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Delhi NCR News: दिल्ली दंगों के मामले में फॉरेंसिक सबूत और कॉल डिटेल रिकॉर्ड को सबूत के रूप में स्वीकार करें
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-दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश, हुसैन ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा 12 अगस्त को पारित उस आदेश को चुनौती दी थी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व आम आदमी पार्टी (आप) काउंसलर ताहिर हुसैन की याचिका स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह दिल्ली दंगों से जुड़े दो अन्य मामलों में बरामद फॉरेंसिक सबूत और कॉल डिटेल रिकॉर्ड को मौजूदा मुकदमे में सबूत के रूप में दर्ज करें। ताहिर हुसैन ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा 12 अगस्त को पारित उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनके मोबाइल फोन का फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (एफएसएल) द्वारा निकाला गया डेटा और एक अन्य मामले में तैयार कॉल डिटेल रिकॉर्ड को रिकॉर्ड पर लेने की मांग खारिज कर दी गई थी।
अदालत में ताहिर हुसैन की ओर से अधिवक्ता राजीव मोहन ने कहा कि वे कोई बचाव साक्ष्य पेश नहीं करना चाहते, इन दस्तावेजों पर कोई विवाद नहीं है और इनके विपरीत कोई साक्ष्य भी नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि यह डाटा अभियोजन पक्ष के साक्ष्य का हिस्सा है और यह उनके मुवक्किल के पक्ष में है, इसलिए इसे मौजूदा मुकदमे में सबूत के रूप में पढ़ा जाना चाहिए। विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) रजत नायर ने कहा कि जब तक ताहिर हुसैन कोई अतिरिक्त साक्ष्य पेश नहीं करते और केवल इन दस्तावेजों पर निर्भर रहना चाहते हैं, तब तक अभियोजन पक्ष को कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने केवल यह शर्त रखी कि मुकदमे में देरी न हो और कोई नया साक्ष्य न लाया जाए।
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 12 अगस्त के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि संबंधित दस्तावेजों को मुकदमे में सबूत के रूप में पढ़ा जाए। साथ ही यह स्पष्ट किया कि बचाव पक्ष कोई साक्ष्य पेश नहीं करेगा और इन दस्तावेजों की प्रासंगिकता का आकलन ट्रायल कोर्ट स्वयं करेगा तथा अपना मत बनाएगा।ि
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व आम आदमी पार्टी (आप) काउंसलर ताहिर हुसैन की याचिका स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह दिल्ली दंगों से जुड़े दो अन्य मामलों में बरामद फॉरेंसिक सबूत और कॉल डिटेल रिकॉर्ड को मौजूदा मुकदमे में सबूत के रूप में दर्ज करें। ताहिर हुसैन ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा 12 अगस्त को पारित उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनके मोबाइल फोन का फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (एफएसएल) द्वारा निकाला गया डेटा और एक अन्य मामले में तैयार कॉल डिटेल रिकॉर्ड को रिकॉर्ड पर लेने की मांग खारिज कर दी गई थी।
अदालत में ताहिर हुसैन की ओर से अधिवक्ता राजीव मोहन ने कहा कि वे कोई बचाव साक्ष्य पेश नहीं करना चाहते, इन दस्तावेजों पर कोई विवाद नहीं है और इनके विपरीत कोई साक्ष्य भी नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि यह डाटा अभियोजन पक्ष के साक्ष्य का हिस्सा है और यह उनके मुवक्किल के पक्ष में है, इसलिए इसे मौजूदा मुकदमे में सबूत के रूप में पढ़ा जाना चाहिए। विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) रजत नायर ने कहा कि जब तक ताहिर हुसैन कोई अतिरिक्त साक्ष्य पेश नहीं करते और केवल इन दस्तावेजों पर निर्भर रहना चाहते हैं, तब तक अभियोजन पक्ष को कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने केवल यह शर्त रखी कि मुकदमे में देरी न हो और कोई नया साक्ष्य न लाया जाए।
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हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 12 अगस्त के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि संबंधित दस्तावेजों को मुकदमे में सबूत के रूप में पढ़ा जाए। साथ ही यह स्पष्ट किया कि बचाव पक्ष कोई साक्ष्य पेश नहीं करेगा और इन दस्तावेजों की प्रासंगिकता का आकलन ट्रायल कोर्ट स्वयं करेगा तथा अपना मत बनाएगा।ि
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