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16 दिसंबर 2012 निर्भया कांड के बाद हुआ कानून में बदलाव, जानें क्या...

Mon, 09 Jul 2018 07:15 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 09 Jul 2018 07:15 PM IST
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after 16 december nirbhaya case government changes law
nirbhaya case

16 दिसंबर 2012 गैंगरेप के बाद हुए धरना प्रदर्शनों के बाद केंद्र सरकार ने रेप मामलों में कानून पर विचार के लिए पूर्व मुख्य न्यायाधीश जेएस वर्मा की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया था। वर्मा कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में प्रजातंत्र के जरूरी हिस्से पुलिस, जनप्रतिनिधि कानून, न्यायिक व्यवस्था, सैन्य विशेषाधिकार कानून आदि में सुधार की वकालत की थी।

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जनवरी 2013 में कमेटी ने अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपी थी। फरवरी में सरकार ने सिफारिशों में से कुछ को महिला कानून में शामिल किया था। वैवाहिक बलात्कार और कार्यस्थल पर उत्पीड़न जैसे मुद्दों को आम सहमति के अभाव में संशोधित कानून में शामिल नहीं किया गया था।
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कमेटी को देशभर से कुल 80 हजार सुझाव मिले थे, जिसमें यौन हिंसा, लिंग भेद, राजनीति का अपराधीकरण रोकने के उपाय सुझाए गए थे। कानूनविदों, सरकार और सामाजिक संगठनों से बातचीत के बाद 29 दिन में ये रिपोर्ट तैयार की गई। कमेटी में न्यायमूर्ति वर्मा के अलावा न्यायमूर्ति लीला सेठ और पूर्व सॉलीसिटर जनरल गोपाल सुब्रह्मण्यम शामिल थे।

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कमेटी की कुछ सिफारिशें  

after 16 december nirbhaya case government changes law
nirbhaya case
कमेटी की कुछ सिफारिशें  
- महिला के कपड़े फाड़ने की कोशिश पर 7 साल की सजा मिले
- बदनीयती से देखने, इशारे करने पर 1 साल की सजा मिले 
- इंटरनेट पर जासूसी करने पर 1 साल की सजा दी जाए 
- मानव तस्करी में मिले कम से कम 7 साल की सजा 
- अदालतों में जजों की संख्या बढ़ाई जाए 
- पुलिस के ढांचे और काम करने के तरीके में सुधार हो 
- बच्चों की तस्करी के मामले में सरकार ठोस कदम उठाए और डेटाबेस बनाए 
- कानून का पालन करने वाली एजेंसियां नेताओं के हाथ का खिलौना न बनें 
- सरकारी संस्थाओं के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही लाई जाए 
- सभी शादियां रजिस्टर हों, दहेज लेनदेन पर निगरानी मजिस्ट्रेट करें 
- दुष्कर्म  का मामला दर्ज करने में नाकाम या देरी करने वाले अफसरों पर कार्रवाई हो 
- पीड़ित की मेडिकल जांच के लिए दिया गया प्रोटोकॉल लागू किया जाए 
- सैन्य बलों की तरफ से यौन हिंसा को सामान्य कानून के तहत लाया जाए 
 - आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर एक्ट  की समीक्षा की जाए 
- हिंसाग्रस्त इलाकों में महिला अपराध की जांच के लिए स्पेशल कमिश्नर तैनात हों।
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