॉक्टरों की हड़ताल कम से कम दो दिन तक चली है। ठीक ऐसे ही हालात वर्ष 2018 के देखने को मिले। पिछले वर्ष डॉक्टरों की 20 बार हड़ताल हुई। इनमें 16 हड़ताल दो दिन ही चली थीं। इसे लेकर डॉक्टर भी अब मानने लगे हैं कि दिल्ली में दो दिन के लिए ज्यादा हड़ताल होती हैं।