राजेश और नूपुर तलवार को सोमवार को डासना जेल से रिहाई से पहले ‘ट्रिपल-सी’ डरा रहा है। इन दोनों को डर है कि पहले की तरह ही यह ट्रिपल-सी उनका पीछा नहीं छोड़ेगा।
अंतिम क्लास में भावुक हुई नुपूर, संडे को भी लगी क्लास
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- फोटो : अमर उजाला
‘ट्रिपल-सी’ यानी कैमरा, कोर्ट और कॉमन मैन । ऐसे में, जेल अधीक्षक ने तलवार दंपती की सुरक्षा व कानून व्यवस्था कायम रखने के लिए एसएसपी से अतिरिक्त पुलिस बल की मांग की है। सोमवार को जेल के बाहर करीब 50 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है।
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arushi talwar
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इसके साथ ही रिजर्व पुलिस को भी तैयार रखने के निर्देश दे दिए हैं। ट्रिपल-सी का पहला डर है कैमरा यानी मीडिया। मीडिया इंवेस्टिगेशन ने ही आरुषि हत्याकांड में पुलिस की लापरवाही की पोल खोली थी। दूसरा डर है कोर्ट। दंपती को लगता है कि सीबीआई हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा सकती है।
तीसरा डर कॉमन मैन यानी जनता है। वह सशंकित है कि समाज उन्हें किस तरह से लेगा। स्वीकार करेगा भी या नहीं। उन्हें बेटी की हत्यारों की नजरों से तो नहीं देखा जाएगा। जेल अधीक्षक दधीराम मौर्य ने बताया कि तलवार दंपती की सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए एसएसपी हरिनारायण सिंह की ओर से पुलिस बल मुहैया कराया गया है।
जेल में तीन साल, 11 महीने और 18 दिन रहकर नूपुर तलवार ने बंदियों बच्चों को पढ़ाया है। उन्होंने रविवार को भी जेल में बच्चों को पढ़ाया। इस दौरान वह अपनी अंतिम क्लास में भावुक हो गईं। जेल अधीक्षक की मानें तो जेल में नूपुर का मेहनताना करीब 32 हजार रुपये बना है, जो उन्होंने लेने से इंकार कर दिया।