'एम्स के पूर्व सीवीओ संजीव चतुर्वेदी को तीन सप्ताह में दे जवाब'
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एम्स के मुख्य सतर्कता अधिकारी रहे संजीव चतुर्वेदी के इस पद से हटने के बाद से भ्रष्टाचार के कितने मामलों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को भेजी गई।
कितने मामलों में आगे की जांच के लिए फाइल को केंद्रीय सतर्कता आयोग को भेजी गई। सूचना के अधिकार कानून के तहत संजीव चतुर्वेदी की ओर से दाखिल अर्जी पर केंद्रीय सूचना आयुक्त ने तीन सप्ताह में इन सवालों के जवाब देने का आदेश एम्स प्रशासन को दिया है।
भारतीय वन सेवा के 2002 बैच के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने अपनी एनुअल परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट (एपीएआर) संबंधी जानकारी भी मांगी थी। इस पर केंद्रीय सूचना आयुक्त ने न सिर्फ नीयत समय में जानकारी देने का आदेश दिया है, बल्कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव को आदेश की प्रति भेज कर कहा है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि बेवजह किसी अधिकारी को उसके वरिष्ठ द्वारा एपीएआर लिखने के नाम पर परेशान न किया जाए।
सूचना आयोग ने दिए आदेश जवाब दे एम्स प्रशासन
संजीव चतुर्वेदी ने आरटीआई के तहत जानकारी मांगी थी कि 17 अगस्त 2014 के बाद से एम्स के भ्रष्टाचार के कितने मामले जांच के लिए सीबीआई को भेजे गए।
इसी तारीख से कितने मामले सीवीसी को भेजे गए, जिसमें सीवीसी से आगे की कार्रवाई के लिए राय मांगी गई। इस मामले में केंद्रीय सूचना आयोग की ओर से आवेदक को सिर्फ केस की संख्या बताने के आदेश दिए गए हैं।
संजीव को 14 अगस्त 2014 को एम्स के सीवीओ पद से यह कहते हुए हटा दिया गया था कि इनकी नियुक्ति के लिए सक्षम अधिकारी से अनुमति नहीं ली गई थी।
इसी वजह से संजीव ने अपने से पहले और बाद के आधा दर्जन से अधिक अधिकारियों के नाम लिख कर पूछा था कि इनमें से किसको सक्षम अधिकारी से सीवीओ पद पर नियुक्ति के लिए अनुमति मिली थी।
यह भी पूछा है कि क्या कभी किसी अधिकारी की सीवीओ के पद पर नियुक्ति के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय, सीवीसी अथवा किसी संसद सदस्य की ओर से विरोध किया गया था या नहीं। इसकी भी कॉपी देने का आदेश आयोग की ओर से दिया गया है।