नेपाल-अफगानिस्तान भूकंप के बाद कोर्ट की केंद्र व दिल्ली को फटकार
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नेपाल और अफगानिस्तान में आए विनाशकारी भूकंप के बावजूद राजधानी में केंद्र व दिल्ली सरकार द्वारा भवनों को सुरक्षित बनाने की दिशा में ठोस उपाय न करने पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है।
अदालत ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राजधानी के 90 प्रतिशत भवनों के असुरक्षित होने की रिपोर्ट के बावजूद सरकार इस दिशा में गंभीर नहीं है और कार्य योजना पेश करने के लिए बार-बार समय मांग रही है।
अदालत ने कहा कि भूकंप से निपटने के लिए ठोस कार्य योजना बनाने के लिए हम तो आप को समय दे देंगे, लेकिन प्रकृति देगी या नहीं, पता नहीं। अदालत ने सरकार को तीन सप्ताह में भवनों को सुरक्षित रखने संबंधी कार्य योजना पेश करने का निर्देश दिया। अगली सुनवाई दो दिसंबर को होगी।
राजधानी की 10 फीसदी बिल्डिंग ही सामना कर सकती हैं भूकंप का
न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति संजीव सचदेव की खंडपीठ ने कहा कि नेपाल में आए भूकंप में हजारों लोग मारे गए। अब दो दिन पहले अफगानिस्तान में आए भूकंप ने पूरे भारत को हिलाकर रख दिया है।
राजधानी सेस्मिक जोन चार की खतरनाक स्थिति में है। राजधानी में मात्र 10 प्रतिशत भवन ही तेज भूकंप का सामना करने में समर्थ है और शेष असुरक्षित है। ऐसे में ऐसी कार्य योजना होनी चाहिए, जिससे भूकंप आने पर भवन सुरक्षित रहें।
अदालत ने कहा इस तथ्य पर केंद्र व दिल्ली सरकार गंभीर नहीं है। आप लोग कार्य योजना पेश करने के लिए बार-बार समय मांग रहे हैं। हम आप के आग्रह को स्वीकार कर भी लेते हैं तो भी क्या आपको पता है कि प्रकृति इसे स्वीकार करेगी या नहीं। हम आशा करते हैं कि अगली सुनवाई से पूर्व कोई आपदा न हो।
बड़ी आपदा आई तो तबाह हो जाएगी देश की राजधानी
अदालत ने शहरी विकास मंत्रालय व दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वे जल्द से जल्द इस दिशा में ठोस कदम उठाए। यदि ऐसा न हुआ तो आपदा आने पर लाखों लोगों की जान जा सकती है।
अदालत ने कहा कि एक भी निकाय ऐसा नहीं है जिसने इस दिशा में ठोस कदम उठाया हो। हाल ही में एमसीडी ने कहा था कि राजधानी का केवल 25 प्रतिशत हिस्सा ही योजनाबद्ध तरीके से बसा हुआ है।
राजधानी में 17000 अनधिकृत कॉलोनियां है और कोई ले आउट योजना नहीं है। एमसीडी ने हाईकोर्ट में दायर शपथ पत्र में माना है कि उनके अधिकार क्षेत्र में मात्र 10 प्रतिशत बिल्डिंग ही भूकंप से सुरक्षित हैं। यदि कभी भूकंप की तीव्रता सात या उससे ज्यादा रही तो 10 में से 9 बिल्डिंग ध्वस्त हो जाएंगी।