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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   AIIMS identifies two sensitive areas for the protection of vital organs during cancer surgery

Delhi NCR News: कैंसर सर्जरी में महत्वपूर्ण अंगों की सुरक्षा के लिए एम्स ने पहचाने दो संवेदनशील क्षेत्र

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 18 Oct 2026 05:21 PM IST
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255 जटिल कैंसर ऑपरेशन के अध्ययन के आधार पर रेड अलर्ट जोन की पहचान, रक्तस्राव और अंगों को चोट लगने का खतरा कम करने में मिलेगी मदद
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। कैंसर के जटिल ऑपरेशन के दौरान मरीज की जान बचाने के साथ महत्वपूर्ण अंगों को सुरक्षित रखना भी डॉक्टरों के लिए बड़ी चुनौती होती है। इस चुनौती को कम करने की दिशा में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के डॉक्टरों ने शरीर के दो ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की है, जहां सर्जरी के दौरान विशेष सावधानी बरतना जरूरी है। इन क्षेत्रों की स्पष्ट पहचान से रक्तस्राव और महत्वपूर्ण अंगों को चोट लगने का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।
एम्स के डॉ. बीआरए इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर हॉस्पिटल (आईआरसीएच) के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. एमडी रे और उनकी टीम ने इन क्षेत्रों को परिभाषित किया है। पहले क्षेत्र को ‘रेड अलर्ट जोन’ या ‘रे जोन’ नाम दिया गया है। यह गर्भाशय के आसपास स्थित संवेदनशील हिस्सा है, जहां महत्वपूर्ण रक्त वाहिकाएं, मूत्रवाहिनी और अन्य संरचनाएं एक-दूसरे के करीब होती हैं। गर्भाशय ग्रीवा और अंडाशय के कैंसर की सर्जरी में यहां थोड़ी सी चूक भी गंभीर रक्तस्राव या अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है। शोधकर्ताओं ने 255 जटिल कैंसर सर्जरी के अध्ययन के आधार पर इस क्षेत्र की पहचान की। इसके बाद 105 मरीजों के ऑपरेशन में सर्जरी की प्रक्रिया में बदलाव किया गया।
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नसों को चोट लगने का खतरा कम करने में मदद मिलेगी
नई अवधारणा के तहत सर्जनों को शरीर की अंदरूनी संरचनाओं को ध्यान से देखने, जरूरत के अनुसार आवर्धक उपकरणों का इस्तेमाल करने और रक्त वाहिकाओं को अलग-अलग बांधने पर जोर दिया गया है। मूत्रवाहिनी के पास ऊतकों को जलाने वाली तकनीक से अनावश्यक गर्मी पहुंचाने से बचने की भी सलाह दी गई है। इससे मूत्रवाहिनी, मूत्राशय और नसों को चोट लगने का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है।
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लिवर के पास भी अहम क्षेत्र की पहचान
दूसरे क्षेत्र को ‘रे का हेपेटोकेवल त्रिकोण’ नाम दिया गया है। यह लिवर के पास स्थित होता है और लिवर को आसपास के ऊतकों से अलग करने तथा उसकी स्थिति बदलने के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके आसपास अवर वेना कावा जैसी बड़ी रक्त वाहिका और लिवर की प्रमुख नसें होती हैं। यहां उपकरणों के गलत इस्तेमाल या अधिक दबाव से गंभीर रक्तस्राव हो सकता है।

सटीक सर्जरी पर जोर
दोनों अवधारणाओं का उद्देश्य ऑपरेशन से पहले जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान कर सावधानीपूर्वक सर्जरी करना है। इससे महत्वपूर्ण अंगों की सुरक्षा और मरीजों के जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इन तकनीकों से मरीजों को कितना लाभ मिलता है, इसका आकलन व्यापक चिकित्सकीय अनुभव और आगे के अध्ययन के आधार पर किया जाना महत्वपूर्ण होगा।
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