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एम्स भी माना- आग में जले हजारों मरीजों के ब्लड सैंपल, अमर उजाला ने किया था खुलासा
Mon, 19 Aug 2019 05:24 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Mon, 19 Aug 2019 05:24 AM IST
सार
-अमर उजाला ने खुलासा किया था एम्स में लगी आग में कई हजार मरीजों के ब्लड सैंपल नष्ट हो चुके हैं
-इस खबर पर एम्स प्रबंधन ने पुष्टि करते हुए कहा कि माइक्रोबायोलॉजी विभाग के तहत कई प्रयोगशालाएं ब्लॉक में थीं
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एम्स में लगी भीषण आग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भीषण आग में जहां एम्स को कई सौ करोड़ रुपये की क्षति हुई, वहींएम्स पहुंचने मरीजों को भी नुकसान के अलावा परेशानी का सामना करना पड़ा। रविवार के अंक में ‘अमर उजाला’ ने खुलासा किया कि एम्स की भीषण आग में कई हजार मरीजों के ब्लड सैंपल नष्ट हो चुके हैं। कई दर्जन चिकित्सीय शोध और प्रशासनिक कागजात भी खाक हो चुके हैं, जिस टीचिंग ब्लॉक की दूसरी मंजिल पर आग लगी, वहां वायरोलॉजी सहित करीब 12 देश की चुनिंदा प्रयोगशालाएं भी थीं।
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इस खबर पर एम्स प्रबंधन ने पुष्टि करते हुए कहा कि माइक्रोबायोलॉजी विभाग के तहत कई प्रयोगशालाएं ब्लॉक में थीं। ये प्रयोगशालाएं पूरी तरह से नष्ट हो चुकी हैं। ब्लड सैंपल से लेकर इलाज से जुड़े रिकॉर्ड तक तबाह हो चुके हैं। एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन अब स्थिति को नियंत्रण में लाने का प्रयास किया जा रहा है। एम्स का सबसे पहला कर्तव्य मरीजों की सेवा करना है। इसलिए जल्द से जल्द इन प्रयोगशालाओं की वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।
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एम्स निदेशक ने इसके लिए रविवार सुबह सभी विभागों के साथ आपात बैठक भी की, जिसमें उन्होंने अतिशीघ्र मरीजों के लिए पैथोलॉजी सहित तमाम प्रयोगशालाओं पर काम करने के निर्देश दिए।
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दरअसल, जिस ब्लॉक में आग लगी, वहां माइक्रोबायोलॉजी विभाग की लैब है। इसमें वायरोलॉजी के अलावा जीवाणु तत्व, कवक विज्ञान, एचआईवी, इम्मुनोलोगि, ओकुलर माइक्रोबायोलॉजी, माइक्रोप्लाज्मा, सूक्ष्म जीवाणु तत्व सहित करीब 12 प्रयोगशालाएं शामिल हैं। ये सभी प्रयोगशालाएं एम्स आने वाले मरीजों की लाइफलाइन मानी जाती हैं। यहां से रिपोर्ट मिलने के बाद ही मरीजों को डॉक्टर आगे उपचार देते हैं। सूत्रों की मानें तो घटना के वक्त भी करीब 50 हजार मरीजों के ब्लड सैंपल विभिन्न प्रयोगशालाओं में मौजूद थे। हजारों चिकित्सीय रिकॉर्ड भी रखे थे।
प्रयोगशालाएं बनाने में करोड़ों के अलावा कई साल लगे
एम्स में लगी भीषण आग
- फोटो : अमर उजाला
एम्स के डॉक्टरों की मानें तो माइक्रोबायोलॉजी और पैथोलॉजी के तहत कई प्रयोगशालाएं राष्ट्रीय स्तर पर नामचीन थीं। यहां संक्रमण के अलावा एचआईवी जैसे रोग को लेकर भी खास तरह की प्रयोगशालाएं थीं, जिन्हें बनाने में करोड़ों रुपये के अलावा कई साल लगे। आग ने चिकित्सीय जांच के क्षेत्र में एम्स को कई वर्ष पीछे धकेल दिया है।
एक हजार भावी डॉक्टरों का भविष्य खतरे में
एम्स में लगी भीषण आग से मरीज परेशान
- फोटो : अमर उजाला
रविवार को एम्स से मिली जानकारी के मुताबिक, आग में सब कुछ खाक होने से करीब एक हजार भावी डॉक्टरों का भविष्य खतरे में पड़ गया है। इन डॉक्टरों के चिकित्सीय शोध के अलावा कई अहम शैक्षणिक दस्तावेज भी रखे थे, जो आग के हवाले हो चुके हैं। कुछ रेजीडेंट डॉक्टरों ने बताया कि पूरे ब्लॉक में ऐसा कुछ नहीं बचा है, जिसे देख वापसी की कोई गुंजाइश ही नहीं बचती। एमबीबीएस के अलावा एमडी और डीएम के अंतिम वर्ष के भावी डॉक्टरों इस नुकसान की भरपाई कैसे होगी?
डॉक्टर-मरीजों की नहीं हो सकेगी भरपाई
Delhi AIIMS
- फोटो : अमर उजाला
एम्स प्रबंधन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि आग में हजारों मरीजों के ब्लड सैंपल नष्ट होने, उनके दस्तावेजों के जलने और भावी डॉक्टरों के चिकित्सीय शोध जलने की भरपाई फिलहाल संभव नहीं है। एम्स प्रबंधन अपने स्तर पर स्थिति में सुधार लाने का भरसक प्रयास कर रहा है, लेकिन कुछ वास्तविकताएं हैं, जिनमें बदलाव नहीं किया जा सकता।